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SUMMER HEALTH TIPS HINDI

Summer Health Tips Hindi- दोस्तों हम सब जानते हैं की गर्मियों के मौसम में हमारे शरीर की हालात क्या होती हैं। वैसे देखा जाए तो मानाव शरीर सभी मौसम के अनुरूप अनुकूल होने की क्षमता होती हैं, पर कई बार कई मौसम के सामने हमार शरीर टिक नहीं पाता. ठीक वैसा ही हाल कुछ गर्मी का हैं।

 

आज के इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे खास टिप्स के बारे में जानने वाले हैं, जिससे हम अपने बॉडी को भीषण गर्मी से बचा सके। Summer Health Tips Hindi

Summer Health Tips Hindi

Summer Health Tips Hindi table of content

  • पानी का नियमित सेवन (Regular Water Intake)
  • अपने अंगों की सुरक्षा(Protect Your Organs)
  • भोजन का रखें ध्यान (Take Care of Food)
  • नरम व सूती के कपड़े पहने (Wear Soft and Cotton Clothes)
  • तरल पदार्थों का उपयोग(Use Of Liquids)
  • AC या कूलर से निकलते ही सीधे धूप के संपर्क में ना जाए
  • गर्मी में व्यायाम और आराम (Summer Exercise And Rest)
  • लू व हीट वेव से रहें सावधान (Beware of Heat Wave and Heat Wave)

1. पानी का नियमित सेवन (Regular Water Intake)-

दोस्तों जैसे ही गर्मियों का मौसम आता हैं वैसे ही हमारे शरीर में पानी की मात्रा अपने आप कम होने लगती हैं। और इसकी सबसे बड़ी वजह हमारे बॉडी का बढ़ता हुआ तापमान, ऐसे स्थिति में पानी की कमी से हमारे शरीर में न जाने ऐसे कई सरे दिक्कते आने लगती हैं, जो कही न कही हमारे शरीर को नुकसान पहुचाता हैं। ऐसी स्थिति में हमें गर्मियों में पानी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

2. अपने अंगो की सुरक्षा(Protect Your Organs)-

आपने यह बात नोटिस की ही होगी की, जब भी हम भरी गर्मी में कही बाहर जाते हैं तब त्वचा में जलन महसूस होता है. यह सब तेज धुप की वजह से होता हैं, जिससे हमें बचना जरूरी होता हैं सूर्य की किरने धुप के साथ-साथ कई सारे घाताक किरणों को भी ले कर आता हैं। और यह घातक किरणें हमारे कोशिकाओं को नष्ट करती हैं।Summer Health Tips में यह प्रमुख हैं।

3. भोजन का रखें ध्यान (Take Care of Food)-

गर्मियों के दिनों में कही न कही बाकी मौसमो की तुलना में हमारे शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती हैं। हमारी बॉडी का तापमान बढ़ने की वजह से हमारे शरीर में ऊर्जा की अल्पता होती जाती हैं और हमारा शरीर कमजोर पड़ता जाता हैं और ऐसे हमारे सेहत के खराब होने की नौबत ज्यादा बनी रहती हैं। ऐसे में कोशिश करें की जब भी घर से बाहर निकले तो कुछ खा कर ही निकले ताकि बॉडी में ऊर्जा की मात्रा बनी रहें। खाने में कोशिश करें की तली भुनी चीजें ना ले बल्कि उसकी जगह कुछ फल या हल्दी चीजों को शामिल करें

4. नरम व सूती के कपड़े पहने (Wear Soft and Cotton Clothes)-

दोस्तों जैसा की आप सब जानते हैं हम अपने पहनावे को जरूरत के हिसाब से बदलते रहते हैं। जैसे- कही घुमने गए तो घुमने वाले कपड़े, खेलने गए तो स्पोर्ट्स के कपड़े पहनते हैं। ठीक इसी तरह से गर्मियों के दिनों में कुछ खास तरह के कपडे पहने जैसे की सूती के कपड़े, हलके कपड़े, ऐसे कपड़ें जिससे हवा पास हो सके। और गर्मी के वजह से आने वाले पसीने से आपको राहात मिल सके।

5. तरल पदार्थों का उपयोग(Use Of Liquids)-

आपने देखा होगा की जैसे ही गर्मियों का सीजन आता हैं तरल पदार्थो की मांग बढ़ जाती है। इसका मतलब यह हैं की लोग गर्मियों के दिनों में कई ऐसे तरल पदार्थो का सेवन करते हैं जिससे उन्हें ऊर्जा मिल सके। आप भी गर्मियों के दिनो में अपने पसंद के अनुसार तरल पदार्थ जैसे की - नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, जूस का सेवन कर सकते हैं। अब गर्मी के दिनों में ठंठे तरल पदार्थो को कई लोग धुप से आते ही थके हुए हाल में पिने लगते हैं, जो की गलत तरिका हैं आप किसी भी तरल पदार्थो का सेवन करें तो आराम से करें।

6. AC या कूलर से निकलते ही सीधे धूप के संपर्क में ना जाएं-

कई बार होता हैं की जैसे हम अपने घर या ऑफ़िस में बैठे हैं और आपको अचानक बाहर जाना हो गया तो ऐसे में सीधे धूप के संपर्क में न जा कर थोडा कम धूप में पहले जाए फिर आगे बढे।

AC या कूलर में रहने से हमारी त्वचा काफी सेंसेटिव हो जाती हैं और जैसे ही हम बाहर धूप के संपर्क में आते हैं तो हमारी त्वचा धूप में शामिल हानिकारक किरणों से नहीं लड़ पाती और वह जलने लगती हैं, जिससे हमें जलन महसूस होती हैं।

7. गर्मी में व्यायाम और आराम (Summer Exercise And Rest)-

दोस्तों जीवन में जितना आराम जरूरी हैं उतना व्यायाम भी जरूरी हैं, गर्मी के दिनों में कोशिश करें की समय निकल कर व्यायाम करें। और रही बात आराम की तो यदि आपके पास समय बचता हैं दोपहर में पावर नैप जरूर ले ‘ पावर नैप’ का अर्थ थोड़े समय की नींद होती हैं जिसमें आप अपने शरीर के साथ-साथ अपने दिमाग को भी आराम देते हैं ताकि वह अच्छे से और तेजी से काम कर जाएं।

8. लू व हीट वेव से रहें सावधान (Beware of Heat Wave and Heat Wave)-

जैसे ही मई-जून की गर्मिया स्टार्ट होती हैं तब कड़ाके की धूप और गर्मी जीना दुर्भर कर देतीं हैं और इस्क्जे साथ ही साथ आता हैं लू और हीट वेव जो एक आम व्यक्ति के शरीर को झकझोर कर रख देता हैं। जब भी आप गर्मियों के मौसम में घर से बाहर निकले तो कुछ जरूरी तैयारी के साथ ही निकले जैसे की- साथ में एक पानी की बोतल रखना, हाथ व पैरो को पूरी तरह ढकना, चेहरे व सर की सुरक्षा के लिए स्कार्फ व टोपी का इस्तिमाल करना.

दोस्तों आज के इस आर्टिकल Summer Health Tips Hindi में हमने जाना की कैसे हम अपने और अपने शरीर की सुरक्षा कर सकते हैं। इस लेख में Summer Health Tips Hindi में बताई गयी बातें यदि आपको उपयोगी लगी हो तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों तक शेयर जरूर करे। 

Healthy Lifestyle Tips in Hindi | हेल्थ टिप्स

स्वस्थ जीवन को मानव जीवन का सबसे बड़ा धन कहा जाता हैं. वैसे तो सेहतमंद रहने के हजारों तरीके है, और वह तरीके अलग-अलग नियम के अनुसार काम करती हैं. आज हम उन्ही तरिको में से कुछ महत्वपूर्ण नियमों को जानेंगे जिससे की हम अपने जीवन में सेहतमंद रह सकते हैं।

अपने भोजन को दवा की तरह खाओ ताकि आप उस अवस्था में न पहुंच जाओ, जहां दवा ही आपका भोजन हो। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे लीन प्रोटीन, स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट।

स्वस्थ जीवन के लिए सुनहरा नियम | Health Tips in Hindi

जब 20 साल के हों (When 20 Years Old)-

स्वस्थ जीवन के लिए इस उम्र में, आपका रक्त बिना रुकी हुई धमनियों से मुक्त रूप से बहता है और आपके पास कोशिकाएं होती हैं आहार : मधुमेह और कब्ज से सुरक्षित रहने के लिए फाइबर युक्त भोजन करें। दूध, मछली, टूना, सामन, अनाज, दलिया, सोया जैसे उच्च विटामिन डी वाले भोजन को शामिल करें।

