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SUMMER HEALTH TIPS HINDI

Summer Health Tips Hindi- दोस्तों हम सब जानते हैं की गर्मियों के मौसम में हमारे शरीर की हालात क्या होती हैं। वैसे देखा जाए तो मानाव शरीर सभी मौसम के अनुरूप अनुकूल होने की क्षमता होती हैं, पर कई बार कई मौसम के सामने हमार शरीर टिक नहीं पाता. ठीक वैसा ही हाल कुछ गर्मी का हैं।

 

आज के इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे खास टिप्स के बारे में जानने वाले हैं, जिससे हम अपने बॉडी को भीषण गर्मी से बचा सके। Summer Health Tips Hindi

Summer Health Tips Hindi

Summer Health Tips Hindi table of content

  • पानी का नियमित सेवन (Regular Water Intake)
  • अपने अंगों की सुरक्षा(Protect Your Organs)
  • भोजन का रखें ध्यान (Take Care of Food)
  • नरम व सूती के कपड़े पहने (Wear Soft and Cotton Clothes)
  • तरल पदार्थों का उपयोग(Use Of Liquids)
  • AC या कूलर से निकलते ही सीधे धूप के संपर्क में ना जाए
  • गर्मी में व्यायाम और आराम (Summer Exercise And Rest)
  • लू व हीट वेव से रहें सावधान (Beware of Heat Wave and Heat Wave)

1. पानी का नियमित सेवन (Regular Water Intake)-

दोस्तों जैसे ही गर्मियों का मौसम आता हैं वैसे ही हमारे शरीर में पानी की मात्रा अपने आप कम होने लगती हैं। और इसकी सबसे बड़ी वजह हमारे बॉडी का बढ़ता हुआ तापमान, ऐसे स्थिति में पानी की कमी से हमारे शरीर में न जाने ऐसे कई सरे दिक्कते आने लगती हैं, जो कही न कही हमारे शरीर को नुकसान पहुचाता हैं। ऐसी स्थिति में हमें गर्मियों में पानी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

2. अपने अंगो की सुरक्षा(Protect Your Organs)-

आपने यह बात नोटिस की ही होगी की, जब भी हम भरी गर्मी में कही बाहर जाते हैं तब त्वचा में जलन महसूस होता है. यह सब तेज धुप की वजह से होता हैं, जिससे हमें बचना जरूरी होता हैं सूर्य की किरने धुप के साथ-साथ कई सारे घाताक किरणों को भी ले कर आता हैं। और यह घातक किरणें हमारे कोशिकाओं को नष्ट करती हैं।Summer Health Tips में यह प्रमुख हैं।

3. भोजन का रखें ध्यान (Take Care of Food)-

गर्मियों के दिनों में कही न कही बाकी मौसमो की तुलना में हमारे शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती हैं। हमारी बॉडी का तापमान बढ़ने की वजह से हमारे शरीर में ऊर्जा की अल्पता होती जाती हैं और हमारा शरीर कमजोर पड़ता जाता हैं और ऐसे हमारे सेहत के खराब होने की नौबत ज्यादा बनी रहती हैं। ऐसे में कोशिश करें की जब भी घर से बाहर निकले तो कुछ खा कर ही निकले ताकि बॉडी में ऊर्जा की मात्रा बनी रहें। खाने में कोशिश करें की तली भुनी चीजें ना ले बल्कि उसकी जगह कुछ फल या हल्दी चीजों को शामिल करें

4. नरम व सूती के कपड़े पहने (Wear Soft and Cotton Clothes)-

दोस्तों जैसा की आप सब जानते हैं हम अपने पहनावे को जरूरत के हिसाब से बदलते रहते हैं। जैसे- कही घुमने गए तो घुमने वाले कपड़े, खेलने गए तो स्पोर्ट्स के कपड़े पहनते हैं। ठीक इसी तरह से गर्मियों के दिनों में कुछ खास तरह के कपडे पहने जैसे की सूती के कपड़े, हलके कपड़े, ऐसे कपड़ें जिससे हवा पास हो सके। और गर्मी के वजह से आने वाले पसीने से आपको राहात मिल सके।

