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योग मुद्रा क्या हैं | योग मुद्रा के प्रकार (What are Yoga Mudras? types of yoga poses)

योग हस्त मुद्रा या हस्त मुद्रा (Yoga - Hand Gestures) प्राचीन काल से प्रभावकारी माना जाता आ रहा हैं, चाहे वह ध्यान के क्षेत्र में हो या योग के क्षेत्र में. आपने भी अक्सर देखा होगा की जितने भी महान तपस्वी, संत, महात्मा हुए हैं वे अपने हाथों को किसी एक विशेष स्थिति में कर के बैठे या खड़े होते हैं, और इसे ही मुद्रा (mudras) कहा जाता हैं. 

मुद्रा  क्या हैं | मुद्रा  के प्रकार व फायदे - Yogas Mudras in Hindi

मुद्रा क्या है? (What is Mudras)

मुद्रा (mudras), हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में एक प्रतीकात्मक या अनुष्ठानिक इशारा है। कुछ मुद्राओं में पूरा शरीर शामिल होता है, जबकि अधिकांश केवल हाथों और उंगलियों से की जाती हैं। मुद्रा भी एक आध्यात्मिक इशारा है जो, आमतौर पर योग और ध्यान में प्रयोग किया जाता है।

हमें ध्यान मुद्रा का अभ्यास क्यों करना चाहिए? 

योगाभ्यास में मुद्रा का उपयोग सेल्फ केयर और सशक्तिकरण के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। योग का मकसद अपने आप को पहचानना और ऊर्जावान बनाना है। 100 से अधिक ज्ञात मुद्राएं हैं जिन्हें सदियों से विकसित किया गया है।

ज्ञान मुद्रा (Gyan Mudra): - 

ज्ञान मुद्रा का उद्देश्य आपकी एकाग्रता में सुधार करना और आपकी याददाश्त को तेज करना है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए और उसके उपयोग करने के लिए यह एक महान मुद्रा है। विधि : यह मुद्रा तर्जनी को अपने अंगूठे की नोक से छूकर अपनी अन्य तीन अंगुलियों को सीधा रखते हुए की जाती है।

Gyan Mudra

ज्ञान मुद्रा के फायदे (Benifits of Gyan Mudra)-

  • ज्ञान मुद्रा शरीर में वायु तत्व को बढ़ाता है। 
  • बॉडी में जोश, साहस और रचनात्मक सोच को बढ़ाता है। 
  • ज्ञान मुद्रा हमारे अवचेतन मन की विचार क्षमता और याददाश्त को बढ़ाता है। 
  • थकान, आलस्य और मानसिक उलझनों से निपटने में बेहद कारगर है।

बुद्धि मुद्रा (Budhhi Mudra):- 

इस मुद्रा का उपयोग मानसिक स्पष्टता के लिए किया जाता है। इस मुद्रा के लाभ कम्युनिकेशन के सुधार के के रूप में पाए जा सकते हैं। विधि : इस मुद्रा को अपनी छोटी उंगली से अपने अंगूठे को छूकर अपनी अन्य तीन अंगुलियों को सीधा रखते हुए किया जाता है। 

Budhhi Mudra

बुद्धि मुद्रा के फायदे (Benifits of Buddhi Mudra)-

  • बुद्धि मुद्रा का मुख्य फायदा वार्ता के दौरान देखा जाता हैं।
  • बुद्धि मुद्रा बुद्धि को शांत और शार्प करने में सहायक होता हैं।
  • इससे मानशिक स्पस्टता में सुधार व सहायता मिलती हैं।

शुनि और शून्य मुद्रा (Shuni Aur Shuny Mudra):-

 इस मुद्रा का उपयोग अंतति, सतर्कता और संवेदी शक्तियों में सुधार के लिए किया जाता है। यह आपकी भावनाओं और विचारों को भी शुद्ध करता है। विधि : इस मुद्रा को मध्यमा अंगुली के सिरे को अंगूठे के सिरे से स्पर्श करते हुए अन्य तीन अंगुलियों को सीधा और शिथिल रखते हुए किया जाता है।

Shuny Mudra

शुनि और शून्य मुद्रा के फायदे (Benifits of Shuni Aur Shuny Mudra)-

  • शारीर व मन को स्वस्थ रखने में सहायक।
  • शरीर में अंतरिक्ष तत्व को कम करता है।
  • कान में दर्द, सुनने में समस्या, यात्रा की थकान को कम करता है।
  • शरीर के कई अंगों जैसे, सिर और सीने में हल्के दर्द को कम करता है।
  • वात प्रकृति वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद।

प्राण मुद्रा (Pran Mudra):-

प्राण मुद्रा को आपके शरीर में निष्क्रिय ऊर्जा को सक्रिय करने की क्षमता के कारण सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक कहा जाता है। विधि : इस मुद्रा को अपनी अनामिका और पिंकी(कनिठिका) उंगलियों को अपने अंगूठे के सिरे से स्पर्श करते हुए अन्य दो अंगुलियों को सीधा रखते हुए करें।

Pran Mudra

प्राण मुद्रा के फायदे (Benifits of Pran mudra)-

  • प्राण मुद्रा ह्रदय से कंठ तक के रोगों से मुक्ति में सहायक।
  • भूख-प्यास व प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक।
  • तन-मन की दुर्बलता को दूर करने में।

ध्यान मुद्रा (Dhyan Mudra):-

इस मुद्रा का महत्व आपको अधिक गहन एकाग्रता में लाना है। यह इशारा आपको शांति और आंतरिक शांति लाने में भी मदद कर सकता है।" विधि : अपने हाथों को ऊपर की ओर करके बैठे, दाहिना हाथ अपनी बायीं हथेली के ऊपर टिका लें।

Dhyan Mudra

ध्यान मुद्रा के फायदे (Benifits of dhyan Mudra)-

  • ध्यान मुद्रा के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है। 
  • ध्यान मुद्रा दिमाग को मेडिटेशन की गहरी अवस्था में ले जाती है।
  • बुद्धिमता और स्मरंशक्ति को बढाने में फायदेमंद।
  • ध्यान व मेडिटेशन करने के लिए प्रमुख माना जाता हैं।

सूर्य मुद्रा (Surya Mudra):-

सूर्य मुद्रा का उद्देश्य चयापचय और पाचन में सुधार करना है। यह शरीर में भारीपन को कम करने और सर्दी से बचाव में मदद करने में भी उपयोगी है। विधि : इस मुद्रा को अपनी अनामिका को अपने अंगूठे के आधार पर झुकाकर करें ताकि आपका अंगूठा अनामिका के पोर को स्पर्श करे। हाथ पर जोर दिए बिना अपनी अन्य तीन अंगुलियों को सीधा फैलाएं।