जाने- नींद की कमी से होने वाले नुकशान 

जब 30 साल के हों (When 30 Years Old)-

इस उम्र में, आपका चयापचय धीमा होने लगता है और आपको वजन बढ़ने और मांसपेशियों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आपको हृदय रोगों के जोखिम के बारे में भी सोचना होगा। अपने आहार में ओमेगा -3 फैटी एसिड शामिल करें। शराब पीने की आदत न डालें, यह निश्चित रूप से आपके जीवन को बर्बाद कर देगा।

जब 40 साल के हों (When 40 Years Old)-

इस उम्र में, एटाआक्सिडेंट से भरपूर उच्च फाइबर वाले आहार पर अधिक ध्यान दें। मौसमी और स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक फल खाएं। अमरुद, आम, ड्रैगन फ्रूट, चुकंदर, कटी हुई पत्ता गोभी की सलाह दी जाती है। कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें और जंक फूड को ना कहें।

जब 50 साल के हों (When 50 Years Old)-

इस उम्र में, महिलाओं को चिंता करने के लिए रजोनिवृत्ति होती है, पुरुषों के पास ध्यान केंद्रित करने के लिए उनके मिड्रिफ होते हैं। रक्त शर्करा के स्तर, रक्त में कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप की जांच करें। अपने आहार में पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। पैकेज्ड और जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें।

पढ़े- तनाव दूर करने के अचूक उपाय 

जब 60 साल के हों (When 60 Years Old)-

आप ग्रेट हैं, जीवन में बहुत आगे निकल आए हैं। इस उम्र में आपको अपनी मांसपेशियों को बनाए रखने और एक्स्ट्रा वेट से लड़ने पर ध्यान देने की जरूरत है। अपने प्रोटीन सेवन में विविधता लाएं और सुनिश्चित करें कि आपको पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति मिलती रहे।

जब आप 70 या 80 के हों (When You're 70 Or 80)- 

इस उम्र में, हाइड्रेशन चिंता का एक प्रमुख कारण है, इसलिए दिन में लगभग 6-8 गिलास या कप पर्याप्त पानी पिएं। आपकी कैलोरी का सेवन आपकी गतिविधि के स्तर और चयापचय पर निर्भर करता है। वॉक करें, आस-पास से छोटी-मोटी शॉपिंग करें, जिससे ताकत और लचीलापन बना रहे।

इन्हें भी जरूर पढ़े:- 

तनाव को कैसे दूर करें

तनाव कही न कही हमारे लाइफ को घेरे रहता हैं और साथ ही साथ कई तरह की अन्य बीमारियों को भी अपने साथ ले कर आता हैं. बेहतर तो यही होगा कि तनाव को बढ़ने न दें। भावनाओं का प्रबंधन सीखें। दुख, चिंता, निराशा जैसी भावनाएं तो आएंगी, परंतु आप उनसे कितना प्रभावित होते हैं यह आपके ऊपर हैं। लेकिन अपने तनाव को कम कैसे करें या किस तरह से हम अपने तनाव को कम कर सकते हैं. इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां आज हम आपको इस लेख में डे रहे हैं, जिसके जरियें आप अपने तनाव को कम कर सकते हैं.

तनाव को दूर करने के अचूक उपाय - Stress Relieve Tips

मेडिटेशन यानी ध्यान करें:-

अध्ययनों से साबित हुआ हैं कि ध्यान करने से तनाव में राहत मिलती हैं। साथ ही इसे ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों में भी कारगर पाया गया हैं। शांत मन से आप सोच-समझकर खाते हैं। आप इस बात पर गौर करते हैं कि आपको ज्यादा फैट या चीनी से मुक्त आहार का सेवन कैसे करना चाहिए।

पढ़े – मेडिटेशन के फायदे

योग-व्यायाम करें:-

व्यायाम करने से शरीर में कॉर्टिसोल की मात्रा नियंत्रण में रहती हैं, जिससे आप तनाव के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रह सकते हैं। योग जैसी गतिविधियों में व्यायाम और ध्यान दोनों का संयोजन शामिल होता है।

जब हम व्यायाम करते हैं तो हमारे बॉडी में कुछ ऐसे हार्मोन्स रिलीज होते हैं जो हमें खुशी महसूस करता हैं और यही खुशी हमें हमारे तनाव से लड़ने के लिए प्रेरित करती हैं.

सामाजिक सहयोग:-

परिवार, दोस्त और समाज के अन्य लोगों से मिलने वाला सहयोग भी तनाव को दूर करने में कारगर हो सकता हैं। यदि अकेले रहने से आपको ऊब होती हैं, तनाव घेरता है तो प्रियजनों से मिले-जुलें, कोई टीम गेम खेले. इससे आप अपने मन की शांति भी कर सकते हैं और साथ ही साथ तनाव से मुक्ति भी.

भरपूर नींद लेने की आदत:-

दोस्तों जिस तरह हमारे जीवन में खाना,पीना और वायु जरूरी हैं, उतना ही जरूरी नींद का भी हैं. जब भी हम अपना नींद पूरा नहीं कर लेते तब तक हमें फ्रेश महसूस नहीं होता, और ऐसे करते करते हम तनाव का शिकार हो जाते हैं जिससे निकलने में समय लग जाता हैं. तो याद रखें की हमें तनाव मुक्त रहने के लिए नींद की आवश्यकता होती ही होती हैं.

ज्यादा सोचने की आदत:-

दोस्तों कई लोग ऐसे होते हैं जो छोटी-छोटी बातों के बारे में ज्यादा ही सोचते हैं, जो की कई न कही गलत हैं. किसी चीज के बारे में जब जरूरत से ज्यादा सोचते हैं तो हमारी मानसिक ऊर्जा एक ही जगह पर खपत होने लगती हैं और हमें थकान महसूस होने लगता हैं और कई लोग इसी वजह से चिड़चिड़ा भी हो जाते हैं. और फिर उन्हें तनाव होना सुरु हो जाता हैं. तो कोशिश करें की ज्यादा सोचने से बचे और बात बात पे चिंता करने से बचे.

पढ़े - भूलने की बीमारी के कारण व इलाज 

दोस्तों आप ऊपर बताई गयी टिप्स को अपना कर एक तनाव मुक्त जीवन जी कसते हैं और अपने तन के साथ साथ अपने मन को भी स्वस्थ रख सकते हैं, क्योकि जब तक मन स्वस्थ नहीं होगा तब तक स्वस्थ तन का कोई महत्त्व नहीं माना जाता हैं. तनाव कम करने के लिए बताई गयी बातें यदि आपको अच्छी और उपयोगी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें. 


आंखों की आम बीमारियां | Common Eye Diseases

आज बढ़ते प्रदुषण के समय में यदि पर्यावरण के अलावा और भी कोई चीज हैं जो ज्यादा प्राभावित हुई हैं तो वह हैं मानव शरीर की इन्द्रियां. जिन इन्द्रियों में सबसे महत्वपूर्ण होता हैं हमारी आँखे, आँखों के बिना किसी व्यक्ति का जीवन में अँधेरा हो जाता हैं. आज के इस आर्टिकल में हम आपको आंखों की आम बीमारियो के बारे में जानकारी देंगे. जिसे जानने के बाद आप इन बीमारियों के प्रति जागरूक हो सकते हैं. 

