मण्डूकासन कैसे करें, मण्डूकासन फायदे और सावधानिया
मण्डूकासन मुख्य रूप से पेट से जुडी परेशानियों का हल हैं.आज के समय में हम अपनी सेहत में उतना ध्यान नहीं दे पाते जितना हमें देना चाहिए इसके साथ साथ भार खाने वालो की संख्या भी दिन ब दिन बढती जा रही हैं. और शायद आपकी भी आदत होगी बहार खाने की, और ऐसे में पेट से जुडी समस्या तो आती ही हैं. मण्डूकासन करने से आप पेट से जुडी समस्यायों से निजाद पा सकते हैं. मण्डूकासन किडनी, लीवर और आंतों की परेशानी से भी छुटकारा दिलाता है।
आज के इस आर्टिकल में हम मण्डूकासन से जुडी निम्न जानकारियों को जानेंगे-
- मण्डूकासन की विधि (Method of Mandukasana)
- मण्डूकासन के फायदे (Benefits of Mandukasana)
- मण्डूकासन के लिए सावधानी (Precautions for Mandukasana)
- मण्डूकासन कब करें (When to do Mandukasana)
मण्डूकासन की विधि (Method of Mandukasana):-
- दरी या कम्बल बिछाकर दोनों पैर फैलाकर बैठें।
- वज्रासन की स्थिति में आकर दोनों हाथ पीछे ले जाकर बाएँ हाथ की कलाई को दाएँ हाथ से पकड़ें, श्वास छोड़ते हुए यथाशक्ति सामने झुकें, इस क्रिया को हाथ बदलकर भी करें।
- वज्रासन में बैठकर बाएँ हाथ की हथेली को पेट-नाभि पर रखें उसके ऊपर दाहिनी हथेली को रखें, दोनों अँगूठे मिले रहें, श्वास छोड़ते हुए यथा शक्ति सामने झुकें, हाथ बदलकर भी करें।
- वज्रासन पर बैठें। फिर दोनों हाथों की मुट्ठियाँ बन्द कर दोनों ठुड्डियों के नीचे लगाएँ, कोहनियों को नाभि के आजू-बाजू रखकर श्वास छोड़ते हुए यथा शक्ति सामने झुकें। श्वास लेते हुए वापस आएँ।
मण्डूकासन के फायदे (Benefits of Mandukasana):-
मण्डूकासन के फायदे मुख्य रूप से पेट और इसके अन्गो को मिलता हैं, क्योकि मण्डूकासन में पेट पर दबाव दिया जाता हैं. इसके साथ ही मण्डूकासन के प्रमुख फायदे निम्न हैं-
- इस आसन से पेट के सभी अंगों की अच्छी मालिश होती है।
- मण्डूकासन के दौरान फ्रॉग पोज वजन को कंट्रोल करता है।
- कब्ज और अपच की स्थिति में यह आसन बहुत असरदार है।
- दमा के मरीजों के लिए मंडूकासन एक आशाजनक उपचार हो सकता है।
- मण्डूकासन पैंक्रियाज को उत्तेजित कर डायबिटीज को कंट्रोल करने में बहुत मदद करता है।
- छाड़त हुए यथा शाक्त मन झुका अग्नाशय (पेंक्रियाज) को सक्रियकर मधुमेह में लाभ देता है।
- मण्डूकासन करने से वायु विकार, घुटनों का दर्द इन सभी विकारों से छुटकारा मिलता हैं.
- मण्डूकासन से चेहरे पर रक्त संचार अधिक, चेहरा कांतिमय बनता है।
- मण्डूकासन को नियमित रूप से करने पर मन की एकाग्रता बढ़ती है, कुण्डलिनी जागरण में सहायक है।
मण्डूकासन के लिए सावधानी (Precautions for Mandukasana):-
यदि आप मण्डूकासन करके इसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको इसे नियमित रूप से करनी होगी, साथ ही कुछ मुख्य सावधानियो को ध्यान में रखना होगा ताकि आपको मण्डूकासन (Mandukasana) करते समय किसी तरह की दिक्कत न हो-
- मण्डूकासन करते वक्त सबसे पहले वज्रासन में बैठने की स्थिति सही होना चाहिए
- ध्यान रखें की नाभि पर मुट्ठी लगाना सही होना चाहिए
- आगे की ओर झुकते समय सांसो पर नियंत्रण रखना चाहिए
- आगे झुकने पर गर्दन और सर का कोण सही होना चाहिए
- अगर आपको कमर,पैर और घुटने से जुडी कोई परेशानी हो तो बिना चिकित्सक सलाह के इस आसन को ना करें.(यह भी जाने - फेफड़ो में सुजन क्यों होता हैं )
- उठते समय सांसो का ध्यान रखना चाहिए यह आसन जल्दी में नहीं करना चाहिए
- नोट:- गर्भवती महिलाओ को इस आसन को करने से बचने को कहा जाता है.और बिना चिकित्सक सलाह के यह आसन ना करें.
मण्डूकासन कब करें (When to do Mandukasana):-
मण्डूकासन को आप सुबह (जाने - मॉर्निंग टिप्स )करें तो आपको इसका फायदा ज्यादा जल्दी देखने को मिलेगा. आप सुबह समय न होने की वजह से यदि नहीं कर पाते तो आप शाम को कर सकते हैं.
पर ऊपर बताई गई सावधानियो को ध्यान में रखें और तभी मण्डूकासन करें.