Surya Mudra

सूर्य मुद्रा के फायदे (Benifits of Surya Mudra)-

  • शरीर में अग्नि तत्व को बढ़ाती है जबकि पृथ्वी तत्व को कम करती है।
  • शरीर के तापमान को बढ़ाती है। 
  • ठंड से कंपकंपी होने पर राहत देती है। 
  • लो थायरॉयड की समस्या वाले लोगों के लिए बेस्ट है।
  • वेट लॉस, अपच, कब्ज या भूख न लगने की समस्या को दूर करती है।

अपान मुद्रा (Apan Mudra):-

अपान मुद्रा मानसिक या शारीरिक पाचन के लिए और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ को खत्म करने के लिए अच्छी है। विधि : इस आसन को करने के लिए अपनी दूसरी और तीसरी अंगुलियों को अपने अंगूठे के पास (मध्यम और अनामिका को अंगूठे के सिरे तक लाएं।

Apan Mudra

अपान मुद्रा के फायदे (Benifits Apan Mudra)-

  • अपान मुद्रा पेट के सभी अंगो को सक्रीय करता हैं।
  • तमशिक पदार्थो को नष्ट करने में सहायक।
  • पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाने में उपयोगी।

गणेश मुद्रा (Ganes mudra):-

गणेश मुद्रा आपके जीवन में सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने के लिए बहुत अच्छी है।" । विधि : अपने बाएं हाथ को अपनी छाती के सामने रखें, आपकी हथेली बाहर की ओर और आपका बायां अंगूठा नीचे की ओर। इसके बाद, अपने दाहिने हाथ को अपनी बाई हथेली के सामने रखें और अपनी दाहिनी हथेली को अपनी ओर और अपनी बाईं हथेली की ओर रखें। अपनी उंगलियों को एक साथ बंद करें, उन्हें पंजे की तरह आधा मुड़ा हुआ स्थिति में रखें।

Ganes mudra

गणेश मुद्रा के फायदे ( Benifits Ganes mudra)-

  • गणेश मुद्रा विषेश कर आत्मविश्वास को बढाने में उपयोगी होता हैं।
  • गणेश मुद्रा फेफड़ो के विस्तार में मददगार।
  • शरिर में स्फूर्ति को बढ़ावा देता हैं।
  • चिंता व तनाव जैसे मानशिक विकारों से मुक्ति।

वायु मुद्रा (Vayu Mudra):-

वायु मुद्रा वायु असंतुलन से संबंधित रोगों के लिए अच्छा है, जैसे गैस से संबंधित दर्द, पेट फूलना, जोड़ों का दर्द, है सूजन और पेट की परेशानी। विधि : अंगूठे को तर्जनी के पोर से जोड़ दें। तर्जनी को अपने आराम के स्तर तक दबाएं; यह इशारा आराम करने के लिए है न कि जोड़ को तनाव देने के लिए।

Vayu Mudra

वायु मुद्रा के फायदे (Benifits of Vayu Mudra)- 

  • मन को शांत रखने में मददगार होती है।
  • इम्यूनिटी को बढ़ाती है।
  • गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे गैस और एसिडिटी पर काबू पाने में मददगार होती है।
  • एंडोक्राइन ग्‍लैंड को उत्तेजित करती है।
  • क्षतिग्रस्त और डेड नर्वस सेल्‍स को पुनर्जीवित करती है।
  • वायु दोष के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द को दूर करती है।

रुद्र मुद्रा (Rudra Mudra):-

यह मुद्रा अक्सर भगवान शिव से जुड़ी होती है क्योंकि यह आपकी आंतरिक परिवर्तनकारी क्षमताओं पर लागू होती है। यह मुद्रा स्पष्टता और विचार की एकाग्रता में सुधार करने में मदद करती है। विधि : इस मुद्रा को करने के लिए अपने अंगूठे को अपनी तर्जनी और अनामिका से जोड़ लें, जबकि अपनी अन्य दो अंगुलियों को जितना हो सके सीधा रखें।

Rudra Mudra

रुद्र मुद्रा के फायदे (Benifits Rudra Mudra)- 

  • यह मुद्रा भूख और प्यास को नियंत्रित करने में मददगार है।
  • इस मुद्रा के अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • इस मुद्रा से पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने में काफी मदद मिलती है।
  • यह मुद्रा मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को ऊर्जान्वित करने में सहायक है।

उम्मीद हैं की यह मुद्रा या हस्त मुद्रा से जुड़ी अनोखी जानकारी आपको पसंद आयी होगी और उपयोगी लगी होगी, यदि आपको इस  मुद्रा या हस्त मुद्रा से जुड़ी जानकरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें.

थकान दूर करने के लिए आसन एक्सरसाइज

थकान एक प्रकार की शाररिक प्रक्रिया में से एक हैं जिसके चलते हमारे शरीर में तनाव और आलस्य  भर जाता हैं. थकान दूर करने के तारिके वैसे तो कई हैं जिनमे से एक तरीका हैं सो जाना लेकिन सवाल यह हैं की, क्या बस सो जाने से हमारी थकान दूर हो जाती हैं? 

इसके जवाब में कई विशेषज्ञों का मनना हैं की यह सही नही हैं. आप थोडा रेस्ट जरूर कर सकते हैं और इसके साथ आप थोड़ी स्ट्रेचिंग थकान दूर करने के लिए आसन एक्सरसाइज कर सकते हैं. तो इस लेख में हम इसी की जानकारी आपको देने जा रहें हैं, आप इन एक्सरसाइज को चित्र के अनुशार देख कर भी कर सकते हैं - 

थकान दूर करने के लिए आसन एक्सरसाइज

  • पैरों की स्ट्रेचिंग करें (Stretching of Legs)
  • कंधों की अकड़न दूर करें (Relieve Shoulder Stiffness)
  • कंधों के लिए स्ट्रेचिंग (Stretching For Shoulders)
  • ट्रायसेप स्ट्रेचिंग करें (Do Tricep Stretching)
  • बैठक वाली साइड स्ट्रेच (Side Stretch)

पैरों की स्ट्रेचिंग करें (Stretching of Legs)