Common Eye Diseases

01. ड्राई आईज सिंड्रोम (Dry Eyes Syndrome)- 

आंखें सूखना एक ऐसी समस्या है, जिसमें आंखों की आंसू बनाने वाली ग्रंथि तेजी से और सही मात्रा में आंसू नहीं बना पाती। केटकंजंक्टिविटिस सिक्काइस नाम से भी जाने-जानी वाली इस बीमारी में आंखों में खुजली, जलन, लाली और सूजन आ जाती है। कभी-कभी इसके कारण कम दिखना भी शुरू हो जाता है। 

02. कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis)-

कंजंक्टिवाइटिस में पलकों की अंदरूनी सतह और कॉर्निया को ढंकने वाले टिश्यू में सूजन आ जाती है। इसे पिंक आई, आंख आना या नेत्र शोथ के नाम से भी जाना जाता है। इसके मुख्य लक्षण, आंखों में लाली, खुजली, जलन, आंसू, आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं। 

इनके बिना हम जीवन की कल्पना करने से भी डरते हैं। आंखे इतनी नाजुक होती हैं कि इनको हुआ हल्का सा भी नुकसान इन्हें खराब कर सकता है। लेकिन इनके प्रति थोड़ी सी सावधानी बरतने से आंखों को सालों सालस्वस्थ्य रखा जा सकता है। कीचड़ और तेज चुभन हैं। यह बीमारी हर उम्र के लोगों को हो सकती है। इसका कारण, संक्रमण, रसायन का संपर्क और उत्तेजक पदार्थ, या एलर्जी होते हैं।

03. आंसू आना (Tears Fall)- 

इस बीमारी में आंखें रोशनी, हवा और तापमान में परिवर्तन के लिए बहुत संवेदनशील हो जाती है और आँखों से बहुत ज्यादा पानी आना शुरू हो जाता है। कभी-कभी धूप का चश्मा और अपनी आंखों को ढंककर इस बीमारी से बचा जा सकता हैकभी-कभी आंखों से लगातार पानी आना, समस्या का संकेत भी हो सकता है।

04. कॉर्नियल डिजीज (Corneal Disease)- 

कॉर्निया, आंखों के सामने साफ और गुंबद के आकार का होता है। यह आंखों पर पड़ने वाले प्रकाश पर फोकस करने में मदद करता है। कोई अन्य बिमारी, संक्रमण, चोट, या किसी टॉक्सिक पदार्थ के संपर्क में आने पर कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिसके कारण आंखें लाल होना, आंखों में पानी, दर्द, देखने की क्षमता कम होना, और हेलो इफेक्ट जैसी समस्या हो सकती है।

05. पलकों की समस्या (Eyelid Problems)- 

हमारी पलकें हमारी आंखों की सुरक्षा करते हैं। यही आंसू वितरण और आंख में प्रवेश करने वाली प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करते है। दर्द, खुजली, आंसू और प्रकाश के लिए आंखों का संवेदनशील. होना इसके आम लक्षण हैं। इसके अलावा डुपिंग आईलिड, पलक झपकाने पर ऐंठन, आईलैश के पास पलकों की बाहरी किनारों पर सूजन जैसी समस्या भी देखने को मिलती है।

06. आंखों की परेशानियां (Eye Problems)-

आंखें शरीर का प्रमुख अंग होती हैं। विभिन्न मौसम के अनुरुप आंखों में अनेक रोगों की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए आंखों से जुड़े विभिन्न लक्षण कई तरह के रोगों की ओर इशारा करते है। किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर विशेषज्ञ सबसे पहले आंखों की जांच करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि कई रोगों की जानकारी आंखों से ही मिलती है। जानते हैं कि आंखों में किसी भी तरह का बदलाव होने से क्रोन सौ बीमारियों का पता लगाया जा सकता है, और ऐसा करके आप आँखों की परेशानी का पता लगाकर उसका इलाज कर सकते हैं.  

07. एलर्जी (Allergies)-

आंखों में एलर्जी होना सामान्य बात है जिसका आंखों को गुलाबी रंगत से पता लगाया जा सकता है. एलर्जी किसी भी प्रकार की हो सकती है जैसे धूल-मिट्टी और धूप से भी।

08. आइराइटिस (Iritis)- 

कई बार आंखों में कचरा गिर या हल्की चोट लगने से आंख की पुतली और पर्दे प सूजन व जलन होने लगती है जिस वजह से आंख का रंग बदलकर बैंगनी हो जाता है। इस समस्या के आइराइटिस कहते हैं। वैसे तो आइराइटिस बड़ी ही सामान्य सी चीज लग रहो हो परन्तु यह बड़ा रूप ले कर गंभीर सम्सयायें भी उत्पन्न कर सकता हैं. 

09. काला मोतिया (काला मोतिया)- 

लंबे समय से दर्द महसूस होने और लालिमा दिखने से आंख में काले मोतिया की समस्या की आशंका हो सकती है।

 

10. ब्लेफेराइटिस (Blepharitis)- 

आंखों की पलकों के किनारे इंफेक्शन होने पर जब सूखापन, खिंचाव, सूजन और आंखों को खोलने व बंद करते समय दर्द महसूस हो तो इस समस्या को ब्लेफेराइटिस कहते हैं। 

11. गुहैरी (Guhairy)-

कई बार आंख के अंदरूनी या बाहरी भाग में इंफेक्शन होने के कारण दर्दभरी फुसी हो जाती है। इसे गुहैरी कहते हैं। ऐसे में आंख बंद करने में परेशानी महसूस होती है।

तो दोस्तों आंखों की आम बीमारियां | Common Eye Diseases से जुडी यह जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट में बताएं, और आपसे निवेदन हैं की इस जानकारी को अपने सभी दोस्तों को शेयर जरूर करें ताकि वे भी इस जानकारी को जान सके और अपने आँखों को सुरक्षित रख सके. 

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Important Information About Omicron

बीते वर्ष में पहले ही बहुत तबाही मचा चुका कोरोना वायरस एक बार फीर नए वेरियंट के रूप में उभर रहा हैं, जिसे वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन (Omicron) नाम दिया हैं. इस ओमिक्रॉन (Omicron) वायरस के चलते ओमिक्रॉन (Omicron) से जुड़े कई सवाल सामने आये हैं, और वैज्ञानिक शोध में भी इसे खतरा बताया जा रहा हैं. आज के इस लेख में हम उन्ही कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाबो को जानेंगे – 

Omicron In Hindi

ओमिक्रॉन से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ -

  • ओमिक्रॉन क्या है?
  • ओमिक्रॉन को चिंताजनक वैरिएंट क्यों माना जा रहा है? 
  • ओमिक्रॉन की म्यूटेशन काउंट क्या है? 
  • किन देशों में ओमिक्रॉन (कोरोना का नया वैरिएंट) पाया गया? 
  • ओमिक्रॉन कैसे उभरा? 
  • ओमिक्रॉन के खिलाफ टीके का क्या प्रभाव होगा? 
  • ओमिक्रॉन के लक्षण (Symptoms Of Omicron)

ओमिक्रॉन क्या है?

ओमिक्रॉन कोविड का एक नया रूप है, जिसे सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में खोजा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यचओ) द्वारा बी.1.1.529 के रूप में पहचाने जाने वाले नए वैरिएंट को 'चिंताजनक वैरिएंट' घोषित किया गया है और इसे ओमिक्रॉन नाम दिया गया है।

ओमिक्रॉन को चिंताजनक वैरिएंट क्यों माना जा रहा है? -

तकनीकी टर्म बी.1.1.529 से जाना जाने वाला ओमिक्रॉन दर्शाता है कि वैरिएंट में बड़ी संख्या में म्यूटेशन्स हैं, जिनमें से कुछ में चिंताजनक लक्षण हैं। सरल शब्दों में, यह अधिक आसानी से फैल सकता है और ज्यादा गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

ओमिक्रॉन की म्यूटेशन काउंट क्या है? -

ओमिक्रॉन में कुल मिलाकर 50 म्यूटेशन्स हैं, जिसमें अकेले "स्पाइक प्रोटीन" पर 30 से अधिक म्यूटेशन्स शामिल हैं। भारी म्यूटेशन्स वायरस को वैक्सीन के प्रति अधिक प्रतिरोधी बना सकते हैं, फैलने की क्षमता बढ़ा सकते हैं और अधिक गंभीर लक्षण पैदा कर सकते हैं। स्पाइक प्रोटीन : यह वायरस का वह हिस्सा है, जो मानव कोशिकाओं से जुड़ता है, जिससे इसे प्रवेश मिलता है।

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किन देशों में ओमिक्रॉन(कोरोना का नया वैरिएंट) पाया गया? -

जिन देशों में नए कोविड वैरिएंट के मामले दर्ज किए हैं, वे हैं ऑस्ट्रेलिया, इटली, जर्मनी, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इज़राइल, हांगकांग, बोत्सवाना और बेल्जियम हैं।

ओमिक्रॉन कैसे उभरा? -

यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि यह संस्करण कैसे उभरा। म्यूटेशन के असामान्य लक्षणों ने स्ट्रेन के तेजी से फैलने के बारे में आशंकाएं बढ़ा दी हैं। थोड़े ही समय में, यह दक्षिण अफ्रीका में नए संक्रमणों के बीच एक प्रमुख स्ट्रेन बन गया है।

ओमिक्रॉन के खिलाफ टीके का क्या प्रभाव होगा? -

अभी इस नतीजे तक पहुंचने के लिए बहुत कम रिसर्च हुआ है, विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने का आग्रह किया है, लेकिन घबराने का नहीं। तमाम तरह की अटकलें हैं, लेकिन ओमिक्रॉन के खिलाफ टीकों के प्रभाव के बारे में कोई पुष्ट रिपोर्ट नहीं है। म्यूटेशन की अधिक संख्या के कारण ओमिक्रॉन सबसे अधिक चिंताजनक प्रकार है।

