उम्र के हिसाब से कराएँ शारीरिक जाँच
दोस्तों जाँच किसी भी चीज को परखने का सबसे अच्छा माध्यम जाँच को माना जाता हैं. क्योंकि एक यही चीज होती हैं जिसके जरिये हमारे शरीर में आ रही समस्याओं को जाँच के माध्यम से ही पता लगाया जाता हैं. लक्षण उभरने पर रोग का इलाज कराने से बेहतर है कि उसे पहले ही पहचान लिया जाए। इसलिए चिकित्सक उम्र के अनुसार कुछ जांचें नियमित अंतराल पर कराने की सलाह देते हैं।
30 की उम्र से पहले कराए जाने वाले जाँच-
- हीमोग्लोबिन टेस्ट कराएं, ताकि रक्त की कमी को लेकर समय रहते निदान किया जा सके।
- विटामिन-डी की जांच कराएं। इसकी कमी आजकल अमूमन महिलाओं में देखी जाती है।
- बीएमआई टेस्ट भी कराना चाहिए।
30 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-
खून व विटामिन की जांच - इसमें हीमोग्लोबिन का स्तर, पॉलिमोपस, लिंफोसाइट, मोनोसाइट, प्लेटलेट्स आदि के स्तर को मापा जाता है। विटामिन डी और बी12 की कमी का भी पता लगाया जाता है। इनकी कमी से महिलाओं में थकान और कमजोरी हो जाती है।
पैपस्मिअर के साथ (पेल्विक)परीक्षण - पेल्विक परीक्षण में महिला के जननांगों, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, फेलोपियन ट्यूब्स, मलाशय और ब्लैडर की जांच की जाती है। ये दोनों ही परीक्षण महिलाओं में कैंसर को रोकने और शुरुआती उपचार में मददगार होते हैं।
मधुमेह जांच - गर्भावस्था में होने वाला मधुमेह स्वस्थ महिला को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए ब्लड शुगर की जांच कराएं। यदि मधुमेह आनुवंशिक है तो कुछ समय के अंतराल में इसकी जांच कराती रहें।
मैमोग्राम और स्तन परीक्षण - आमतौर पर 40 की उम्र के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट की सलाह दी जाती है, लेकिन अगर ब्रेस्ट कैंसर की आनुवंशिकता हो तो बेहतर है कि पहले ही नियमित स्तन परीक्षण के साथ मैमोग्राम करा लें।
40 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-
लिपिड प्रोफाइल - कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग इसमें ब्लड टेस्ट से कोलेस्ट्रॉल चैक होता है। जरूरत पड़ने पर ईसीजी भी करवा लें।
सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर - स्क्रीनिंग पेप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। 40 के बाद तो ये टेस्ट होना ही चाहिए। इसके अलावा नियमित बेस्ट एग्जामिनेशन करवाना ना भूलें। इसमें हर दो से तीन हफ्ते में स्वयं भी शारीरिक परीक्षण कर सकती हैं। किसी तरह की गांठ महसूस होती है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
थाइरॉइड टेस्ट - थाइरॉइड धीरे-धीरे बॉडी सिस्टम को प्रभावित करता है। डॉक्टरी सलाह से इसकी जांच कराएं।
विज़न टेस्ट - अगर नजर का चश्मा पहनती हैं या कॉन्टैक्ट लेंस लगाती हैं तो हर साल विजन टेस्ट करवाएं। अगर चश्मा नहीं पहनती हैं तो हर 2 साल में एक बार टेस्ट करवाना जरूरी है।
50 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-
हृदयकेलिए ईसीजी, इको, ईकेजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) बीपी और टीएमटी कराने चाहिए। कोलेस्ट्रॉल की जांच हर साल कोलेस्ट्रॉल परीक्षण कराएं। यदि मधुमेह, हृदय या किडनी के रोग से पीड़ित हों हे परीक्षण और भी कम अंतराल में या डॉक्टर को सलाह के मुताबिक़ कराएं।
साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग मेनोपॉज के कारण मूड स्विंग, डिप्रेशन, नीद ना आना, चिड़चिड़ापन होने लगता है। हॉर्मोनल। बदलाव से 75% महिलाओं में यह होता ही है।
60 की उम्र के बाद कराए जाने वाले जाँच-
ब्लड प्रेशर जांच - उच्च रक्तचाप को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि यह कोई लक्षण दिखाए बिना ही स्ट्रोक या दिल के दौरे के जोखिम को बढ़ा देता है। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच जरूरी है।
बोन डेंसिटीटेस्ट बुजुगों में ऑस्टियोपोरोसिस सामान्य बीमारी है। डॉक्टरी सलाह से बोन डेंसिटी टेस्ट भी करवाएं।
आंखों की जांच - उम्र के कारण आंखों में ग्लूकोमा या मोतियाबिंद जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। हर छह महीने या डॉक्टर से परामर्श लेकर समय-समय पर इसकी जांच कराएं।
नोट:- ऊपर दी गई जानकारियां आपको जागरूक करने के लिए हैं। कृपया टेस्ट के लिए डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
आशा हैं की ऊपर आर्टिकल में बतायी गए सारी जानकारी आपको अच्छी लगी हो. यदि यह आर्टिकल आपके लाइफ को बेहतर और सेहतमंद बनाने में आपकी मदत करती हैं तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें. “धन्यवाद”