सीधे खड़े हो जाएं। एक पैर को मोड़ते हुए चित्रानुसार संतुलन बनाएं। पंजों की नोक सीधी रहे और पैर मोड़ते हुए दबाव महसूस करें। 15 सेकंड रुकें, फिर पैर नीचे रखें और दूसरे पैर से इसे दोहराएं।

Thkan Dur Karne Ke Upay

सावधानी - इस स्ट्रेचिंग को करते समय ध्यान रखें कि पीठ सीधी रहे। जरूरी लगे तो, दीवार का सहारा ले सकते हैं।

कंधों की अकड़न दूर करें (Relieve Shoulder Stiffness)

सीधे खड़े हो जाएं। अपने हाथों को पीठ के पीछे चित्रानुसार बांधे। . हाथों को छत की ओर उठाने की कोशिश करें, उतना ही जितना कर सकें। 015 सेकंड रुकें। फिर 3-4 बार इस व्यायाम को करें।

Thkan Dur Karne Ke Upay

सावधानी - जब आप हाथों को छत की ओर उठाएं, तो सांस छोड़ते हुए ऐसा करें। इसी समय कंधों को पीछे की ओर खींचें। 

कंधों के लिए स्ट्रेचिंग (Stretching For Shoulders)

पैरों को कंधों जितना दूर रखकर खड़े हों और एक हाथ चित्रानुसार उठाएं। • दूसरे हाथ से कोहनी के पास से पकड़ें और लम्बा किए हाथ को धीरे से अपनी ओर खींचे। . दोनों हाथों से बारी-बारी करें।

Thkan Dur Karne Ke Upay

सावधानी - पीठ को सीधा रखें। हाथ को कंधों के समानांतर उठाना है, यह याद रखें।

ट्रायसेप स्ट्रेचिंग करें (Do Tricep Stretching)

एक हाथ को कंधे के पीछे से ऐसे लाएं कि सिर के ऊपर रहे। .दूसरे हाथ को मोड़कर पीठ के पीछे रखें और सिर पर आए हाथ से मुड़े हाथ को दवाएं। 15 सेकंड रुकें फिर दूसरी तरफ दोहराएं।

Thkan Dur Karne Ke Upay


सावधानी - कंधों को रिलैक्स करके रखिए। जो हाथ पीठ की ओर मुड़ा है, उसकी उंगलियों से रीढ़ की हड्डी छूने की कोशिश करें।

बैठक वाली साइड स्ट्रेच (Side Stretch)

चित्रानुसार किसी बेंच पर बैठ जाएं और हाथों को उतको ओर व हथेलियों को छत को ओर रखते हुए उठाएं। हाथों को खींचते हुए एक तरफ हल्का-सा झुकें। 015 सेकंड बाद यही व्यायाम दूसरी तरफ झुकते हुए करें।

Thkan Dur Karne Ke Upay


सावधानी - ठीक से बैठक बनाए खें। कंधों को नहीं उठाना है, इसका ख्याल रखें। हाथों को बिल्कुल सीधा रखना है। 

आप इस शरीर में कमजोरी और थकान दूर करने के उपाय | Thkan Dur Karne Ke Upay को जानने के बाद इस पर अमल जरूर करें और इसका लाभ ले. इसके साथ ही आप शरीर में कमजोरी और थकान दूर करने के इन तरीको को अपने खास लोगो के साथ साझा जरूर करें – “खुश रहें स्वस्थ रहें ” 

इन जानकारियों को भी पढ़े- 

सुप्त वज्रासन (Supta Vajrasana)

(What is Supta Vajrasana )- सुप्त वज्रासन नाम से ही आप सुप्त वज्रासन का अर्थ समझ गए होंगे, सुप्त का अर्थ होता हैं सोये हुए और वज्रासन एक आसन हैं, सुप्त वज्रासन में हम वज्रासन में बैठ कर पीछे की ओर सोते हैं, यदि आप सुप्त वज्रासन को नियमित करते हैं तो आपको इससे कई तरह के लाभ देखने को मिलेंगे. 

सुप्त वज्रासन के प्रमुख लाभ में कमर दर्द, कब्ज, सांस रोग, रक्त संचार, पेट की चर्बी, मासिक धर्म, पतली कमर इत्यादि इन सभी में लाभ मिलता हैं.

supta vajrasana in hindi

सुप्त वज्रासन की जानकारी में हम निम्न को जानेंगे- 

  • सुप्त वज्रासन करने की विधि
  • सुप्त वज्रासन को कितने समय तक करें?
  • सुप्त वज्रासन के फायदे क्या हैं? 
  • सुप्त वज्रासन सावधानी ?
  • सुप्त वज्रासन के नुकसान ?
 

सुप्त वज्रासन करने की विधि (How to do Supta Vajrasana)

  • वज्रासन में बैठकर हाथों को पार्श्व भाग में रखकर उनकी सहायता से शरीर को पीछे झुकाते हुए भूमि पर सिर टिका दीजिए। 
  • घुटने मिले हुए हों तथा भूमि पर टिके हुए हों। इस अवस्था में अपने हिसाब से व्यवस्था बनाए रखें
  • धीरे-धीरे कन्धों, ग्रीवा एवं पीठ को भी भूमि पर टिकाने का प्रयत्न कीजिए। 
  • हाथों को जंघाओं पर सीधा रखें।(यह भी जाने - गलत खान-पान से होती हैं ये तीन बड़ी बिमारी )
  • इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस ले और सांस छोड़े ।
  • आसन को छोड़ते समय कोहनियों एवं हाथों का सहारा लेते हुए वज्रासन में बैठ जाएँ। 

सुप्त वज्रासन को कितने समय तक करें? (Supta Vajrasana time limit)

सुप्त वज्रासन (Supta Vajrasana) को सामान्यता 3 से 4 चक्र ही करें और यह फायदे मंद हो सकता हैं, सुप्त वज्रासन को आप अपने सहोलियत के अनुशार करें समय की बात करें तो आप सुप्त वज्रासन को 10 से 15 तक कर सकते हैं. 