इलाज से बेहतर है सावधानी - 

महामारी अब तक खत्म नहीं हुई है और ना ही कोरोना अब तक गया है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सभी महामारी संबंधी सावधानियां और कोविड सुरक्षा उपाय करें। - हर किसी को इस नए कोविड वैरिएंट - ओमिक्रॉन के बारे में जानने की जरूरत है। कृपया इस उपयोगी जानकारी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें। हम इसमें एकसाथ हैं। आप सुरक्षित हैं तो मैं भी सुरक्षित हूं।

ओमिक्रॉन के लक्षण | Symptoms Of Omicron 

  1. ओमिक्रॉन वैरिएंयट से संक्रमित मरीजों में अत्यधिक थकान देखने को मिली है।
  2. मरीजों के ऑक्सीजन के स्तर में कोई गंभीर गिरावट देखने को नहीं मिली है।
  3. मरीजों ने मांसपेशियों में दर्द, गला खराब होने और सूखी खांसी की शिकायत की है।
  4. डॉक्टरों के अनुसार कुछ मरीजों में ही तेज बुखार की समस्या सामने आई है।
  5. ओमिक्रॉन संक्रमित अधिकांश मरीजों को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी है।

कोरोना वायरस हो या ओमिक्रॉन जब तक आप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी और अपने सेहत का ख्याल खुद नही रखेंगे तब तक आप अपने आपको और अपने परिवार वालो को सुरक्षित नहीं रख सकते हैं .आपसे निवेदन हैं की  कृपया ओमिक्रॉन से जुडी यह जानकारी सभी को साझा जरूर करें. 

इन जानकारियों को भी पढ़े - 

ब्रेन सर्जरी के फायदे | Benefits Of Brain Surgery

ब्रेन सर्जरी के क्षेत्र में एक वरदान है एंडोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी चूंकि, ब्रेन सर्जरी (Brain Surgery) काफी संवेदनशील प्रक्रिया होती है, ब्रेन सर्जरी (Brain Surgery) से तात्पर्य ऐसी सर्जरी से है, जिसे मस्तिष्क या उसके आस-पास के अंग जैसे आंख, नाक, इत्यादि से संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए किया जाता  है। मस्तिष्क की सर्जरी को करना काफी मुश्किल भरा काम होता है, इसलिए इसे अनुभवी डॉक्टरों द्वारा ही किया जाता है, ताकि इस दौरान किसी तरह का जोखिम न हो। इसी कारण इसे इन 5 स्थितियों में किया जाता है ब्रेन सर्जरी, जो इस प्रकार हैं –

Benefits Of Brain Surgery

ब्रेन ट्यूमर का इलाज करना -

ब्रेन सर्जरी को मुख्य रूप से ब्रेन ट्यूमर का इलाज करने के लिए किया जाता है क्योंकि यह सर्जरी ब्रेन ट्यूमर का सर्वोत्तम इलाज होती है। 

पार्किसन का उपचार करना -

मस्तिष्क की सर्जरी को उस स्थिति में भी किया जाता है, जब कोई व्यक्ति पार्किसन नामक बीमारी से पीड़ित होता है। यह सर्जरी इस बीमारी के उपचार का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

असामान्य रक्त वाहिकाओं को ठीक करना -

यदि किसी व्यक्ति की रक्त वाहिकाएं (Blood Vessel) असामान्य होती हैं, तो उन्हें सामान्य करने के लिए मस्तिष्क की सर्जरी को किया जाता है। 

ब्लड क्लोट्स को ठीक करना -

कई बार ब्रेन सर्जरी को ब्लड क्लोट्स को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। कई बार किसी सर्जरी के कारण किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में ब्लड क्लोट्स हो जाता है, उस स्थिति में ब्रेन सर्जरी लाभकारी साबित हो सकती है।

ब्रेन स्ट्रोक के खतरेको कम करना –

कई बार मस्तिष्क की सर्जरी को उस स्थिति में किया जाता है, जब किसी व्यक्ति में ब्रेन स्ट्रोक के होने का खतरा रहता है। मस्तिष्क की सर्जरी के माध्यम से ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को कम किया जाता है।

ब्रेन सर्जरी इन पाच कारणों से किया जाता हैं . ब्रेन सर्जरी  की यह जानकारी न होने पर हमे काफी डर लगा रहता हैं ब्रेन सर्जरी से जुडी यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें.  

25 की उम्र के बाद कराये जाने वाले टेस्ट

बढ़ते समय के साथ-साथ हमारे शरीर और स्वास्थ्य की भी उम्र बढ़ती जाती हैं जिसकी वजह से हमारे बॉडी में कई महत्वपूर्ण तत्वों की कमी होने लगती हैं और हमारा शरीर कमजोर होने लगता हैं. तो ऐसे में अपने सेहत को हमेशा अच्छे रखने और अपने शरीर में कमियों  को जान कर उन्हें दूर करने का एक उपाय परीक्षण होता हैं. जिसमें ज़चा के जरियें हम अपने बॉडी को समझ पाते हैं और अपने आप में सुधार ला सकते हैं, आज के इस लेख में हम जानेंगे कुछ ऐसे परीक्षण (Test) के बारे में जो आपको 25 की उम्र के बाद कराने ही चाहिए क्योंकि यह जांच आवश्यक होते हैं.

Necessary Physical Examination

25 की उम्र के बाद कराये जाने वाले टेस्ट – 

  • ECG टेस्ट (ECG Test) 
  • जेनेटिक टेस्ट (Genetic Test) 
  • लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) 
  • लीवर कार्य परीक्षण (Liver Function Test) 
  • पैप स्मीयर (Pap Smear) 
  • कॉलोनोस्कोपी टेस्ट (Colonoscopy Test)
  • सामान्य परीक्षण (Routine Test) 

ECG टेस्ट (ECG Test) - 

हृदय संबंधी जटिलताएं कभी भी आ सकती हैं। ECG (इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम) टेस्ट करवाना सेहत के लिए जरुरी है और फायदेमंद भी है क्योंकि इस आसान सस्ते टेस्ट के द्वारा आप समय से पहले दिल की बीमारियों का पता लगा सकते हैं ताकि बाद में वो खतरनाक रूप न ले लें। अगर आप दिल की बीमारियों का पता ठीक समय से लगा लेते हैं, तो इन्हें आसानी से ठीक किया जा सकता है।

जेनेटिक टेस्ट (Genetic Test) -

आनुवंशिक परीक्षण या जेनेटिक टेस्ट एक प्रकार का चिकित्सा परीक्षण है जो जीन, गुणसूत्र या प्रोटीन में परिवर्तन की पहचान करता है। इस परीक्षण के जरिए रक्त के नमूने का विश्लेषण किया जाता है। जांच के परिणाम से शुरुआती उपचार विकल्पों का चयन करने में मदद मिलती है। यदि आप बच्चा पैदा करने की योजना बना रहे हैं, तो ये टेस्ट मददगार है। इस टेस्ट के माध्यम से होने वाले बच्चे को माता-पिता से कोई जेनेटिक डिसऑर्डर होगा, उसका पता चल जाता है और आप जरूरी सावधानी ले सकते हैं।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) - 

एक पूर्ण लिपिड प्रोफाइल परीक्षण आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर-अच्छे और बुरे के बारे में विस्तार से बता सकता है और आपको यह संकेत दे सकता है कि आपका दिल कितना स्वस्थ है। हर दो साल में एक बार पूर्ण परीक्षण के लिए जाना 30 साल की उम्र के बाद मददगार हो सकता है। स्वस्थ लक्ष्य LDL (कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) <130 और LDL (उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन]> 60 जैसा कुछ होना चाहिए।

इन्हें भी पढ़े - स्वास्थ्य जीवन के 05 मूल मंत्र 

लीवर कार्य परीक्षण (Liver Function Test) - 

लिवर केमिस्ट्री टेस्ट, जो कुछ शारीरिक एंजाइमों, प्रोटीन, ट्राइग्लिसराइड्स के चार्टिंग को मापकर काम करते हैं, यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपका लीवर कितना स्वस्थ है। 30 साल की उम्र में प्रवेश करने के बाद हर दूसरे साल में ये टेस्ट जरूर करवाएं। (पढ़े - लीवर को स्वास्थ्य रखने के लिए क्या खाएं )

