योग मुद्रा क्या हैं | योग मुद्रा के प्रकार (What are Yoga Mudras? types of yoga poses)
योग हस्त मुद्रा या हस्त मुद्रा (Yoga - Hand Gestures) प्राचीन काल से प्रभावकारी माना जाता आ रहा हैं, चाहे वह ध्यान के क्षेत्र में हो या योग के क्षेत्र में. आपने भी अक्सर देखा होगा की जितने भी महान तपस्वी, संत, महात्मा हुए हैं वे अपने हाथों को किसी एक विशेष स्थिति में कर के बैठे या खड़े होते हैं, और इसे ही मुद्रा (mudras) कहा जाता हैं.
मुद्रा क्या है? (What is Mudras)
मुद्रा (mudras), हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में एक प्रतीकात्मक या अनुष्ठानिक इशारा है। कुछ मुद्राओं में पूरा शरीर शामिल होता है, जबकि अधिकांश केवल हाथों और उंगलियों से की जाती हैं। मुद्रा भी एक आध्यात्मिक इशारा है जो, आमतौर पर योग और ध्यान में प्रयोग किया जाता है।
हमें ध्यान मुद्रा का अभ्यास क्यों करना चाहिए?
योगाभ्यास में मुद्रा का उपयोग सेल्फ केयर और सशक्तिकरण के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। योग का मकसद अपने आप को पहचानना और ऊर्जावान बनाना है। 100 से अधिक ज्ञात मुद्राएं हैं जिन्हें सदियों से विकसित किया गया है।
ज्ञान मुद्रा (Gyan Mudra): -
ज्ञान मुद्रा का उद्देश्य आपकी एकाग्रता में सुधार करना और आपकी याददाश्त को तेज करना है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए और उसके उपयोग करने के लिए यह एक महान मुद्रा है। विधि : यह मुद्रा तर्जनी को अपने अंगूठे की नोक से छूकर अपनी अन्य तीन अंगुलियों को सीधा रखते हुए की जाती है।
ज्ञान मुद्रा के फायदे (Benifits of Gyan Mudra)-
- ज्ञान मुद्रा शरीर में वायु तत्व को बढ़ाता है।
- बॉडी में जोश, साहस और रचनात्मक सोच को बढ़ाता है।
- ज्ञान मुद्रा हमारे अवचेतन मन की विचार क्षमता और याददाश्त को बढ़ाता है।
- थकान, आलस्य और मानसिक उलझनों से निपटने में बेहद कारगर है।
बुद्धि मुद्रा (Budhhi Mudra):-
इस मुद्रा का उपयोग मानसिक स्पष्टता के लिए किया जाता है। इस मुद्रा के लाभ कम्युनिकेशन के सुधार के के रूप में पाए जा सकते हैं। विधि : इस मुद्रा को अपनी छोटी उंगली से अपने अंगूठे को छूकर अपनी अन्य तीन अंगुलियों को सीधा रखते हुए किया जाता है।
बुद्धि मुद्रा के फायदे (Benifits of Buddhi Mudra)-
- बुद्धि मुद्रा का मुख्य फायदा वार्ता के दौरान देखा जाता हैं।
- बुद्धि मुद्रा बुद्धि को शांत और शार्प करने में सहायक होता हैं।
- इससे मानशिक स्पस्टता में सुधार व सहायता मिलती हैं।
शुनि और शून्य मुद्रा (Shuni Aur Shuny Mudra):-
इस मुद्रा का उपयोग अंतति, सतर्कता और संवेदी शक्तियों में सुधार के लिए किया जाता है। यह आपकी भावनाओं और विचारों को भी शुद्ध करता है। विधि : इस मुद्रा को मध्यमा अंगुली के सिरे को अंगूठे के सिरे से स्पर्श करते हुए अन्य तीन अंगुलियों को सीधा और शिथिल रखते हुए किया जाता है।
शुनि और शून्य मुद्रा के फायदे (Benifits of Shuni Aur Shuny Mudra)-
- शारीर व मन को स्वस्थ रखने में सहायक।
- शरीर में अंतरिक्ष तत्व को कम करता है।
- कान में दर्द, सुनने में समस्या, यात्रा की थकान को कम करता है।
- शरीर के कई अंगों जैसे, सिर और सीने में हल्के दर्द को कम करता है।
- वात प्रकृति वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद।
प्राण मुद्रा (Pran Mudra):-
प्राण मुद्रा को आपके शरीर में निष्क्रिय ऊर्जा को सक्रिय करने की क्षमता के कारण सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक कहा जाता है। विधि : इस मुद्रा को अपनी अनामिका और पिंकी(कनिठिका) उंगलियों को अपने अंगूठे के सिरे से स्पर्श करते हुए अन्य दो अंगुलियों को सीधा रखते हुए करें।
प्राण मुद्रा के फायदे (Benifits of Pran mudra)-
- प्राण मुद्रा ह्रदय से कंठ तक के रोगों से मुक्ति में सहायक।
- भूख-प्यास व प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक।
- तन-मन की दुर्बलता को दूर करने में।
ध्यान मुद्रा (Dhyan Mudra):-
इस मुद्रा का महत्व आपको अधिक गहन एकाग्रता में लाना है। यह इशारा आपको शांति और आंतरिक शांति लाने में भी मदद कर सकता है।" विधि : अपने हाथों को ऊपर की ओर करके बैठे, दाहिना हाथ अपनी बायीं हथेली के ऊपर टिका लें।