5. तरल पदार्थों का उपयोग(Use Of Liquids)-

आपने देखा होगा की जैसे ही गर्मियों का सीजन आता हैं तरल पदार्थो की मांग बढ़ जाती है। इसका मतलब यह हैं की लोग गर्मियों के दिनों में कई ऐसे तरल पदार्थो का सेवन करते हैं जिससे उन्हें ऊर्जा मिल सके। आप भी गर्मियों के दिनो में अपने पसंद के अनुसार तरल पदार्थ जैसे की - नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, जूस का सेवन कर सकते हैं। अब गर्मी के दिनों में ठंठे तरल पदार्थो को कई लोग धुप से आते ही थके हुए हाल में पिने लगते हैं, जो की गलत तरिका हैं आप किसी भी तरल पदार्थो का सेवन करें तो आराम से करें।

6. AC या कूलर से निकलते ही सीधे धूप के संपर्क में ना जाएं-

कई बार होता हैं की जैसे हम अपने घर या ऑफ़िस में बैठे हैं और आपको अचानक बाहर जाना हो गया तो ऐसे में सीधे धूप के संपर्क में न जा कर थोडा कम धूप में पहले जाए फिर आगे बढे।

AC या कूलर में रहने से हमारी त्वचा काफी सेंसेटिव हो जाती हैं और जैसे ही हम बाहर धूप के संपर्क में आते हैं तो हमारी त्वचा धूप में शामिल हानिकारक किरणों से नहीं लड़ पाती और वह जलने लगती हैं, जिससे हमें जलन महसूस होती हैं।

7. गर्मी में व्यायाम और आराम (Summer Exercise And Rest)-

दोस्तों जीवन में जितना आराम जरूरी हैं उतना व्यायाम भी जरूरी हैं, गर्मी के दिनों में कोशिश करें की समय निकल कर व्यायाम करें। और रही बात आराम की तो यदि आपके पास समय बचता हैं दोपहर में पावर नैप जरूर ले ‘ पावर नैप’ का अर्थ थोड़े समय की नींद होती हैं जिसमें आप अपने शरीर के साथ-साथ अपने दिमाग को भी आराम देते हैं ताकि वह अच्छे से और तेजी से काम कर जाएं।

8. लू व हीट वेव से रहें सावधान (Beware of Heat Wave and Heat Wave)-

जैसे ही मई-जून की गर्मिया स्टार्ट होती हैं तब कड़ाके की धूप और गर्मी जीना दुर्भर कर देतीं हैं और इस्क्जे साथ ही साथ आता हैं लू और हीट वेव जो एक आम व्यक्ति के शरीर को झकझोर कर रख देता हैं। जब भी आप गर्मियों के मौसम में घर से बाहर निकले तो कुछ जरूरी तैयारी के साथ ही निकले जैसे की- साथ में एक पानी की बोतल रखना, हाथ व पैरो को पूरी तरह ढकना, चेहरे व सर की सुरक्षा के लिए स्कार्फ व टोपी का इस्तिमाल करना.

दोस्तों आज के इस आर्टिकल Summer Health Tips Hindi में हमने जाना की कैसे हम अपने और अपने शरीर की सुरक्षा कर सकते हैं। इस लेख में Summer Health Tips Hindi में बताई गयी बातें यदि आपको उपयोगी लगी हो तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों तक शेयर जरूर करे। 

Food fact in Hindi

दोस्तो हमारे आहार और हमारे हेल्थ का रिश्ता कितना गहरा हैं, यह तो मुझे बताने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि हमारे रोजाना के खान पान का सीधा आसार हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता ही हैं. 

आज के इस पोस्ट में हम खाने और हमारे हेल्थ से जुड़े कुछ ऐसी जानकारियां को जानेंगे जो शायद ही आप जानते होंगे. 

Food fact in Hindi

Food fact in Hindi Table Of Content- 

  • रसम (Rasam)
  • नींबू के फायदे (Benefits of Lemon)
  • इमली एक गुणकारी फल (Tamarind Is a Beneficial Fruit)
  • हाथ से खाना रहता हैं कारगर (Eating By Hand Remains Effective)
  • जो सामान्य भोजन हम करते हैं (The Normal Food We Eat)

रसम (Rasam)

रसम मूल रूप से, हम इमली के रस और कई अन्य मसालों का उपयोग करके रसम तैयार करते हैं। टमाटर का रसम बहुत प्रसिद्ध है। अन्य लोकप्रिय रसम हैं काली मिर्च जीरा रसम, लहसुन रसम, दाल रसम और भी बहुत कुछ। स्वास्थ्य सुविधाएं रसम कब्ज को रोकता है, वजन घटाने में कारगर, खनिजों से भरपूर होता हैं।