पैप स्मीयर (Pap Smear) - 

यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की जांच करने का एक टेस्ट है। सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी संक्रमण की जांच के लिए भी पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सही समय पर पैप स्मीयर जांच करवाने से सर्वाइकल कैंसर का पहले ही पता लगाया जा सकता है। यह गर्भाशय में उन कोशिकाओं को पता लगाती हैं जो कैंसर ग्रस्त हैं या भविष्य में जिनके कैंसर ग्रस्त होने की संभावना है।

कॉलोनोस्कोपी टेस्ट (Colonoscopy Test) - 

पुरुषों के लिए कोलोनोस्कोपी टेस्ट जरूरी है। जबकि इस तरह के परीक्षण आमतौर पर 45-50 वर्ष की आयु के बाद किए जाते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पुरुषों को अपने 30 के दशक में ही परीक्षण करवाना शुरू कर देना चाहिए, खासकर यदि उनके पास कोलन कैंसर का प्रथम-डिग्री रिश्तेदार या पारिवारिक इतिहास है। टेस्ट आंतों की समस्याओं, रक्तस्राव के साथ-साथ कोलन कैंसर के संकेतों की जांच करने में मदद कर सकते हैं।

सामान्य परीक्षण (Routine Test) - 

इन चेक-अप के अलावा, कई अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट हैं, जिन्हें करना चाहिए। इसमें थायराइड फंक्शन टेस्ट और किडनी फंक्शन टेस्ट महत्वपूर्ण हैं। आमतौर पर, डॉक्टरों द्वारा इन परीक्षणों की सिफारिश की जाती है, लेकिन यह सलाह दी जाती है कि अपने प्रमुख सिस्टम/अंगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी जांच करवाएं।

तो दोस्तों यदि आपका उम्र 25 वर्ष या उससे ज्यादा हैं तो कृपया इस जानकारी को जानने के साथ इनमें से जरूरी परिक्षण जरूर करवाएं. आज की यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें. 

इन जानकारियों को भी पढ़े :- 

Winter Health Tips In Hindi

Winter Health Tips In Hindi - ठंड का मौसम आने के साथ साथ ठंड अपने साथ सेहत से जुडी कई बीमारियाँ भी ले कर आता हैं, इससे बचने और इससे लड़ने के लिए हमें चुस्त और तंदरुस्त रहना पड़ता हैं. और जहा बात आती हैं सर्दियों के मौसम में फीट रहने की तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण होती हैं ठंड में हमारा खान पान हमारा डाइट, तो चलिए आज के Winter Health Tips In Hindi लेख में जानते हैं ठंड के मौसम में खान पान के बारे में. 

Winter Health Tips In Hindi

ठंड के मौसम में खाने व हेल्थ से जुडी टिप्स- 

  • सुपर ब्रेकफास्ट
  • दोपहर का खाना (लंच)
  • रात में खाने की बात (डिनर)
  • पाचन प्रक्रिया पर ध्यान
  • पोषण के साथ व्यायाम में ध्यान

01. सुपर ब्रेकफास्ट – 

दोस्तों ब्रेकफास्ट हमारे दिनचर्या का सुरवात तो होता ही हैं साथ ही साथ यह हमारे दिनभर की की शाररिक ऊर्जा को भी कंट्रोल करती हैं. यदि आप अपने ब्रेकफास्ट में सही चीजो का सेवन करते हैं तो आप सर्दियों की मौसम में अपने ब्रेकफास्ट को सुपर ब्रेकफास्ट बना सकते हैं. अब सवाल आता है की किन चीजो का सेवन करे तो आप अंडे के साथ ब्रेड, उपमा, सैंडविच, डोसा, हेवी फ्रूट कस्टर्ड आदि ले सकते हैं. 

02. दोपहर का खाना (लंच) –

सुपर ब्रेकफास्ट लेने के बाद आप अपने बाकी काम जो आप सुबह करते हैं वह कर सकते हैं जैसे कई लोगो की आदत होती हैं सुबह सुबह बुक्स पढ़ना या अपनी किसी Hoby या किसी Activity को फाँलो करना. इसके बाद आप अपने काम पर जा सकते हैं. आपको अपने लंच में भी पौष्टिक आहार लेना होगा जिसमे आप हरी सब्जी, चपाती, ताजा दही या छाछ, छिलके वाली दाल के साथ चावल, आदि चीजो को सामिल कर सकते हैं. 

जाने - प्रमुख मिनरल्स जो सेहत के लिए हैं जरूरी.

03. रात में खाने की बात (डिनर) – 

यह चीज आपने भी अनुभव किया होगा की जैसे ही सर्दियों का मौसम आता हैं, रात का समय दिन की अपेक्षा ज्यादा लंबा हो जाता हैं तो ऐसे में स्वास्थ सलाहकारों का मानना हैं की रात का भोजन (डिनर) थोड़ा जल्दी करे, और कोशिस करें की रात का खाना दिन की तुलना में हल्का खाना खाएं. यह आपकी सेहत को बरकरार रखता हैं.

 

04. पाचन प्रक्रिया पर ध्यान – 

रिसर्च में पाया गया है की, हमारे शरीर की पाचन क्रिया अन्य मौसम की तुलना में काफी ज्यादा प्रभावित होता हैं. इसी लिए सलाह दी जाती हैं की ठंड के मौसम में ख़ास कर रात के खाने और सोने के बिच में कम से कम चार घंटे का नत्राल रखें ताकि भोजन आसानी से पचने में सक्षम हो जाय. 

पढ़े - सर्दियों में सेहत का ख्याल कैसे रखें?

05. पोषण के साथ व्यायाम में ध्यान – 

ठंड के मौसम में योगा, व्यायाम, आसन और एक्सरसाइज़ करने की बात पर भी जोर दिया जाता हैं, क्योकि आपका दिनचर्या और आपका पोषण इन सबके बिना आधुरा हैं. सर्दियों का मौसम एक सुनहरा मौका होता हैं अपने सेहत को सालभर अच्छा रखने और बॉडी को फीट रखने के लिए. 

Winter Health Tips In Hindi में हमने क्या जाना – 

आज के इस Winter Health Tips In Hindi के लेख में हमने जाना की ठंड के मौसम में अपने खाने में किन चीजो को शामिल करना चाहिए और किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए. यदि आपको यह जानकारी अच्छी, उपयोगी व सही लगी हो तो कृपया इस लेख को शेयर जरूर करें. 

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त्यौहार के बाद की उदासी और थकान को दूर कैसे करें? 

त्यौहार हमारे जीवन में एक नई ताजगी और नया उत्साह लाते हैं। ये वो समय होता है जब हमारे पास बहुत सारे काम नए काम करने को होते हैं हमारी पूरी दिनचर्या एकदम बदल जाती है। हम हर रोज नए-नए काम कर रहे होते हैं। हम अपने रिश्तेदारों, दोस्तों से मिल रहे होते हैं और इन सब कामों के कारण हममें एक अलग ऊर्जा होती है और ये सारी चीजें सब में दिखाई पड़ती हैं.

पर एक बार जब ये त्योहार के दिन ये बीत जाते हैं तो हमारे जीवन में एकदम से एक निर्वात (खालीपन) बन जाता है और हम कंफ्यूज हो जाते हैं कि अब हम क्या करें। ऐसा देखा गया है कि कुछ लोगों को इस स्थिति के कारण तनाव महसूस होने लगता है और वो अपने रोजमर्रा के जीवन में एडजस्ट करने में असहज हो जाते हैं।

How to overcome fatigue and sadness

थकान और उदासी को दूर करने के लिए -

  • थकान और उदासी के लक्ष्ण 
  • खान-पान बदलें (Change Diet)
  • कसरत करें (do Workout)
  • एलबम बनाएं (Create Album)
  • योजना बनाएं (Make Plan)

थकान और उदासी के निम्न लक्ष्ण हो सकते हैं जैसे- 

  • किसी भी काम में मन ना लगना 
  • पूरे दिन थकावट महसूस करना अपने रोज के कामों को करने की इच्छा न होना 
  • पुरानी बात करने पर उदास हो जाना - ऐसा लगना कि अच्छा समय तो बीत गया, अब क्या होगा? 
  • रात में ठीक से नींद ना आना और सुबह उठकर अच्छा महसूस ना करना।
  • दिन भर उबासी व आलस से सामना करना 
  • ढंग से बता करने की इच्छा ना होना ! आदि  

खान-पान बदलें (Change Diet)

त्योहारों में हमारी खाने-पीने की आदतों में बदलाव आ जाता है। हम तली हुई और मीठी चीजें ज्यादा खाने लगते हैं। हमारे खाने का टाइम तय नहीं रहता। इसलिए ये बहुत जरूरी है कि हम सबसे पहले अपने खाने-पीने की आदतों में बदलाव लाएं। कही न कही हमारा शरीर और मन उन्ही खान-पान में अटका रहता हैं जो त्योहारों के माहोल में हुआ करता था. 