सुप्त वज्रासन के फायदे (Supta Vajrasana benefits in Hindi)

  • नाभि का टलना दूर करता है, गुर्दो के लिए भी लाभकारी है। 
  • इस आसन से पेट के नीचे वाला भाग खींचता है, जिससे बड़ी आँत सक्रिय होने से कोष्ठ-बद्धता मिटती है।
  • सुप्त वज्रासन को यदि आप नियमित करते हैं तो आपको कब्ज जैसी बीमरियों से भी आजादी मिल जाटी हैं ।
  • सुप्त वज्रासन को करने पर पेट की पेशियों में खिचाव होता हैं जो पेट संबंधी अन्य विकारों से निजाद दिलाता हैं ।(सुबह जल्दी कैसे उठे ? जाने इन 07 बातो को )
  • यदि आपको पीठ में दर्द की शिकायत रहती हैं तो आप सुप्त वज्रासन की नियमितता के जरिये पीठ दर्द को कंट्रोल कर सकते हैं ।
  • पीठ के दर्द के साथ साथ सुप्त वज्रासन के जरिये आप अपने मेरुदंड के दर्द को भी ख़तम कर सकते हैं । 

सुप्त वज्रासन सावधानी ( supta vajrasana precautions )

  • सुप्त वज्रासन में पीछे की ओर लेटते वक्त कमर का ध्यान रखे ।
  • यदि कमर और पीठ का दर्द जयदा हो तो इस आसन से परहेज करें ।
  • जिन्हें पेट में जयदा परेशानी हो वह सुप्त वज्रासन ना करें और अपने चिकित्सक की सलाह ले ।
  • कमर में जयदा तकलीफ होने पर भी सुप्त वज्रासन ना करें, यह आपको परेशानी में दाल सकता हैं ।

सुप्त वज्रासन के नुकसान (Disadvantages of Supta Vajrasana)

सुप्त वज्रासन के नुकसान की बात करें तो, इसके नुकशान ना के बराबर हैं, बस इस आसन को अपनी क्षमता के अनुशार ही करे और ऊपर बताई गयी सभी सावधानियों का ध्यान रखे . 

सुप्त वज्रासन की सावधानी में बताई गयो बतो को ध्यान में रखते हुए इस आसन को करें या  आप एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं. 

इन्हें भी पढ़े:- 

मण्डूकासन कैसे करें, मण्डूकासन फायदे और सावधानिया 

मण्डूकासन मुख्य रूप से पेट से जुडी परेशानियों का हल हैं.आज के समय में हम अपनी सेहत में उतना ध्यान नहीं दे पाते जितना हमें देना चाहिए इसके साथ साथ भार खाने वालो की संख्या भी दिन ब दिन बढती जा रही हैं. और शायद आपकी भी आदत होगी बहार खाने की, और ऐसे में पेट से जुडी समस्या तो आती ही हैं.  मण्डूकासन करने से आप पेट से जुडी समस्यायों से निजाद पा सकते हैं. मण्डूकासन किडनी, लीवर और आंतों की परेशानी से भी छुटकारा दिलाता है।

मण्डूकासन कैसे करें, मण्डूकासन फायदे और सावधानिया | Mandukasana in hindi

आज के इस आर्टिकल में हम मण्डूकासन से जुडी निम्न जानकारियों को जानेंगे-

  • मण्डूकासन की विधि (Method of Mandukasana)
  • मण्डूकासन के फायदे (Benefits of Mandukasana)
  • मण्डूकासन के लिए सावधानी (Precautions for Mandukasana)
  • मण्डूकासन कब करें (When to do Mandukasana)

मण्डूकासन की विधि (Method of Mandukasana):-

  • दरी या कम्बल बिछाकर दोनों पैर फैलाकर बैठें। 
  • वज्रासन की स्थिति में आकर दोनों हाथ पीछे ले जाकर बाएँ हाथ की कलाई को दाएँ हाथ से पकड़ें, श्वास छोड़ते हुए यथाशक्ति सामने झुकें, इस क्रिया को हाथ बदलकर भी करें। 
  • वज्रासन में बैठकर बाएँ हाथ की हथेली को पेट-नाभि पर रखें उसके ऊपर दाहिनी हथेली को रखें, दोनों अँगूठे मिले रहें, श्वास छोड़ते हुए यथा शक्ति सामने झुकें, हाथ बदलकर भी करें। 
  • वज्रासन पर बैठें। फिर दोनों हाथों की मुट्ठियाँ बन्द कर दोनों ठुड्डियों के नीचे लगाएँ, कोहनियों को नाभि के आजू-बाजू रखकर श्वास छोड़ते हुए यथा शक्ति सामने झुकें। श्वास लेते हुए वापस आएँ।

इयरफ़ोन इस्तिमाल करते हैं तो, हो जाओ सावधान - क्लिक करें जानकारी पढ़े 

मण्डूकासन के फायदे (Benefits of Mandukasana):-

मण्डूकासन के फायदे मुख्य रूप से पेट और इसके अन्गो को मिलता हैं, क्योकि मण्डूकासन में पेट पर दबाव दिया जाता हैं. इसके साथ ही मण्डूकासन के प्रमुख फायदे निम्न हैं-

  • इस आसन से पेट के सभी अंगों की अच्छी मालिश होती है। 
  • मण्डूकासन के दौरान फ्रॉग पोज वजन को कंट्रोल करता है।
  • कब्ज और अपच की स्थिति में यह आसन बहुत असरदार है।
  • दमा के मरीजों के लिए मंडूकासन एक आशाजनक उपचार हो सकता है।
  • मण्डूकासन पैंक्रियाज को उत्तेजित कर डायबिटीज को कंट्रोल करने में बहुत मदद करता है।
  • छाड़त हुए यथा शाक्त मन झुका अग्नाशय (पेंक्रियाज) को सक्रियकर मधुमेह में लाभ देता है। 
  • मण्डूकासन करने से वायु विकार, घुटनों का दर्द इन सभी विकारों से छुटकारा मिलता हैं.
  • मण्डूकासन से चेहरे पर रक्त संचार अधिक, चेहरा कांतिमय बनता है। 
  • मण्डूकासन को नियमित रूप से करने पर मन की एकाग्रता बढ़ती है, कुण्डलिनी जागरण में सहायक है। 

मण्डूकासन के लिए सावधानी (Precautions for Mandukasana):-

यदि आप मण्डूकासन करके इसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको इसे नियमित रूप से करनी होगी, साथ ही कुछ मुख्य सावधानियो को ध्यान में रखना होगा ताकि आपको मण्डूकासन (Mandukasanaकरते समय किसी तरह की दिक्कत न हो-

  • मण्डूकासन करते वक्त सबसे पहले वज्रासन में बैठने की स्थिति सही होना चाहिए 
  • ध्यान रखें की नाभि पर मुट्ठी लगाना सही होना चाहिए 
  • आगे की ओर झुकते समय सांसो पर नियंत्रण रखना चाहिए 
  • आगे झुकने पर गर्दन और सर का कोण सही होना चाहिए
  • अगर आपको कमर,पैर और घुटने से जुडी कोई परेशानी हो तो बिना चिकित्सक सलाह के इस आसन को ना करें.(यह भी जाने - फेफड़ो में सुजन क्यों होता हैं )
  • उठते समय सांसो का ध्यान रखना चाहिए यह आसन जल्दी में नहीं करना चाहिए
  • नोट:- गर्भवती महिलाओ को इस आसन को करने से बचने को कहा जाता है.और बिना चिकित्सक सलाह के यह आसन ना करें.