नींबू के फायदे (Benefits Of Lemon)

नींबू मुंहासों के लिए एक प्रभावी उपचार है। अपने दैनिक आहार में नींबू को शामिल करने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य सुविधाएं पाचन में मदद करता है आपके लिवर और त्वचा को साफ करता है, सांसों को तरोताजा करता है, कैंसर के खिलाफ प्रभावी भी हैं।

इमली एक गुणकारी फल (Tamarind Is A Beneficial Fruit)

इमली के बीज खाने से प्रजनन क्षमता बढ़ती है? इमली में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करती है। इमली और इसके बीज मैग्नीशियम और विटामिन बी6 जैसे खनिजों से भरपूर होते हैं जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे होते हैं।

हाथ से खाना रहता हैं कारगर (Eating By Hand Remains Effective)

हाथ से खाना भारतीय परंपरा और आयुर्वेद के अनुसार, जब हम अपने हाथों से अपने भोजन को छूते हैं तो मस्तिष्क तापमान को भांप लेता है और आवश्यक मात्रा में एंजाइम और पाचक रस पैदा करता है। Health benefits : र रक्त संचार बढ़ाता है। के हमारे पाचन तंत्र की रक्षा करता है।

जो सामान्य भोजन हम करते हैं (The Normal Food We Eat)

  • जो सामान्य भोजन हम करते हैं उसके बारे में तथ्य आलू और टमाटर आलू और टमाटर के पत्ते, तना या अंकुरित अनाज न खाएं। 
  • इसमें ग्लाइकोकलॉइड नामक जहरीला पदार्थ होता है। 
  • सेब- सेब के बीजों में एमिण्डालिन होता है। यह हमारे पाचन एंजाइमों को नुकसान पहुंचा सकता है। 
  • कच्चा शहद- गैर-पाश्चुरीकृत शहद में ग्रेनोटॉक्सिन होता है जो उल्टी, चक्कर आना और कमजोरी का कारण बन सकता है।
  • चिकन टिक्का मसाला इस विश्व प्रसिद्ध भारतीय व्यंजन का आविष्कार सबसे पहले स्कॉटलैंड में हुआ था होता है। नान कहा जाता है कि नान को मुगलों द्वारा भारत लाया गया था और इसकी जड़ें फारसी हैं।

खाद्य पदार्थ जो अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में नहीं खा सकते (Foods That Astronauts Can't Eat In Space)

नमक और चीनी रोटी सोडा शराब अंतरिक्ष में फल, सब्जियां, स्पेगेटी, कैंडीज, नट्स, पीनट बटर, दही आदि खाए जाते हैं।

उम्मीद हैं की अज के इस आर्टिकल में दी गयी यह जानकारी आपको रोचक और उपयोगी लगी हो, आपसे निवेदन हैं की कृपया इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें. 


रहस्यमई बीमारियाँ (Mysterious Diseases)

दोस्तों आज के समय में बिमारी के बारे में कौन नहीं जानता. आज-कल हम सब कई तरह के बीमारियों को तो अपने आस-पास के माहोल में ही देख लेते हैं. लेकिन यह तो हो गयी आम बीमारियाँ इसके अलावा और भी कई ऐसी बीमारियाँ होती हैं जो आम बीमारी नहीं होती हैं, और यह बीमारियाँ  थोड़ी रहस्यमई बिमारी होती हैं. 

Mysterious Diseases

TABLE OF CONTENT-

  • मोर्गेलन्स (Morgellons)
  • प्रोजेरिया (progeria)
  • एक्वाजेनिक पित्ती (aquagenic hives)
  • विदेशी एक्सेंट सिंड्रोम(foreign accent syndrome)
  • लाफिंग डेथ (laughing death)
  • एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम (Alice in Wonderland Syndrome)
  • पिका (pica)

मोर्गेलन्स(Morgellons)

Mysterious Diseases में सबसे पहले नंबर में हैं मोर्गेलंस. रोग (एमडी) एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें धीमी गति से ठीक स्किन के अंदर से फाइबर निकलते हैं। एमडी वाले लोग अक्सर अपनी त्वचा पर चुभने, रेंगने या जलन महसूस करने की रिपोर्ट करते हैं। ये लक्षण दर्दनाक और लंबे समय तक चलने वाले हो सकते हैं, जो जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। हर साल इसके 19,000 मामले सामने आते हैं।