कसरत करें (do Workout)

किसी भी तरह के तनाव को कम करने के लिए व्यायाम बहुत जरूरी है इसलिए अपनी दिनचर्या में कम से कम 30 मिनट कसरत करने को जरूर शामिल करें, और इसमें बोरियत से बचने के लिए हर दिन अपने व्यायाम से कुछ नया करते रहे। इसके लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह भी ले सकते है। कसरत करने से हमारे बॉडी में कई तरह की हारमोंस भी रिलीस होती हैं जिनमे ख़ुशी का अनुभव कराने वाले हार्मोन्स - 1. एंडोर्फिन (Endorphins) 2. डोपामाइन (Dopamine) 3. सेरोटोनिन (Serotonin) और 4. ऑक्सीटोसिन (Oxytocin). ये चार हार्मोन हमें ख़ुशी का अहसास कराती हैं. (बेहतरीन योगासन देखें - क्लिक करें )

एलबम बनाएं (Create Album)

त्योहार पर मोबाइल से खींची तस्वीरों को प्रिंट करा के एक एलबम बनाएं, और साथ ही साथ एक डायरी बनाएं जिसमें अपने इस त्योहार की यादों को लिखें। इसमें लिखें कि आपने इस बार क्या नया सीखा और आपका इस बार का अनुभव कैसा रहा। ऐसा करने से आपकी यादें केवल यादें ही बन कर नहीं रह जाती बल्कि उन्हें जिवंत रूप मिलता हैं. 

योजना बनाएं (Make Plan)

अपने आने वाले समय की योजना बनाना शुरू करें जिससे आप अपने आप को अच्छा महसूस करा सकें जैसे अपने दोस्तों के साथ घूमने की योजना बनाएं, किसी नई जगह या नए होटल में डिनर करने की सोचें, आने वाले दूसरे पर्व में क्या करना है ये सोचे और सिमित होकर कुछ नया करें। 

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शर्दियो में सेहत का ख्याल | health care tips in winter

शर्दियो में सेहत का ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी हो जाता हैं. हालांकि, दिन में कड़ी धूप रहती है, पर शाम होते सिहरन और ठिठुरन बढ़ जाती है। सर्दियों का यह सुहावना मौसम अपने साथ स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान गले में खराश, सर्दी-जुकाम, सीने में जकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बरत कर जाड़े के मौसम का आनंद लिया जा सकता है।

health care tips in winter

20 मिनट धूप : 

बीमारियों से लड़ने के लिए अधिक मात्रा में बनती है एंटीबॉडी सीडीसी के अनुसार किसी भी बैक्टीरिया अथवा वायरस से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी बनाता है। धूप से शरीर यह एंटीबॉडी अधिक मात्रा में बनाने लगता है। -इसके अलावा धूपं सूजन और हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करती है। मस्तिष्क के कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। 

30 प्रतिशत प्रोटीन : 

सर्दियों में भूख को कम करता है, वजन बढ़ने से रोकता है शरीर में सूरज की रोशनी पड़ने पर सेरोटोनिन हार्मोन रिलीज होता है जो मूड बेहतर करता है। यही हार्मोन कार्बोहाइड्रेट भी रिलीज करता है। चूंकि सर्दियों में धूप कम होती है ऐसे में इसकी वजह से भूख का अहसास ज्यादा होता है। प्रोटीन भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घेलिन को कम करता है। भोजन में ली जाने वाली कैलोरी में यदि 30 से 35 फीसदी प्रोटीन से आए तो भूख कम लगती है। इससे वजन बढ़ने की आशंका कम होती है।(जाने - कौन से पोषक तत्व सेहत के लिए जरूरी होते हैं)

40 मिनट एक्सरसाइज : 

बीपी और स्ट्रोक का खतरा 27% तक कम सर्दियों में प्रतिदिन 40 मिनट एक्सरसाइज हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक के खतरे को 27% तक कम करती है। वहीं इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री, साइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस के अनुसार प्रतिदिन 30 से 40 मिनट एक्सरसाइज करने वाले लोगों में डिप्रेशन का खतरा 28% तक कम रहता है।

सर्दियों में शरीर के लिए 3 खतरे बढ़ जाते हैं. 

1) ब्लड प्रेशर में अनियमितता-

मेयो क्लीनिक के अनुसार सर्दियों में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त को इन सिकुड़ी हुई वाहिकाओं से गुजरने में अधिक बल लगाना पड़ता है। इसी अतिरिक्त बल के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। (जाने - ब्लड प्रेशर के कारण व लक्षण)

2) स्ट्रोक की ज्यादा आशंका-

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार अत्यधिक ठंड के दौरान रक्त गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है, जिससे इसका थक्का आसानी से बनने लगता है। अधिकांश स्ट्रोक रक्त का थक्का बनने के कारण ही होते हैं। यह थक्का । मस्तिष्क की रक्त वाहिका के मार्ग को भी बाधित करता है।

3) हार्ट अटैक की स्थिति 

न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई स्थित आईकन स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसार सर्दियों में ठंड और फ्लू से बचाव के लिए इम्यून सिस्टम के रक्त का स्तर कई गुना बढ़ता है। इससे धमनियों की है दीवारों पर प्लैक जमा होता है। इससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ती है।(इसे भी जाने – हार्ट की बिमारी कैसे बढती हैं)

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थकान दूर करने के लिए आसन एक्सरसाइज

थकान एक प्रकार की शाररिक प्रक्रिया में से एक हैं जिसके चलते हमारे शरीर में तनाव और आलस्य  भर जाता हैं. थकान दूर करने के तारिके वैसे तो कई हैं जिनमे से एक तरीका हैं सो जाना लेकिन सवाल यह हैं की, क्या बस सो जाने से हमारी थकान दूर हो जाती हैं? 

इसके जवाब में कई विशेषज्ञों का मनना हैं की यह सही नही हैं. आप थोडा रेस्ट जरूर कर सकते हैं और इसके साथ आप थोड़ी स्ट्रेचिंग थकान दूर करने के लिए आसन एक्सरसाइज कर सकते हैं. तो इस लेख में हम इसी की जानकारी आपको देने जा रहें हैं, आप इन एक्सरसाइज को चित्र के अनुशार देख कर भी कर सकते हैं - 

थकान दूर करने के लिए आसन एक्सरसाइज

  • पैरों की स्ट्रेचिंग करें (Stretching of Legs)
  • कंधों की अकड़न दूर करें (Relieve Shoulder Stiffness)
  • कंधों के लिए स्ट्रेचिंग (Stretching For Shoulders)
  • ट्रायसेप स्ट्रेचिंग करें (Do Tricep Stretching)
  • बैठक वाली साइड स्ट्रेच (Side Stretch)

पैरों की स्ट्रेचिंग करें (Stretching of Legs)

सीधे खड़े हो जाएं। एक पैर को मोड़ते हुए चित्रानुसार संतुलन बनाएं। पंजों की नोक सीधी रहे और पैर मोड़ते हुए दबाव महसूस करें। 15 सेकंड रुकें, फिर पैर नीचे रखें और दूसरे पैर से इसे दोहराएं।

Thkan Dur Karne Ke Upay

सावधानी - इस स्ट्रेचिंग को करते समय ध्यान रखें कि पीठ सीधी रहे। जरूरी लगे तो, दीवार का सहारा ले सकते हैं।

कंधों की अकड़न दूर करें (Relieve Shoulder Stiffness)

सीधे खड़े हो जाएं। अपने हाथों को पीठ के पीछे चित्रानुसार बांधे। . हाथों को छत की ओर उठाने की कोशिश करें, उतना ही जितना कर सकें। 015 सेकंड रुकें। फिर 3-4 बार इस व्यायाम को करें।

Thkan Dur Karne Ke Upay

सावधानी - जब आप हाथों को छत की ओर उठाएं, तो सांस छोड़ते हुए ऐसा करें। इसी समय कंधों को पीछे की ओर खींचें। 

कंधों के लिए स्ट्रेचिंग (Stretching For Shoulders)

पैरों को कंधों जितना दूर रखकर खड़े हों और एक हाथ चित्रानुसार उठाएं। • दूसरे हाथ से कोहनी के पास से पकड़ें और लम्बा किए हाथ को धीरे से अपनी ओर खींचे। . दोनों हाथों से बारी-बारी करें।

Thkan Dur Karne Ke Upay

सावधानी - पीठ को सीधा रखें। हाथ को कंधों के समानांतर उठाना है, यह याद रखें।

ट्रायसेप स्ट्रेचिंग करें (Do Tricep Stretching)