मण्डूकासन कब करें (When to do Mandukasana):-

मण्डूकासन को आप सुबह  (जाने - मॉर्निंग टिप्स )करें तो आपको इसका फायदा ज्यादा जल्दी देखने को मिलेगा. आप सुबह समय न होने की वजह से यदि नहीं कर पाते तो आप शाम को कर सकते हैं. 

पर ऊपर बताई गई सावधानियो को ध्यान में रखें और तभी मण्डूकासन करें.


द्विकोणासन कैसे करे और इसके लाभ क्या हैं? (How to do Dwikonasana and what are its benefits?)

द्विकोणासन (Dwikonasana)

द्विकोणासन (Dwikonasana) स्थिति में शरीर में दो कोणों की स्थिति बनती है। इसलिए इसे "द्विकोणासन (Dwikonasana)" कहते हैं। पैरों के पंजों को मिलाकर कम्बल पर खड़े हो जाइए। द्विकोणासन को करना बहुत ही आसान हैं, क्योकि द्विकोणासन सरल आसनों में से हैं. द्विकोणासन नाम से यह जाहिर हैं की इसमें दो कोणों की स्थिति बनती हैं।

Benefits and Steps of Dwikonasana in Hindi

द्विकोणासन में हम जानेंगे:-

  • द्विकोणासन करने की विधि
  • द्विकोणासन विधि के स्टेप
  • द्विकोणासन के फायदे
  • द्विकोणासन कितने समय तक करें
  • द्विकोणासन करते वक्त सावधानी

द्विकोणासन करने की विधि (method of doing Dwikonasana):-

खड़ी हुई स्थिति में हाथों को पीठ के पीछे ले जाइए। अंगुलियों को आपस में फँसाकर जितना संभव हो सके भुजाओं को ऊपर उठाइए तथा श्वास आगे झुकिए। यथाशक्ति रुकें फिर श्वास भरते हुए सीधे खड़े हो जाइए। इस क्रिया को 5-6 बार करें। 

Benefits and Steps of Dwikonasana in Hindi

द्विकोणासन विधि के स्टेप (Dwikonasana Steps):-

अब चलिए विस्तार से जानते हैं द्विकोणासन के स्टेप को की आप द्विकोणासन कैसे कर सकते. स्टेप को फालो करते हुए ऊपर दिखाए गए चित्र को ध्यान से देखें  और द्विकोणासन को करें साथ ही निचे दिए द्विकोणासन के स्टेप को फालो  करें- 

स्टेप 01 

सीधे खड़े हो जाएं और पैरों के बीच में एक फुट की दूरी रखें। एक गहरी सांस लें और कुछ धीमी सामान्य सांसें लें।

स्टेप 02

थोड़ा आगे झुकें, बाजुओं को पीठ के पीछे फैलाएं। उंगलियों को इंटरलॉक करें।

स्टेप 03

अब सांस छोड़ते हुए कूल्हों से आगे की ओर झुकें और बाजुओं को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। धड़, गर्दन और सिर फर्श के समानांतर होना चाहिए।

स्टेप 04

यह अंतिम स्थिति है। सामान्य रूप से सांस लें। आसन को तब तक बनाए रखें जब तक यह आरामदायक हो। अंतिम स्थिति में, बाहें कंधे के जोड़ों से एक कोण बनाती हैं। इसी तरह कूल्हों से एक और कोण बनता है।

यह भी पढ़े:- कोणासन के लाभ, कोणासन की विधि और सावधानिया

द्विकोणासन के फायदे (Benefits of Dwikonasana):-

  • द्विकोणासन सीना व गर्दन के विकास में सहायक होता है। 
  • बढ़ते बच्चों के लिए लाभप्रद है द्विकोणासन । 
  • रीढ़ तथा कन्धों की माँसपेशियों को मजबूत करता है द्विकोणासन
  • Dwikonasana कंधे के जोड़ों के लचीलेपन में सुधार करता है और ऊपरी बाहों को मजबूत करता है।
  • द्विकोणासन कूल्हों और रीढ़ के जोड़ों को टोन करता है।
  • द्विकोणासन करने से ऊपरी छाती की मांसपेशीय फैलती हैं. और श्वसन प्रणाली के कार्यों में सुधार करता है।
  • ऐसा माना जाता है कि द्विकोणासन में ब्रेस्ट का साइज बढ़ता है।

द्विकोणासन को कितने समय तक करें (How long to do Dwikonasana):-

  • शुरुआती लोगों के लिए अंतिम स्थिति में अवधि तीस सेकंड से एक मिनट तक हो सकती है। 
  • ऐसे में वे चार से पांच राउंड तक जा सकते हैं। 
  • नियमित अभ्यास पर, अधिक समय तक अंतिम स्थिति में रहना आसान होगा, जैसे कि पाँच मिनट।

द्विकोणासन करते वक्त सावधानी (Caution while doing Dwikonasana):-

  • लो बी पी , हाई बी पी, माइग्रेन, जुलाब, गर्दन और पीठ की चोट लगने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • यह आसन करते समय सिरदर्द, चक्कर आना या पीठ दर्द जैसी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए।
  • जिन्हें भी पीठ व कमर की बड़ी समस्या हैं, वह द्विकोणासन से बचे. 

कोणासन (konasana)

अगर आपके मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे रहती है। सारा दिन आपको आलस्य छाया रहता है तो कोणासन (konasana) आपको राहत दिला सकता हैं, आपके पैरों में दर्द भी रहता है. ये सब तकलीफ से छुटकारा पाने के लिए आप कोणासन (konasana) कर सकते है। इसलिए आपको मांसपेशियों को मजबूत बनाना हो या फिर फेफड़ों को स्वस्थ रखना हो, तो कोणासन (konasana) करने से सारी तकलीफे दूर हो जायेगी. चलिए जानते हैं कोणासन (konasana) से जुडी पूरी जानकारी के बारे में.