प्रोजेरिया(progeria)

प्रोजेरिया जन्मजात है, जिसका अर्थ है भ्रूण को दोष या क्षति। इस घातक बीमारी से पीड़ित लोगों की उपस्थिति समय से पहले बुढ़ापा जैसी दिखती है, लेकिन औसतन 13 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो जाती है। 9 से 24 महीनों के बीच गहरी वृद्धि में देरी शुरू हो जाती है, जिससे चेहरे का असामान्य विकास होता है। 90% मरीजों की मौत हार्ट अटैक या स्ट्रोक से होती है।

पढ़े बेहतरीन हेल्थ टिप्स - क्लिक करें 

एक्वाजेनिक पित्ती(aquagenic hives)

इस बीमारी ने केवल 30 लोगों को ही प्रभावित किया है। पानी से एलर्जी या "एक्वाजेनिक पित्ती" अत्यंत दुर्लभ है, लेकिन इसके अस्तित्व की पुष्टि मेडिकल रिव्यू बोर्ड द्वारा की गई है। पीड़ितों को पानी से एलर्जी होने लगती है। यह आमतौर पर जीवन में देर से होता है और अक्सर हार्मोनल असंतुलन के परिणामस्वरूप होता है। एक्वाजेनिक पित्ती का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, लक्षणों को कम करने के लिए उपचार के विकल्प उपलब्ध हैं।

विदेशी एक्सेंट सिंड्रोम(foreign accent syndrome)

विदेशी उच्चारण सिंड्रोम के पीड़ित बेवजह खुद को एक अपरिचित बोली में बात करते हुए पाते हैं। केवल 60 मामले अब तक दर्ज किए गए हैं। डॉक्टरों ने शुरू में इसे एक मानसिक समस्या के रूप में खारिज कर दिया, लेकिन 2002 में, इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने देखा कि पीड़ितों में मस्तिष्क की असामान्यताएं समान थीं, जिसके कारण भाषण पिच में बदलाव, स्वर ध्वनियों का लंबा होना और अन्य अनियमितताएं हुईं।

लाफिंग डेथ(laughing death)

लाफिंग डेथ Laughing Death, जिसे आमतौर पर कुरु के नाम से जाना जाता है, न्यू गिनी के आदिवासी लोगों में यह पाया गया था। लोग शुरू में अंगों के कांपने का अनुभव करते हैं और तीन महीनों में, खड़े होने की क्षमता खो देते हैं, अंत में मरने से पहले क्रॉस-आइड हो जाते हैं। गांव में मौत के बाद परिवार के सदस्यों को रवाने की प्रथा के जरिए संक्रमण फैला था। जब इसे बंद कर दिया गया, तो महामारी समाप्त हो गई।

एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम(Alice in Wonderland Syndrome)

ऑक्सफोर्ड हैंडबुक ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन के अनुसार, एलिस इन वंडरलैंड सिंड्रोम के पीडित वस्तुओं को उनकी तुलना में बहुत छोटा समझते हैं। स्थिति, जिसे माइक्रोप्सिया या लिलिपुट दृष्टि के रूप में भी जाना जाता है। ये बीमारी सुनने, स्पर्श करने और स्वयं के शरीर की छवि की धारणाओं को प्रभावित करती है।

पिका(pica)

पिका एक खाने का विकार है, जिसमें लोग एक या एक से अधिक गै-रखाद्य पदार्थ, जैसे बर्फ, मिट्टी, कागज, राख या गंदगी रवाने के लिए मजबूर होते हैं। पैगोफैगिया पिका का एक उपप्रकार है। इसमें बर्फ या बर्फ का पानी खाना शामिल है। इसे केवल तभी पिका माना जा सकता है जब भूरव एक महीने से अधिक समय तक बनी रहे और पीड़ित ऐसी उम्र का हो जहां इन वस्तुओं को खाना विकास की दृष्टि से अनुचित माना जाता है। 

तो दोस्तों मै उम्मीद करता हु की आज के इस लेख में बताई गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी. आज आपने जीतने भी रहस्यमई बीमारियों  (Mysterious Diseases) के बारें में जाना वह आपके ज्ञान को बढ़ाएंगे और यह जानकारी आपको कभी न कभी कम जरूर आएँगी. 