एक हाथ को कंधे के पीछे से ऐसे लाएं कि सिर के ऊपर रहे। .दूसरे हाथ को मोड़कर पीठ के पीछे रखें और सिर पर आए हाथ से मुड़े हाथ को दवाएं। 15 सेकंड रुकें फिर दूसरी तरफ दोहराएं।

Thkan Dur Karne Ke Upay


सावधानी - कंधों को रिलैक्स करके रखिए। जो हाथ पीठ की ओर मुड़ा है, उसकी उंगलियों से रीढ़ की हड्डी छूने की कोशिश करें।

बैठक वाली साइड स्ट्रेच (Side Stretch)

चित्रानुसार किसी बेंच पर बैठ जाएं और हाथों को उतको ओर व हथेलियों को छत को ओर रखते हुए उठाएं। हाथों को खींचते हुए एक तरफ हल्का-सा झुकें। 015 सेकंड बाद यही व्यायाम दूसरी तरफ झुकते हुए करें।

Thkan Dur Karne Ke Upay


सावधानी - ठीक से बैठक बनाए खें। कंधों को नहीं उठाना है, इसका ख्याल रखें। हाथों को बिल्कुल सीधा रखना है। 

आप इस शरीर में कमजोरी और थकान दूर करने के उपाय | Thkan Dur Karne Ke Upay को जानने के बाद इस पर अमल जरूर करें और इसका लाभ ले. इसके साथ ही आप शरीर में कमजोरी और थकान दूर करने के इन तरीको को अपने खास लोगो के साथ साझा जरूर करें – “खुश रहें स्वस्थ रहें ” 

इन जानकारियों को भी पढ़े- 

स्वस्थ जीवन के 05 मंत्र 

स्वस्थ जीवन की चाह आज के समय में हर किसी को रहती हैं. पर क्या सभी स्वस्थ हैं? नहीं ! क्योंकि एक स्वस्थ जीवन और स्वस्थ शरीर पाने के लिए भोजन में नियंत्रण और अपने दिनचर्या में अनुशासन की आवश्यकता होती हैं.

health tips for daily routine in hindi

Table of Content - 

  • सेहतमंद सुबह (Healthy Morning) 
  • नियमित समय पर भोजन (Regular Meals) 
  • तरल पदार्थो का सेवन (Fluid Intake) 
  • ज्यादा नमकीन व मिर्च-मसाले से बचे 
  • नशे से हमेशा बचे

HEALTH TIPS FOR DAILY ROUTINE IN HINDI

आज के इस जानकारी में हम जानेंगे ऐसी 05 बातों या स्वस्थ जीवन के उपाय के बारे में जिसे अपना कर आप अपना जीवन स्वस्थ जीवन बना सकते हैं और साथ ही साथ “सुखी जीवन- निरोगी काया” जैसे वाक्यों को अपने जीवन में लागू कर सकते हैं.

01. सेहतमंद सुबह (Healthy Morning)-

माना जाता हैं की जितना अच्छा आपका सुबह होगा उतना ही बेहतर आपका पूरा दिन होगा, तो कोशिश करें की आप अपने सुबह को जितना बेहतर बना सके. आप अपने सुबह को बेहतर बनाने के लिए कुछ आदतों को जरूर अपनाए जैसे- सुबह सूर्योदय से पूर्व उठ जाना, उठ कर कम से कम एक गिलास पानी पीना, फ्रेश हो कर योगा या व्यायाम करें, कोशिश करें की सुबह नाश्ता  जरूर करें और खाना नहाने के बाद ही खाए.(जाने - पानी पिने की चमत्कारी फायदों को )

02. नियमित समय पर भोजन (Regular Meals)-

नियमित समय पर भोजन आपके सेहत को बनाये रखने में मदद करता हैं. इतना ही नहीं आपका समय पर भोजन कर लेना आपके शरीर को सतत ऊर्जा देता हैं जिससे की आप अपने कामो को बेहतर तरीके से कर पाते हैं.

समय समय पर जब हमें भोजन की आदत होती हैं तो हमारा शरीर भी इस प्रक्रिया को अच्छे से समझ जाता हैं और इसे स्वीकार करता हैं. (जाने - भूख न लगने की वजह )

03. तरल पदार्थो का सेवन (Fluid Intake)-

अपने रोजाना के खाने में तरल पदार्थो को सामिल जरूर करें. तरल पदार्थो में पानी जिसका उपयोग ज्यादा करें, तरल पदार्थो में खनिज लावन व पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पायी जाती हैं इसी लिए आप अपने खाने में जूस जैसी चीजें (जिसका भी जूस आपको पसंद हो) जरूर लीजिये. इतना ही नहीं आप ताज़गी और थकान मिटाने के लिए ग्रीन टी या टी का सेवन कभी कभी कर सकते हैं.

04. ज्यादा नमकीन व मिर्च-मसाले से बचे (Avoid Excessive Salty And Chili-Spicy) –

ज्यादा नमकीन व मिर्च-मसाले से बचने का सुझाव देने के पीछे कई तरह के वजह हो सकते हैं जैसे – पेट से जुड़ी समस्यायों से दूरी, बहुत अधिक मसालेदार भोजन खाने से भूख खत्म हो जाती हैं, बुखार हो सकता हैं, मसूड़ों में सूजन और नाक से खून भी निकल सकता हैं. - ज्यादा तीखा भोजन हमारे टेस्ट बड़ को नुकसान पहुंचाते हैं और इससे सांस की बदबू की समस्या भी हो सकती हैं.

05. नशे से हमेशा बचे (Always Stay Away From Drugs)-

एक किसान अपने फसलों को बड़ा करने के लिए कितने ही खाद डाल ले, फसल की कितनी भी देख-भाल कर ले यदि उन फसलों में एक बार कीड़े लग गए तो उस फसल को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता. ठीक हमारा शरीर भी उस फसल के जैसे ही हैं जिसे यदि एक बार नशे का कीड़ा लग जाय तो वह हमारे जीवन को बर्बाद कर देता हैं. इसलिए कोशिश करें की नशे वाली चीजों से हमेशा दूर रहें.

तो दोस्तों इस जानकारी में केवल स्वस्थ रहने के 05 मंत्र को हमने जाना, यदि आप इन 05 बातों का ध्यान रख इसका पालन अनुशासन से करते हैं तो आपका तन और मन दोनों हमेशा निरोग और स्वस्थ रहेगा.

इन हेल्थ टिप्स को भी पढ़े:-


स्टूडेंट्स के लिए हेल्थ टिप्स 

दोस्तों आज के इस लेख में स्टूडेंट्स के लिए हेल्थ टिप्स (Health Tips For Studentsके बारे में बताएँगे – स्टूडेंट लाइफ हर किसी के जीवन में आता ही हैं, अभी आप स्टूडेंट हो या फिर आप कभी स्टूडेंट थे तो आपको भी पता होगा की स्टूडेंट लाइफ में हमें किन कीन चीजो से हो कर गुजरना पड़ता हैं. और ऐसे में हम व्यस्तता को वजह से अपनि सेहत पर उतना ध्यान नहीं दे पाते जितना हमें देना चाहिए.आप यहाँ बताये हेल्थ टिप्स को जान कर अपने स्टूडेंट लाइफ को हेल्दी बना सकते हैं.


स्टूडेंट्स के लिए हेल्थ टिप्स  | Health Tips For Students


Table Of Content -

  • सुबह का ब्रेकफास्ट
  • खाने में मसालों का उपयोग
  • पानी पीने की आदत
  • खाने में सब्जियों को शामिल करें
  • खाए आराम से
  • खाने का समय नियमित रखें
  • रात को पूरी नींद लेना

01. सुबह का ब्रेकफास्ट -

स्टूडेंट्स के लिए हेल्थ टिप्स में सबसे पहला हैं ब्रेकफास्ट यानी हमारा सुबह का नाश्ता होता हैं, जो हमें दिन भर प्रोडीक्टिव और एक्टिव रहने में काफी मदद करता हैं. चुकी यह हमारे दिन का पहला मील होता हैं, तो कोशिश करें की आप अपने सुबह के नास्ते को ना भूले और हा याद रखे की नाश्ते में ताजा और अच्छी चीजो का ही सेवन करें.

02. खाने में मसालों का उपयोग – 

अब मशाले वाली चीजें तो सबको पसंद होती हैं लेकिन यदि आप एक स्टूडेंट हैं और फीट रहना चाहते हैं, आप चाहते है की आपकी फीटनेश बनी रहें तो ज्यादा मसालेदार और मसालों से बनी चीजो से दूर रहें, यदि सेवन करना भी हैं तो ना की मात्रा में करें.