कोणासन के लाभ, विधि और सावधानिया | Benefits, Method and Precautions of Konasana

कोणासन करने की स्थिति (konasana position):– 

कोणासन करने के लिए दोनों पैर लगभग डेढ़ दो फीट के अन्तर पर फैलाकर या 90 डिग्री का कोण बना कर खड़े हो जाएँ। दोनों टांगों को फैलाएं और बीच में पैर के दोनों पंजों को बाहर की तरफ झुकाएं, यह कोणासन (konasana) करने की स्थिति हैं.

कोणासन कैसे करें (how to do konasana in hindi):– 

श्वास अन्दर भरते हुए निचे झुके और दाएँ हाथ से बाएँ पैर के पंजे का स्पर्श करें तथा बाएँ हाथ को ऊपर उठाकर हथेली को देखें जैसे ऊपर चित्र में दिखाया गया हैं। 

श्वास अन्दर भरते हुए बाएँ हाथ से दाहिने पैर के पंजे का स्पर्श करें तथा दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर दाहिनी हथेली को देखें. जैसे ऊपर चित्र में दिखाया गया हैं। 

कोणासन करने की विधि(method of konasana):-

पहली स्थिति :- सबसे पहले आप सावधान की स्थिति में सीधे खड़े हो जाएं। इस तरह से खड़े हों ताकि आपके दोनों पैरों के बीच दो से ढाई फुट दूरी रह सके.

दूसरी स्थिति :- फिर अपनी कमर को धीरे-धीरे बाईं ओर झुकाकर बाएं हाथ की उंगलियों से बाएं पैर के पंजों को छुएं और दाएं हाथों को बिल्कुल सीधा सिर के पास कनपटियों से लगाकर सिर की सीध में रखें.

कोणासन कितने समय करें (how long to do konasana):-

कोणासन (konasana) आप सुबह या शाम दोनों में से किसी भी समय कर सकते हैं. पर ध्यान रहे की कोणासन (konasana)  सैदव खाली पेट करें.कोणासन(konasana) कम से कम  समय 5 से 10 बार करें। 

कोणासन के लाभ (Konasana Benefitsi in Hindi)

  • कमर, पसलियों और साइटिका का दर्द दूर होता है। 
  • फेफड़े पुष्ट, कमर पतली और शरीर हल्का होता है। 
  • इसके नियमित अभ्यास से चेहरे पर तेज आता है एवं शरीर पुष्ट हो जाता है।
  • इससे मन की एकाग्रता प्राप्त होती है
  • मानसिक तनावों से मुक्ति मिलती है। 
  • वीर्य की ऊर्ध्वमुखी हो जाती है। 
  • शरीर सदैव स्वस्थ रहता है।
  • हाथ, पैर और धड़ के सभी भागों में सुदृढ़ता।
  • रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
  • कब्ज़ में राहत मिलती है। पीठ के दर्द से निजाद

कोणासन करते वक्त सावधानी (Caution while doing konasana):-

  • कोणासन तभी करे जब पेट खाली हो, खाना खाने के बाद कोणासन ना करें.
  • यदि आपको पीठ व कमर की समस्या हैं तो कोणासन ना करें.
  • जिन्हें स्पॉंदिलाइटिस (रीड की हड्डिया जयदा प्रभावित)  की समस्या हो वह कोणासन ना करें.

अगर आपको कोणासन(konasana)  से जुडी यह सभी जानकारिया सही और उपयोगी लगी हो तो अपने और भी दोस्तों, अपने भाइयो और परिवार वालो तक इस कोणासन(konasana)की जानकारी को उन्हें शेयर करें और उन्क्की मदद करें.  

आसन क्या हैं और आसन के फ़ायदे ?

आसन शरीर की एक स्थिति हैं, जब हम शरीर की एक स्थिति में लम्बी अवधि तक बिना किसी तनाव के बिना किसी शारीरिक कष्ट के सुखपूर्वक रह सकते हैं तब वह स्थिति आसन कहलाती हैं।

  • आसन की जानकारी मे हम जानेंगे-
  • आसन क्या हैं?
  • आसन की परिभाषा 
  • आसनों को कितने भागो में बात गया हैं
  • आसनों का मुख्य उद्देश्य क्या हैं? 
  • आसन के लाभ क्या-क्या हैं ? 

योग शास्त्रों में परम्परा के अनुसार चौरासी लाख आसन हैं। अर्थात् पृथ्वी में जितने जीव जंतु हैं उतने ही प्रकार के आसन हैं लेकिन सभी चौरासी लाख आसनों को आज कोई नहीं जानता इसलिए चौरासी आसनों को ही प्रमुख माना गया हैं। शुद्धिकरण के बाद आसनों का अभ्यास शारीरिक स्थिरता एवं दृढ़ता के लिए किया जाता हैं। 

आसन क्या हैं | आसन के मुख्य फ़ायदे और उद्द्देश्य | Benefits of asanas in hindi

योग सूत्रों मे आसन की परिभाषा - "स्थिरसुखमासनम्"हैं ।

जिस शारीरिक स्थिति में आप स्थिर रह सकें और सुख का अनुभव करें, वह आसन हैं। 

आसनों को कितने भागो में बात गया हैं ?

आसनों को सिखाने के आधार पर दो भागों में बाँटा गया हैं।

01.गतिशील आसन  02. स्थिर आसन

गतिशील आसनों से शरीर को नियन्त्रण में लाने और लचीला बनाने का अभ्यास करते हैं। और बाद में अपनी क्षमतानुसार स्थिर आसनों का अभ्यास करते हैं। आसनों का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाना हैं और शरीर स्वस्थ सुन्दर बनाना हैं।

आसनों का मुख्य उद्देश्य क्या हैं? 

वैसे देखा जाय तो हमारे द्वारा किये जाने वाला प्रत्येक आसन हमारे शरीर को कही न कही लाभ पहुचाता हैं, साथ ही आसन के कई उद्देश्य होते हैं जिनमे से कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्न हैं-  

  1. आसनों का मुख्य उद्देश्य शारीरिक तथा मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाना हैं। 
  2. आसन से शरीर के जोड़ लचीले बनते हैं। इनसे शरीर की माँसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता हैं.
  3. आसन से शरीर स्वस्थ होती हैं तथा शरीर के विशाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की क्रिया संपन्न होती हैं। 
  4. आसन से शरीर के आंतरिक अंगों की मालिश होती हैं जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती हैं। 
  5. आसन शरीर के महत्वपूर्ण अंगो को लचीले रखते हैं। आसनों का सीधा प्रभाव शरीर की नस-नाड़ियों के अतिरिक्त सुक्ष्म कशेरुकाओं पर भी पड़ता हैं। 
  6. आसनों के अभ्यास से आकुंचन और प्रकुंचन द्वारा शरीर के विकार हट जाते हैं। 
  7. आसन से शारीरिक संतुलन के साथ-साथ भावनात्मक संतुलन की प्राप्ति होती हैं।

आसन के लाभ क्या-क्या हैं ? 

आसन के लाभ की बात करें तो, आसन के फायदों की गिनती नहीं की जा सकती यह हमारे शरीर को बाह्य प्रभावों होने वाले बीमारियों से बचाने के साथ-साथ यह हमें फीट रहने में भी मदद करता हैं. आइये देखते हैं आसन के कुछ खास फायदों को-

01. एकाग्रता व्यक्ति में सुधार – 

आसन करने के प्रमुख लाभ में हमारी एकाग्रता सबसे अहम् हैं, क्योकि जो भी क्रियाकलाप हम अपनी दिनचर्या में करते हैं उसमें एकाग्रता बनाए रखने में आसन हमारी मदद करता हैं, चाहे आप एक विद्यार्थी हैं,एक व्यापारी या एक जॉब करने वाले.

02 . शरीर मुद्रा में सुधार- 

हमारे बात करने का तरिका, हमारे चलने का अंदाज और इसके साथ ही हम खड़े कैसे होते हैं, ये सभी क्रिया हमारे शाररिक मुद्रा में आता हैं. आसन करने से हमें अपने शाररिक मुद्रा को शुधारने का मौका मिलता हैं. 

03 . लचक में सुधार होना – 

हमारे शरीर में लचकपन का होना बहुत जरूरी हैं. क्योकि हमें अपने दिनचर्या में  न जाने कितने सरे उतार चढ़ाव से भरे काम करने पड़ते हैं और ऐसे में यदि हमारे शरीर में लचक हो तो यह हमें कई तरह के चोटों से बचाता हैं.

04 . थकान से मुक्ति – 

हमारा शरीर के मशीन की तरह कार्य करता हैं और मशीन एक समय के बाद कार्य करना कम कर देता हैं और साथ ही उसकी क्षमता भी कम हो जाती हैं. ऐसे में यदि आप आसन करते हैं तो यह आपके शरीर में अलग ही ऊर्जा का संचार करता हैं और आपका स्टेमिना बना रहता हैं. जिससे आप थकान से कोसो दूर रहते हैं. 

05. ह्रदय एवं फेफड़ो को फायदा- 

हमारे शरीर के दो मुख्य कार्यकारी अंग ह्रदय और फेफड़ा इनका स्वास्थ रहना आपको हमेसा तंदरुस्त दिखाता हैं. क्योकि हमारे शरीर में होने वाले जायदातर क्रियाये इन्ही दो अंगो से संपन्न होती हैं और साथ ही एक उम्र के आते आते अधिकतर लोगो को इन्ही दो अंगो से सम्बंधित रोग घेर लेते हैं.

तो हमने आपको आज के इस आर्टिकल में आसन क्या हैं, आसन के उद्देश्य और साथ ही आसन के कुछ महत्वपूर्ण फायदों को जाना, हम उम्मीद करते हैं की यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो और आसन के बारें में इतनी जानकारी आसन के इतने फायदों के बारें में जान कर आप भी अपने जीवन में आसन को लायेंगे. “ धन्यवाद” 


योग से रहे निरोग 

योग के फ़ायदे:-  हजारो सालों से विकिसित हो रहे योग और योग के फ़ायदे को आज पुरे विश्व ने पहचान लिया. जहां एक ओर शारीरिक विकास के लिए व्यायाम ज़रूरी हैं, अंदरूनी अंगों के सही सही कार्य सञ्चालन में योग और योगासनों का बहुत ही योगदान हैं अगर आप अन्दर से स्वास्थ्य रहना चाहते हैं तो योग करे और साथ ही योग के फ़ायदे को जाने.

योग से रहे निरोग | योग करने से होते है कई फ़ायदे | benefits of yoga

सुबह  उठकर करें योग:-

योग के फ़ायदे के लिए योगासन हेतु सर्वोत्तम हैं सुबह सुबह योगासन करने से शरीर को दिन भर चलने की उर्जा मिलती हैं. 

हमारे शरीर में हो रहे सभी अंदरूनी क्रियाओं के सफल सञ्चालन में योगासन का बहुत योगदान होता हैं. आज जब सारा विश्व योग के महत्त्व को समझता है और उसका लाभ ले रहा हैं, हमारे देश में ही उसको मानने वालों की कमी हैं. 

आप अगर शतायु(लम्बे समय तक स्वस्थ जीवन बिताना चाहते है तो ) आज ही योग को अपने दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना ले सूर्य नमस्कार से करे शुरुआत सूर्यनमस्कार १२ तरह के योगासनों का समूह हैं. इसे रोज़ सुबह करे.

यह भी पढ़े - आलस को दूर कैसे करें 

 सुबह-सुबह करे ये योगासन:-

  • अनुलोम विलोम
  • कपाल भाती
  • मयूरासन
  • सर्वांगासन
  • हलासन
  • धनुरासन
  • नौकासन

और सबसे महत्वपूर्ण हैं प्राणायाम प्राणायाम प्र का योग हैं. आप पुरे निष्ठां से प्रतिदिन प्राणायाम करे. ऐसा माना जाता हैं की प्राणायाम से आदमी दीर्घायु होता हैं और जो भी सौ साल तक जीता हैं वो नियमित रूप से प्राणायाम ज़रूर करता है. 

  • योगासन और प्रणायाम करते समय इन बातों को ध्यान में रखें:-
  • योगासन करते वक्त पेट को खाली रखें. 
  • योगासन के दौरान आप नियमित रूप से सांस लेते रहे.
  • यदि आपकी सांस तेज़ चलेगी तो योग का पूरा लाभ नहीं मिलेगा.
  • योगासन के लिए ढीले और आरामदे कपडे पहने, आपके कपडे आपके शरीर को किसी तरह जकड़ने नहीं चाहिए. 
  • योग के दौरान आपके शरीर के अंगो को आसानी से मूवमेंट होना चाहिए वरना आपको नुकशान उठाना पढ़ सकता हैं.

योग से लाभ कब मिलता हैं ?

योग का लाभ एक दिन आसन करने से नहीं आएगा, आप जो भी योगासन करते हो उसे लम्बे समय तक जारी रखे तब जा कर कई सालो के अनवरत योगासन से ही आपके शरीर को योग का सही लाभ मिलेगा. 

कुछ आसन आपके लिए कठिन हो सकते हैं. दोस्तों आप कभी अपने क्षमता से बाहर का आसन करने की कोशिश करे पर बहुत ज्यादा जोर ना दे. 

कही ऐसा न हो की लेने के देने पड़ जाए, किसी दुसरे से तुलना न करे, हर आदमी की अपनी शारीर बनावट होती हैं और कितने दिनों का अभ्यास है ये भी मायने रखता हैं. आप धीरे धीरे प्रयास करे और जो हो सकता हैं उतना ही योग करे इसके साथ ही याद रखे की योगासन के तुरंत बाद पानी नहीं पिए ये नुकसान देय हो सकता हैं कुछ बीमारियों में कुछ खास आसन की मनाही हैं, आप को अपने डॉक्टर से सलाह ले कर ही आसन करना चाहिए.

लम्बे समय तक योगासन करने के फायदे:-

  • लम्बे समय तक रोज़ योगासन करने से ही योगासन का सही फल मिलता हैं. 
  • आप खुद को अपने उम्र से जवान और फुर्तीला रख सकते हैं. 
  • योग से नियम संयम भी जागृत होता हैं. 
  • नियमित रूप से योगासन करने वाला व्यक्ति सद्चरित मृदुभाषी, समय का पाबंद, मददगार और विनम्र होता हैं, उसमे साहस, धैर्य, शीलता और निडरता आती हैं.
  • रोजाना नियमित रूप से योगासन करने वाले व्यक्ति का शरीर हर मौशम में आने वाली शाररिक परेशानियों से निपटने के लिए तैयार रहता है.
  • योगासन और प्रणायाम हमारे शारीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है.

तो दोस्तों योग के फ़ायदे जानने के बाद अब आपको भी योगासन और प्रणायाम को अपनी जीवन में लाना होगा. ऊपर बताये गए योग के फ़ायदे आप भी ले सकते है और हमेशा फीट और तंदरुस्त राह सकते हैं.

योग और व्यायाम के फायदे | Vyayam ke Fayde

दोस्तों योग और व्यायाम के फायदे लगभग सभी को पता तो होती है। हम योग और व्यायाम के फायदे को कभी सिरियस नही लेते लेकिन यदि आपको लम्बे समय तक सुखी जीवन जिनी है तो आपको इसके योग और व्यायाम के फायदे जानने भी होंगे और इसे अपनाना भी होगा चाहे आप किसी ऑफिस में काम करते हैं या फिर आप एक विद्यार्थी है स्वस्थ रहना सभी के जीवन के लिए लाभदायक है। इसलिए आज हम आपको आज इस आर्टिकल में योग और व्यायाम के फायदे (Benefits of yoga and exercise) बताने जा रहे है –

Benefits of yoga and exercise

योग और व्यायाम से क्या लाभ होता हैं?

रूप रेखा (Vyayam ke fayde) -

  • सुबह की बेहतर शुरुआत 
  • मन की शांति  
  • स्वस्थ शरीर 
  • अस्पताल के खर्चे  
  • जीवन में अनुशासन 

1. सुबह की बेहतर शुरुआत :– 

दोस्तों कहा जाता है की “दिन की शुरुआत यदि अछि हो तो सब अच्छा ही जाता है ” यदि आप सुबह सुबह योग और व्यायाम करते हैं तो आपके अंदर एक अलग ही ताजगी ऊर्जा का संचार होता साथ ही साथ आपको अपने अन्दर की शक्तियों को जानने का मौका मिलता हैं और आप अपने सभी कामों को बेहतर तरीके से कर पाते है .

2. मन की शांति :- 

आज के इस भाग दौड़ भरी दिनचर्या में मन की शांति जैसे कही खी सी जाती है. हर तरफ बस गाडियों की आवाज कही लाऊड स्पीकर का शोर तो कही और कुछ ऐसी चीजे कभी आपके मन को शांत नहीं कर पाती है तो ऐसे में यदि आप सुबह उठ कर योग और व्यायाम करते है तो यकीनन आपको मन की शांति जरूर मिलेगी.

3. स्वस्थ शरीर :–

 देखा जाय तो हमारा शारीर एक मशीन की तरह काम करता है. इसे जितना जयदा सही रखा जाय तो यह उतना ही ज्यादा अच्छा और लंबा चलता है. और आज के इस प्रदूषित वातावरण में स्वस्थ शरीर सबको नसीब नहीं होती लेकिन..यदि आप निरोगी शरीर  पाना चाहते हैं तो आपको योग और व्यायाम को आज ही जीवन में लाना होगा. (इसे पढ़े - खाने से जुड़े रोचक बातें?)

इसे भी पढ़े:- कोणासन के लाभ, विधि और सावधानी 

4. अस्पताल के खर्चे :– 

आज कल शायद ही कोई ऐसा अस्पताल होगा झा मरी जो की कमी हो. और इसकी सबसे मुख्य वजह हैं लोगो का फीट न रहना, अपनी सेहत को प्राथमिकता न देना जिसका भुगतान उन्हें अस्पतालों में भरना पड़ता है. तो कोशिश करे की अपने आपको फीट रखने की और इसमें योग और व्यायाम आपकी हमेशा मदद करता हैं.

5. जीवन में अनुशासन :- 

दोस्तों अनुशासन हमारे जीवन का हिस्सा हैं. हमें बचपन से बताया और सिखाया जाता हैं की क्या करें और क्या ना करें पर समय के साथ-साथ हमें रोकने और समझाने वालों की संख्या में कमी आने लगती हैं और अपनी जीवन में हमें स्वयं अनुशासित रहना पड़ता हैं योग और व्यायाम आपके जीवन में अनुशासन को भरता है जिसका लाभ आपको आजीवन मिलता हैं.

तो दोस्तों आज कि इस आर्टिकल में हमने आपको योग और व्यायाम के फायदों को बताने की कोशिस की है। उम्मीद करते है की आपको यह जानकारी समझ में आयी होगी और आपको कुछ जानने को मिला होगा – “ धन्यवाद ”

क्या आप इनके बारे में जानते हैं :-