INDIGESTION या भोजन ठीक से न पचना क्या होता है ?
INDIGESTION का परिचय - खाए हुए भोजन का ठीक से न पचना ही INDIGESTION है। भोजन का नहीं पचना भी इसे कह सकते है.जठराग्नि की मदता से भोजन का परिपाक (पाचन) नहीं होता है और इस भोजन की अपरिपक्वता को INDIGESTION या हिंदी में इसे अजीर्ण कहा जाता है। दूसरे शब्दों में पाचन तन्त्र में पाचक रसों की कमी के कारण भोजन का न पचना अजीर्ण (Indigestion) कहलाता है। सामान्य बोलचाल में इसे अपच भी कहते हैं।
रूप रेखा :-
- INDIGESTION या भोजन ठीक से न पचना क्या होता है
- INDIGESTION के प्रमुख कारण
- INDIGESTION के प्रमुख लक्षण
- INDIGESTION के लिए चिकित्सा विधि
- INDIGESTION के लिए सहायक
INDIGESTION के प्रमुख कारण (MAJOR REASON OF INDIGESTION)
- बेवक्त भोजन अधिक भोजन करना।
- भूख न लगने पर भी भोजन करना।
- एवं गरिष्ठ भोजन।
- खट्टी-मीठी चीजों का भोजन में विशेष उपयोग।
- भोजन के साथ-साथ अधिक पानी पीना।
- कभी अधिक, कभी अल्प तथा अनियमित भोजन करना।
- भोजन का जल्दी-जल्दी बिना चबाए निगल जाना।
- अति गर्म एवं शीत भोजन।
- दिन में सोना एवं रात्रि जागरण
- कष्टप्रद शैय्या भी अजीर्ण कारक है।
- चिंता एवं शोकातुर बने रहना।
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यद्यपि शारीरिक एवं मानसिक कारणों से अजीर्ण हो जाता है और किए हुए भोजन का सम्यक पाक नहीं हो पाता।पाचक रसों के साथ जलांश की अधिकता के कारण उनकी पाचन क्षमता घट जाने पर आहार का पाक न होने से अजीर्ण हो जाता है।
INDIGESTION के प्रमुख लक्षण(MAJOR CHARACTERISTICS OF INDIGESTION)
- सल या अन्न का कोष्ठ में रुका रहना ।
- मल-विबंध (Constipation) अथवा मल की अति प्रवृत्ति ।
- खट्टी डकारें आना ।
- मुँह से खट्टा पानी आते रहना।
- पेट में अफारा एवं भारीपन ।
- मितली एवं कै की अनुभूति ।
- वायु चलना एवं पेट में गुड़गुड़ाहट ।
- तबिय निरतर सुस्त एवं बेचैनी ।
- सिर में दर्द एवं शरीर में भारीपन की अनुभूति ।
- अधोवायु की रुकावट प्रायः ।
- सिर में चक्कर एवं शिथिलता
INDIGESTION के लिए चिकित्सा विधि(THE MEDICAL METHOD FOR INDIGESTION) -
1.उपवास कराना एवं लघु भोजन देना उपयुक्त रहता है। उपवास के साथ-साथ रोगी को पाचन
औषधि भी खिलानी चाहिए। दीपन, पाचन औषधियों का प्रयोग एवं हल्का भोजन दें।
2.यदि प्रातः काल में अजीर्ण की आशंका हो तो कुछ शौधी हर्र अथवा भुनी छोटी हर्र का चूर्ण + सोंठ का चूर्ण 2-2 ग्राम तथा सेंधा नमक 1 ग्राम मिलाकर ठण्डे जल से खाना चाहिए तत्पश्चात भोजन काल में हल्की मात्रा में भोजन देना चाहिए।
सावधान- अजीर्ण के रोगी को भीषण वेदना होने पर भी वेदनाशामक औषधियाँ नहीं देनी चाहिए। क्योंकि उसका पाचन तो होता नहीं है, उल्टे वह अपक्व रहकर आम की वृद्धि होकर रोगी मौत की राह पकड़ लेता है।
INDIGESTION के लिए सहायक चिकित्सा -
- अनेक प्रकार के व्यायाम, अग्नि दीपक एवं लघु आहार, कटु एवं तिक्त द्रव्यों का सेवन करना चाहिए
- आहार में थोड़ी मात्रा में दूध एवं रोटी लेना चाहिए।
- भोजन के पूर्व अदरक की पतली कतरन में नींबू का रस, सेंधा नमक, लहसुन के टुकड़े, हरी धनियाँ की पत्ती, भुनी हींग, भुना जीरा का चूर्ण रुचि के अनुसार खिलाना चाहिए।
- उपवास के समय अदरक तथा नमक चूसना चाहिए।
- पीपल, भुनी छोटी हर्र एवं सोंठ के सम भाग चूर्ण में पाँचवाँ भाग सेंधा नमक मिलाकर खाने से अपक्व भोजन का पाचन होता है।
याद रखिए :-
तीव्र विरेचन, मल-मूत्र एवं अधो वायु का रोकना। सेम, मटर, मांस, अधिक जल पीना, आलू जामुन एवं विरुद्धाहार आदि सभी अपथ्य हैं।
तो आज के इस हेल्थ से जुडी आर्टिकल में हमने आपको INDIGESTION या भोजन ठीक से न पचना क्या होता है ?, INDIGESTION के प्रमुख कारण, INDIGESTION के प्रमुख लक्षण, INDIGESTION के लिए चिकित्सा विधि और साथ ही INDIGESTION के लिए सहायक चिकित्सा के बारे में पूरी जानकारी आपको देने की कोशिस की है.