Healthy Lifestyle Tips in Hindi | हेल्थ टिप्स

स्वस्थ जीवन को मानव जीवन का सबसे बड़ा धन कहा जाता हैं. वैसे तो सेहतमंद रहने के हजारों तरीके है, और वह तरीके अलग-अलग नियम के अनुसार काम करती हैं. आज हम उन्ही तरिको में से कुछ महत्वपूर्ण नियमों को जानेंगे जिससे की हम अपने जीवन में सेहतमंद रह सकते हैं।

अपने भोजन को दवा की तरह खाओ ताकि आप उस अवस्था में न पहुंच जाओ, जहां दवा ही आपका भोजन हो। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे लीन प्रोटीन, स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट।

स्वस्थ जीवन के लिए सुनहरा नियम | Health Tips in Hindi

जब 20 साल के हों (When 20 Years Old)-

स्वस्थ जीवन के लिए इस उम्र में, आपका रक्त बिना रुकी हुई धमनियों से मुक्त रूप से बहता है और आपके पास कोशिकाएं होती हैं आहार : मधुमेह और कब्ज से सुरक्षित रहने के लिए फाइबर युक्त भोजन करें। दूध, मछली, टूना, सामन, अनाज, दलिया, सोया जैसे उच्च विटामिन डी वाले भोजन को शामिल करें।

जाने- नींद की कमी से होने वाले नुकशान 

जब 30 साल के हों (When 30 Years Old)-

इस उम्र में, आपका चयापचय धीमा होने लगता है और आपको वजन बढ़ने और मांसपेशियों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आपको हृदय रोगों के जोखिम के बारे में भी सोचना होगा। अपने आहार में ओमेगा -3 फैटी एसिड शामिल करें। शराब पीने की आदत न डालें, यह निश्चित रूप से आपके जीवन को बर्बाद कर देगा।

जब 40 साल के हों (When 40 Years Old)-

इस उम्र में, एटाआक्सिडेंट से भरपूर उच्च फाइबर वाले आहार पर अधिक ध्यान दें। मौसमी और स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक फल खाएं। अमरुद, आम, ड्रैगन फ्रूट, चुकंदर, कटी हुई पत्ता गोभी की सलाह दी जाती है। कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें और जंक फूड को ना कहें।

जब 50 साल के हों (When 50 Years Old)-

इस उम्र में, महिलाओं को चिंता करने के लिए रजोनिवृत्ति होती है, पुरुषों के पास ध्यान केंद्रित करने के लिए उनके मिड्रिफ होते हैं। रक्त शर्करा के स्तर, रक्त में कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप की जांच करें। अपने आहार में पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। पैकेज्ड और जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें।

पढ़े- तनाव दूर करने के अचूक उपाय 

जब 60 साल के हों (When 60 Years Old)-

आप ग्रेट हैं, जीवन में बहुत आगे निकल आए हैं। इस उम्र में आपको अपनी मांसपेशियों को बनाए रखने और एक्स्ट्रा वेट से लड़ने पर ध्यान देने की जरूरत है। अपने प्रोटीन सेवन में विविधता लाएं और सुनिश्चित करें कि आपको पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति मिलती रहे।

जब आप 70 या 80 के हों (When You're 70 Or 80)- 

इस उम्र में, हाइड्रेशन चिंता का एक प्रमुख कारण है, इसलिए दिन में लगभग 6-8 गिलास या कप पर्याप्त पानी पिएं। आपकी कैलोरी का सेवन आपकी गतिविधि के स्तर और चयापचय पर निर्भर करता है। वॉक करें, आस-पास से छोटी-मोटी शॉपिंग करें, जिससे ताकत और लचीलापन बना रहे।

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नेफ्राइटिस - NEPHRITIS

हमारे शरीर में दो किडनियां पायी जाती है, जो हमारे शरीर में उपस्थित अपशिष्ट तत्वों और अतिरिक्त तरल पदार्थों को बहार निकलती हैं. यदि इन किडनियों में सुजन आ जाए तब इस स्थिति को “नेफ्राइटिस” कहा जाता हैं.

परिचय- जिस रोग में गुर्दे (किडनी) के प्रदाह की वजह से बहुत थोड़ी मात्रा में पेशाब होता है और बहुत शीघ्र सारे शरीर में शोथ (सूजन), कमजोरी, रक्ताल्पता (खून की कमी-Anemia) आदि शिकायतें पैदा हो जाती हैं इसे ब्राइट्स डिजीज कहते हैं। इसका दूसरा नाम नेफ्राइटिस (Nephritis) है। ("वृक्क शोथ' (Nephritis) निम्न दो प्रकार का होता है 1. एक्यूट (नया प्रदाह). 2. क्रॉनिक (पुराना प्रदाह)।

NEPHRITIS IN HINDI

इसे 'एक्यूट ग्लोमेरूलो नेफ्राइटिस' (Acute Glomerulo Nephritis) भी कहते हैं। इसमें दोनों वृक्कों के कोशिका स्तबकों (Glomeruli) में शोथ हो जाता है। नेफ्राइटिस से जुडी इस जानकारी में आज हम जानेंगे – 

  • नेफ्राइटिस के मुख्य कारण 
  • नेफ्राइटिस के मुख्य  लक्षण
  • नेफ्राइटिस की पहचान कैसे करें
  • नेफ्राइटिस का परिणाम
  • नेफ्राइटिस  के लिए चिकित्सा सिद्धान्त
  • नेफ्राइटिस  के लिए आहार व सावधानी

नेफ्राइटिस के मुख्य कारण (Main causes of nephritis)-

  • सबसे बड़ा कारण रक्त संलापी (हीमोलाइटिक स्ट्रेप्टोकोकाई) नामक जीवाणु होते हैं। 
  • अधिक ठंड या सर्दी लगना। 
  • स्कारलैट फीवर, रक्तस्रावी चेचक आदि कुछ बीमारियों तथा डिपथीरिया, खसरा, मलेरिया, सेरिब्रो-स्पाइनल मेनिन्जाइटिस, विसर्प, वात ज्वर, एक्यूट ट्यूबरकुलोसिस, सेप्टीसीमिया, उपदंश, हैजा की कमजोरी हालत में तथा आग में जलने और नाना प्रकार के चर्म रोग के साथ भी यह बीमारी होती है। 
  • कुछ विषैली दवाओं यथा-पोटेशियम क्लोरेट, टर्पेन्टाइन, नाइट्रेट आदि के सेवन से।

नेफ्राइटिस के मुख्य  लक्षण (Main symptoms of nephritis)-

  • ठंड लग कर बीमारी एकाएक हो सकती है और देखते-देखते थोड़े समय में रोगी को सूजन आ जाती है। कभी-कभी शीत और कम्प होकर बीमारी आरम्भ होती है। 
  • कमर, सारे शरीर एवं माथे में दर्द। 
  • पहले आँखों के नीचे की पलक और पैर की गाँठ से पास सूजन होती है और फिर धीरे धीरे सारे शरीर में। चेहरे का फूलना। 
  • मूत्र की मात्रा अल्प और मूत्र में रक्त की उपस्थिति। 
  • व्याकुलता, ज्वर, अग्निमांद्य, वमन, शिरशूल आदि की प्रधानता।
  • सारा शरीर रक्तहीन दिखाई देता है। 
  • शरीर की त्वचा शुष्क ।
  • नोट- इस रोग में पेशाब बार-बार और जल्दी-जल्दी होता है और बहुत थोड़े परिमाण में होता है। यहाँ तक 2-4 बंद से अधिक नहीं। पेशाब लाल और गाढ़ा होता है। पेशाब बंद होने के कारण यूरीमिया। 

नेफ्राइटिस की पहचान कैसे करें (How to recognize nephritis)–

  • नाड़ी बहुत कड़ी और महाधमनी के ऊपर द्वितीय शब्द (2nd sound) बढ़ जाता है। 
  • पेशाब का आपेक्षिक गुरुत्व (Specific | Gravity) 1020 से 1440 तक। 
  • पेशाब टेस्ट में-एल्बूमेन, रक्त के कण और किडनी की गठित सामग्री यथा-रेनल, हायलिन, एपिथिलियल और रक्त का कास्ट, ट्यूब कास्ट आदि पाये जाते हैं। मूत्र कम, लाल या धूमिल (Smoky) एवं गाढ़ा। 
  • परेटिनल परीक्षण से अक्षिविम्ब शोफ (Papill oedema), रक्तसाव एवं निःसाव की जानकारी।

नेफ्राइटिस का परिणाम (Consequence of nephritis)–

  • सर्दी लग कर बीमारी हुई हो तो थोड़े ही दिनों में ठीक हो जाती है। 0
  • अन्यान्य कारणों से बीमारी हुई हो तो अधिकांश क्षेत्रों में घातक। 
  • ज्वर के साथ बच्चों को और गर्भवती स्त्रियों में 40-50% रोगियों की मृत्यु 
  • कभी-कभी पुराना रूप (Chronic) धारण कर लेती है। 
  • यूरीमिया होने से मस्तिष्क प्रभावित। 
  • कभी कभी बेचैनी, बेहोशी एवं पागलपन जैसे लक्षण। 
  • 'यूरीमिया' एवं 'अम्ल रक्तता से मृत्यु।
  • बच्चों में चिकित्सा द्वारा 90% लाभ, जबकि प्रौढ़ों में 50% की आशा।

नेफ्राइटिस  के लिए चिकित्सा सिद्धान्त (Medical principles for nephritis) –

  • इस बीमारी में गुर्दे का प्रदाह हो जाता है, इसलिये गुर्दे (Kidneys) को जितना ही विश्राम दिया जाय, उतना ही अच्छा है। 
  • ऐसी व्यवस्था करें जिससे दस्त वगैरह साफ हों। 
  • इस रोग में सूजन होती है और शरीर में पानी एकत्रित होता है इसलिये यदि 'प्लूरा और 'हृदयावरण' के भीतर पानी इकट्ठा हो तो उसके लिये दवा की अलग व्यवस्था करनी चाहिये। 
  • यदि पेशाब बहुत थोड़ा हो तो ऐसी व्यवस्था करें जिससे पेशाब का वेग बढ़े। 
  • यदि वमन हो तो उसे 'बर्फ, चूसने को दें। 
  • यदि वमन थोड़ा हो रहा हो तो व्यवस्था की आवश्यकता नहीं। 
  • यदि वमन बहुत देर तक होता रहे तो चिकित्सकों को विशेष सावधानी से काम लेना चाहिये।

नेफ्राइटिस  के लिए आहार व सावधानी- 

  • दूध इस रोग का प्रधान पथ्य है। 
  • रोग के कारण शरीर से जो एल्बुमिन निकल जाता है है दूध से उसकी पूर्ति हो जाती है। 
  • दूध, सागू, दूध बार्ली आदि के सिवाय कुछ न दें। पानी इच्छानुसार दिया जा सकता है। 
  • गर्म पेय अधिक लाभदायक हैं। 
  • ताजे पके फल, आलू, परवल, तोरई वगैरह उबाल कर दी जा सकती हैं। 
  • थोड़ा आराम हो जाने पर 30-45 अथवा दो महीने बाद भात, दाल, मछली का शोरवा दें। माँस कम से कम 6 महीने तक नहीं देना चाहिये। 
  • रोगी को गरम वस्त्रों में लपेट कर रखें, उसे ठंड तथा सीधी हवा नहीं लगनी चाहिये। 
  • बीमारी में आराम हो जाने के बाद भी 5-6 माह तक कमर में ऊनी कपड़ा लपेटे रहना चाहिये। 
  • बदन पर भी गरम कपड़े पहने रहना चाहिये।

उम्मीद है की नेफ्राइटिस से जुडी यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो. यदि नेफ्राइटिस के बारे में इतनी जानकारी आपने ले ली तो कृपया इस जानकारी को अन्य जरूरतमंद को जरूर भेजियें. “धन्यवाद”

 

उम्र के हिसाब से कराएँ शारीरिक जाँच 

दोस्तों जाँच किसी भी चीज को परखने का सबसे अच्छा माध्यम जाँच को माना जाता हैं. क्योंकि एक यही चीज होती हैं जिसके जरिये हमारे शरीर में आ रही समस्याओं को जाँच के माध्यम से ही पता लगाया जाता हैं. लक्षण उभरने पर रोग का इलाज कराने से बेहतर है कि उसे पहले ही पहचान लिया जाए। इसलिए चिकित्सक उम्र के अनुसार कुछ जांचें नियमित अंतराल पर कराने की सलाह देते हैं।

अलग-अलग उम्र में शारीरिक जाँच की जरूरत | Physical Examination in Hindi

30 की उम्र से पहले कराए जाने वाले जाँच-

  • हीमोग्लोबिन टेस्ट कराएं, ताकि रक्त की कमी को लेकर समय रहते निदान किया जा सके। 
  • विटामिन-डी की जांच कराएं। इसकी कमी आजकल अमूमन महिलाओं में देखी जाती है। 
  • बीएमआई टेस्ट भी कराना चाहिए।