03. पानी पीने की आदत – 

यह जानकारी तो आपको होगी ही की, हमारे शरीर में यदि किसी पदार्थ की मात्रा ज्यादा हैं तो वह हैं पानी. पानी ना पीने से या पानी की कमी होने की वजह से हमें डीहाइड्रेसन जैसी समस्यायों से भी जुझन पड़ सकता हैं. तो कोशिश करें की पानी समय समय पर जरूरत के अनुसार पीते रहें और शरीर में पानी की मात्रा कम ना होने दे.(जाने - जाल के चमत्कारी फायदों को )

04. खाने में सब्जियों को शामिल करें – 

खाने के दौरान लाल, हरे संतरी रंग की चीज जरूर लें। इस तीन नंबर के नियम को जरूर मानें और खाने में इन रंगों की खाने की चीजें जैसे गाजर, संतरा और हरी सब्जियों को शामिल करें। इन सब्जियों में आपको भरपूर मात्रा में खनिज पदार्थ मिल जायेंगे. 

05. खाए आराम से – 

अब इसका क्या मतलब हुआ की “ आराम से खाए ”. दोस्तों वैज्ञानिक शोधो में पाया गया हैं की जब हम खाने को धीरे-धीरे और चबा चबा कर खाते हैं तो उसमे हमारे लार का समावेस हो जात हैं और इसके साथ खानों के बहुत छोटे टुकड़े हो जाता हैं जो बड़ी ही आसानी से पाच जाता हैं. 

06. खाने का समय नियमित रखें – 

स्टूडेंट्स में अनुशासन का होना बेहद जरूरी हैं. दोस्तों किसी भी काम को अनुशासित तरीके से किया जाय तो उसका फायदा हमें जरूर मिलता हैं. इसी लिए कोशिश करें की आप पाने खानो का एक वक्त निर्धारण करे और उसी वक्त खाना खाए इससे आप में अनुशासन तो आएगा हि साथ ही साथ सेहत में भी आपको सुधार देखने को मिलेगा.(खाने से जुडी इन रोचक बातों को जाने )

07. रात को पूरी नींद लेना – 

दोस्तों नींद हमारे जीवन के अहम् हिस्से में से एक हैं, चाहे बात आपके काम की हो या फिर अगले दिन होने वाले एग्जाम की आपने चाहे कितनी भी तैयारी की हो, कितने भी जग कर तैयारी किये हो यदि परीक्षा में आपकी दिमाग और आपका शरीर ही साथ ना दे तो तैयारी किस काम की, तो कोशिश करें की अपनी नींद पूरी जरूर करें.

तो दोस्तों इस आर्टिकल में हमने स्टूडेंट्स लाइफ के लिए कुल 07 हेल्थ टिप्स को जाना, मई उम्मीद करता हु की यदि आपने इस लेख को अंत तक पढ़ा हैं तो यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो- इसे सभी स्टूडेंट्स के साथ शेयर जरूर करें.

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दांतों को अच्छा रखने के लिए क्या खाए  (what to eat for good teeth)

यदि आप भी दाँतों या मसूडो से जुडी समस्या से कभी गुजरे हो या गुजर रहे हैं तो आपने जरूर सोचा होगा की दांतों को स्वस्थ रखने के लिए क्या-क्या करना चाहिए या फिर मसूडो के रोगो के उपचार क्या हैं ? तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे दातो को मजबूत रखने के लिए क्या खाए. कई बार हम अपनी दाँतों की सुरक्षा को नजरंदाज करते हैं और इसका नतीजा अच्छा नहीं होता. आज इस dato ko majboot karne ke upay में हम जानेंगे अपने दांतों को मजबूत बनाने के लिए क्या खाए.

दांतों को मजबूत करने के लिए खाए इन चीजो को | what to eat for good teeth

दांतों को मजबूत करने के लिए खाए इन चीजो को-

  • सैल्मन (Selman)
  • गाजर (Carrot)
  • पनीर (Desi Cheese)
  • दही (Curd)
  • च्यूइंग गम (Chewing Gum)
  • तिल के बीज (Sesame Seeds)
  • प्याज (Onion)
  • अजवाइन (Celery)
  • स्ट्रॉबेरी (Strawberry)

आप अपनी दाँतों को मजबूत बनाने के लिए निचे बताए गए खाद्य पदार्थो का सेवन कर सकते है-

सैल्मन (Selman):-

दोस्तों अच्छे मौखिक स्वास्थ्य के लिए विटामिन डी जरूरी है। यह शरीर को कैल्शियम को बेहतर ढंग से अवशोषित करने में मददगार है। सैल्मन, विटामिन डी और कैल्शियम दोनों से भरपूर होता है। ये दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक है. आप दांतों को मजबूत करने के लिए  सैल्मन (Selman) का सेवन कर सकते हैं। 

गाजर (Carrot):-

हमारे दाँतों का महत्वपूर्ण हिस्सा कैविटी होती हैं. गाजर को कैविटी से लड़ने में लाभदायक माना जाता है। कच्ची गाजर को कुतरने या चबाने से प्राकृतिक टूथब्रश का काम होता है। चबाने की क्रिया आपके मसूड़ों की मालिश करती है। साथ ही गाजर केराटिन और विटामिन से भरपूर होती है, जो नाजुक दांत को मजबूत करने के लिए अहम है। (इसे भी पढ़े - सलाद खाने के अद्भुद फायदे )

पनीर (Desi Cheese):-

पनीर दांतों के लिए अच्छा होता है। इसमें उच्च स्तर का फॉस्फेट और कैल्शियम होता है, जो दांतों और हड्डियों को मजबूत करता है। यह मुंह में पीएच स्तर को संतुलित करने में भी मदद करता है।

दही (Curd):-

बिना मीठे के प्राकृतिक दही एक बेहतरीन स्वस्थ नाश्ता या स्नेक्स है। दांतों के लाभ के लिए, दही में कैसिइन और कैल्शियम दोनों होते हैं, जो इनेमल को मजबूत करते हैं और क्षतिग्रस्त होने पर इसे ठीक करने में मदद करते हैं।

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च्यूइंग गम (Chewing Gum)

च्युइंग गम दांतों के लिए अच्छा है। बशर्ते यह शुगर फ्री हो। इसे चबाने से लार का उत्पादन तेज होता है, जो बदले में हानिकारक एसिड को अधिक प्रभावी ढंग से दूर करने में मदद करता है। यह सांसों की गंध को भी दूर करने में सहायक है।(यह भी जाने - आधे सिरदर्द के घरेलु उपाय )

तिल के बीज (Sesame Seeds):-

तिल को अकेले खाने या रोटी में पकाकर खाने से आपको दो तरह से मदद मिलेगी। जब आप इन्हें चबाते हैं, तो ये दांतों से पट्टिका को साफ करने में मदद करते हैं। इनमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। बस यह सुनिश्चित करें कि दांतों के बीच फंसे बीज को जल्द से जल्द हटा दिया जाए।

प्याज (Onion):-

कच्चा प्याज आपके दातों के लिए फायदेमंद है। इसमें एंटीबेक्टेरियल सल्फर कंपाउंड दांतों पर जमे हानिकारक बैक्टीरिया को मार देते हैं। इसे खाने के बाद आप गंध को दूर करने के लिए च्यूइंग गम चबा सकते हैं।

अजवाइन (Celery):-

अजवाइन आपके दांतों को एक बेहतरीन कसरत देती है। जब आप अजवाइन चबाते हैं, तो यह आपके दांतों को साफ करने में मदद करती है। इस प्रक्रिया में मसूड़ों की मालिश भी होती है। इसे चबाने से बैक्टीरिया को बेअसर करने के लिए अधिक लार का उत्पादन होता है।

स्ट्रॉबेरी (Strawberry):-

स्ट्रॉबेरी में मैलिक एसिड होता है, जो इनेमल के लिए एक अच्छा प्राकृतिक व्हाइटनर है। स्ट्रॉबेरी खाने से दांतों को दागमुक्त रखने में मदद मिलेगी। बस इस बात का ध्यान रखें कि स्ट्रॉबेरी के बीज दांतों के बीच न फंसें। इन्हें खाने के बाद फ्लॉस कर सकते हैं।

दोस्तों इस दांतों को अच्छा रखने के लिए क्या खाए  (what to eat for good teeth) लेख में बताई गयी बातो और खाध्य पदार्थो को खाने से आप अपने दाँतों को मजबूत बना सकते हैं. यदि यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें.