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पित्ताशय शोथ/कोलीसिस्टाइटिस (CHOLECYSTITIS)

कोलीसिस्टाइटिस की परिभाषा - पित्ताशय प्रदाह, पित्त की थैली की सूजन, पित्ते की सूजन परिचय- पित्ताशय में सूजन आकर उसका परिमाण बढ़ जाता है। इस रोग के प्रमुख 2 भेद पाए जाते हैं .

कोलीसिस्टाइटिस क्या है | Cholecystitis complete information in hindi

रूप रेखा –

  • कोलीसिस्टाइटिस की परिभाषा 
  • कोलीसिस्टाइटिस के प्रकार 
  • कोलीसिस्टाइटिस के कारण 
  • कोलीसिस्टाइटिस के लक्षण 
  • कोलीसिस्टाइटिस की पहचान 
  • कोलीसिस्टाइटिस का परिणाम 

(1) तीव्र पित्ताशय शोथ (Acute Cholecystitis), (2) जीर्ण पित्ताशय शोथ (Chronic Cholecystitis) 

कोलीसिस्टाइटिस के कारण -

कोलीसिस्टाइटिस अधिकतर पित्ताशय की ग्रीवा अथवा पित्ताशय वाहिनी में अवरोध के परिणाम स्वरूप। साथ में संक्रमण भी उपस्थित। अवरोध का हेतु प्रायः पित्ताश्मरी (Gall Stone) है ।तीव्र पित्ताशय शोथ-टाइफॉइड, पैराटाइ फॉइड ज्वर तथा सिप्टीसीमिया में विष किसी अवरोध के भी हो सकता है।

कोलीसिस्टाइटिस के लक्षण - 

  • भारी शरीर की बहु प्रसूता की स्त्रियों में अधिक । अवरोध न होने पर और 40-60 वर्ष
  • वमन की इच्छा। उदर के उर्ध्व भाग में बेचैनी एवं ज्वर।
  • रोगी को गहरी साँस लेने पर बाएँ अधःपर्शुका प्रदेश (Hypochondrium) में स्पर्श द्वारा परीक्षा करने पर अत्यधिक स्पर्शासहिष्णुता (Tender ness) पायी जाती है। 
  • अवरोध की स्थिति में -पित्त शूल (Biliary colic) जो तीव्र होता है एवं बेचैनी उपस्थित रहती है।
  • कामला (Jaundice) अनुपस्थित अथवा अल्प |
  • गोफ के कारण होने वाले सामान्य पित्तवाहिनी के

कोलीसिस्टाइटिस की पहचान / जाँच - 

  • पित्त की उपस्थिति के लिए मूत्र परीक्षण एवं सीरम बिलिरुविन के लिए रक्त परीक्षण आवश्यक । सीरम विलीरुविन ज्यादा होता है।
  • बहुरूपी केंद्रक श्वेत कोशिका बहुलता
  • प्रायः मिलती है। अर्थात खून की जांच में TLC बढ़े हुए होते हैं। 
  • सीरम इमाइलेज थोड़ा-सा बढ़ जाता है
  • पेशाब में वाइल साल्ट्स होते हैं। 
  • एक्स-रे करवाने पर गालस्टोन दिखाई दे सकते हैं ।
  • अल्टासोनोग्राफी करने पर गालस्टोन व पित्ताशय की स्थिति का ज्ञान हो जाता है।

कोलीसिस्टाइटिस के परिणाम -

  • संरक्षी चिकित्सा (Conservative treatment) द्वारा कुछ दिनों में लक्षण शांत हो जाते हैं। परंतु सप्ताहों, महीनों अथवा वर्षों के बाद पुन: इसके पुनरावर्तन की आशंका रहती है। अवरोध अथवा
  • संक्रमण के परिणामस्वरूप रोग बढ़ जाय अथवा विद्रधि या तीव्र
  • शोथ हो जाए। ऐसी अवस्था में 
  • नाड़ी तीव्र,ज्वर तीव्र, रोगी की दशा गंभीर 

तो दोस्तों आज के इस कोलीसिस्टाइटिस की जानकारी में हमने आपको कोलीसिस्टाइटिस की परिभाषा कोलीसिस्टाइटिस के प्रकार, कोलीसिस्टाइटिस के कारण, कोलीसिस्टाइटिस के लक्षण और कोलीसिस्टाइटिस की पहचान साथ ही कोलीसिस्टाइटिस के परिणाम के बारे में बताया.

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