30 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-

खून व विटामिन की जांच - इसमें हीमोग्लोबिन का स्तर, पॉलिमोपस, लिंफोसाइट, मोनोसाइट, प्लेटलेट्स आदि के स्तर को मापा जाता है। विटामिन डी और बी12 की कमी का भी पता लगाया जाता है। इनकी कमी से महिलाओं में थकान और कमजोरी हो जाती है।

पैपस्मिअर के साथ (पेल्विक)परीक्षण - पेल्विक परीक्षण में महिला के जननांगों, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, फेलोपियन ट्यूब्स, मलाशय और ब्लैडर की जांच की जाती है। ये दोनों ही परीक्षण महिलाओं में कैंसर को रोकने और शुरुआती उपचार में मददगार होते हैं। 

मधुमेह जांच - गर्भावस्था में होने वाला मधुमेह स्वस्थ महिला को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए ब्लड शुगर की जांच कराएं। यदि मधुमेह आनुवंशिक है तो कुछ समय के अंतराल में इसकी जांच कराती रहें।

मैमोग्राम और स्तन परीक्षण - आमतौर पर 40 की उम्र के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट की सलाह दी जाती है, लेकिन अगर ब्रेस्ट कैंसर की आनुवंशिकता हो तो बेहतर है कि पहले ही नियमित स्तन परीक्षण के साथ मैमोग्राम करा लें।

40 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-

लिपिड प्रोफाइल - कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग इसमें ब्लड टेस्ट से कोलेस्ट्रॉल चैक होता है। जरूरत पड़ने पर ईसीजी भी करवा लें। 

सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर - स्क्रीनिंग पेप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। 40 के बाद तो ये टेस्ट होना ही चाहिए। इसके अलावा नियमित बेस्ट एग्जामिनेशन करवाना ना भूलें। इसमें हर दो से तीन हफ्ते में स्वयं भी शारीरिक परीक्षण कर सकती हैं। किसी तरह की गांठ महसूस होती है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। 

थाइरॉइड टेस्ट - थाइरॉइड धीरे-धीरे बॉडी सिस्टम को प्रभावित करता है। डॉक्टरी सलाह से इसकी जांच कराएं। 

विज़न टेस्ट - अगर नजर का चश्मा पहनती हैं या कॉन्टैक्ट लेंस लगाती हैं तो हर साल विजन टेस्ट करवाएं। अगर चश्मा नहीं पहनती हैं तो हर 2 साल में एक बार टेस्ट करवाना जरूरी है।

50 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-

हृदयकेलिए ईसीजी, इको, ईकेजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) बीपी और टीएमटी कराने चाहिए। कोलेस्ट्रॉल की जांच हर साल कोलेस्ट्रॉल परीक्षण कराएं। यदि मधुमेह, हृदय या किडनी के रोग से पीड़ित हों हे परीक्षण और भी कम अंतराल में या डॉक्टर को सलाह के मुताबिक़ कराएं। 

साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग मेनोपॉज के कारण मूड स्विंग, डिप्रेशन, नीद ना आना, चिड़चिड़ापन होने लगता है। हॉर्मोनल। बदलाव से 75% महिलाओं में यह होता ही है।

60 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-

ब्लड प्रेशर जांच - उच्च रक्तचाप को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि यह कोई लक्षण दिखाए बिना ही स्ट्रोक या दिल के दौरे के जोखिम को बढ़ा देता है। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी है। 

बोन डेंसिटीटेस्ट बुजुगों में ऑस्टियोपोरोसिस सामान्य बीमारी है। डॉक्टरी सलाह से बोन डेंसिटी टेस्ट भी करवाएं। 

आंखों की जांच - उम्र के कारण आंखों में ग्लूकोमा या मोतियाबिंद जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। हर छह महीने या डॉक्टर से परामर्श लेकर समय-समय पर इसकी जांच कराएं।

नोट:- ऊपर दी गई जानकारियां आपको जागरूक करने के लिए हैं। कृपया टेस्ट के लिए डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। 

आशा हैं की ऊपर आर्टिकल में बतायी गए सारी जानकारी आपको अच्छी लगी हो. यदि यह आर्टिकल आपके लाइफ को बेहतर और सेहतमंद बनाने में आपकी मदत करती हैं तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें. “धन्यवाद”