ध्यान मुद्रा के फायदे (Benifits of dhyan Mudra)-
- ध्यान मुद्रा के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है।
- ध्यान मुद्रा दिमाग को मेडिटेशन की गहरी अवस्था में ले जाती है।
- बुद्धिमता और स्मरंशक्ति को बढाने में फायदेमंद।
- ध्यान व मेडिटेशन करने के लिए प्रमुख माना जाता हैं।
सूर्य मुद्रा (Surya Mudra):-
सूर्य मुद्रा का उद्देश्य चयापचय और पाचन में सुधार करना है। यह शरीर में भारीपन को कम करने और सर्दी से बचाव में मदद करने में भी उपयोगी है। विधि : इस मुद्रा को अपनी अनामिका को अपने अंगूठे के आधार पर झुकाकर करें ताकि आपका अंगूठा अनामिका के पोर को स्पर्श करे। हाथ पर जोर दिए बिना अपनी अन्य तीन अंगुलियों को सीधा फैलाएं।
सूर्य मुद्रा के फायदे (Benifits of Surya Mudra)-
- शरीर में अग्नि तत्व को बढ़ाती है जबकि पृथ्वी तत्व को कम करती है।
- शरीर के तापमान को बढ़ाती है।
- ठंड से कंपकंपी होने पर राहत देती है।
- लो थायरॉयड की समस्या वाले लोगों के लिए बेस्ट है।
- वेट लॉस, अपच, कब्ज या भूख न लगने की समस्या को दूर करती है।
अपान मुद्रा (Apan Mudra):-
अपान मुद्रा मानसिक या शारीरिक पाचन के लिए और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ को खत्म करने के लिए अच्छी है। विधि : इस आसन को करने के लिए अपनी दूसरी और तीसरी अंगुलियों को अपने अंगूठे के पास (मध्यम और अनामिका को अंगूठे के सिरे तक लाएं।
अपान मुद्रा के फायदे (Benifits Apan Mudra)-
- अपान मुद्रा पेट के सभी अंगो को सक्रीय करता हैं।
- तमशिक पदार्थो को नष्ट करने में सहायक।
- पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाने में उपयोगी।
गणेश मुद्रा (Ganes mudra):-
गणेश मुद्रा आपके जीवन में सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने के लिए बहुत अच्छी है।" । विधि : अपने बाएं हाथ को अपनी छाती के सामने रखें, आपकी हथेली बाहर की ओर और आपका बायां अंगूठा नीचे की ओर। इसके बाद, अपने दाहिने हाथ को अपनी बाई हथेली के सामने रखें और अपनी दाहिनी हथेली को अपनी ओर और अपनी बाईं हथेली की ओर रखें। अपनी उंगलियों को एक साथ बंद करें, उन्हें पंजे की तरह आधा मुड़ा हुआ स्थिति में रखें।
गणेश मुद्रा के फायदे ( Benifits Ganes mudra)-
- गणेश मुद्रा विषेश कर आत्मविश्वास को बढाने में उपयोगी होता हैं।
- गणेश मुद्रा फेफड़ो के विस्तार में मददगार।
- शरिर में स्फूर्ति को बढ़ावा देता हैं।
- चिंता व तनाव जैसे मानशिक विकारों से मुक्ति।
वायु मुद्रा (Vayu Mudra):-
वायु मुद्रा वायु असंतुलन से संबंधित रोगों के लिए अच्छा है, जैसे गैस से संबंधित दर्द, पेट फूलना, जोड़ों का दर्द, है सूजन और पेट की परेशानी। विधि : अंगूठे को तर्जनी के पोर से जोड़ दें। तर्जनी को अपने आराम के स्तर तक दबाएं; यह इशारा आराम करने के लिए है न कि जोड़ को तनाव देने के लिए।
वायु मुद्रा के फायदे (Benifits of Vayu Mudra)-
- मन को शांत रखने में मददगार होती है।
- इम्यूनिटी को बढ़ाती है।
- गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे गैस और एसिडिटी पर काबू पाने में मददगार होती है।
- एंडोक्राइन ग्लैंड को उत्तेजित करती है।
- क्षतिग्रस्त और डेड नर्वस सेल्स को पुनर्जीवित करती है।
- वायु दोष के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द को दूर करती है।
रुद्र मुद्रा (Rudra Mudra):-
यह मुद्रा अक्सर भगवान शिव से जुड़ी होती है क्योंकि यह आपकी आंतरिक परिवर्तनकारी क्षमताओं पर लागू होती है। यह मुद्रा स्पष्टता और विचार की एकाग्रता में सुधार करने में मदद करती है। विधि : इस मुद्रा को करने के लिए अपने अंगूठे को अपनी तर्जनी और अनामिका से जोड़ लें, जबकि अपनी अन्य दो अंगुलियों को जितना हो सके सीधा रखें।
रुद्र मुद्रा के फायदे (Benifits Rudra Mudra)-
- यह मुद्रा भूख और प्यास को नियंत्रित करने में मददगार है।
- इस मुद्रा के अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है।
- इस मुद्रा से पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने में काफी मदद मिलती है।
- यह मुद्रा मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को ऊर्जान्वित करने में सहायक है।
