द्विकोणासन कैसे करे और इसके लाभ क्या हैं? (How to do Dwikonasana and what are its benefits?)
द्विकोणासन (Dwikonasana)
द्विकोणासन (Dwikonasana) स्थिति में शरीर में दो कोणों की स्थिति बनती है। इसलिए इसे "द्विकोणासन (Dwikonasana)" कहते हैं। पैरों के पंजों को मिलाकर कम्बल पर खड़े हो जाइए। द्विकोणासन को करना बहुत ही आसान हैं, क्योकि द्विकोणासन सरल आसनों में से हैं. द्विकोणासन नाम से यह जाहिर हैं की इसमें दो कोणों की स्थिति बनती हैं।
द्विकोणासन में हम जानेंगे:-
- द्विकोणासन करने की विधि
- द्विकोणासन विधि के स्टेप
- द्विकोणासन के फायदे
- द्विकोणासन कितने समय तक करें
- द्विकोणासन करते वक्त सावधानी
द्विकोणासन करने की विधि (method of doing Dwikonasana):-
खड़ी हुई स्थिति में हाथों को पीठ के पीछे ले जाइए। अंगुलियों को आपस में फँसाकर जितना संभव हो सके भुजाओं को ऊपर उठाइए तथा श्वास आगे झुकिए। यथाशक्ति रुकें फिर श्वास भरते हुए सीधे खड़े हो जाइए। इस क्रिया को 5-6 बार करें।
Benefits and Steps of Dwikonasana in Hindi
द्विकोणासन विधि के स्टेप (Dwikonasana Steps):-
अब चलिए विस्तार से जानते हैं द्विकोणासन के स्टेप को की आप द्विकोणासन कैसे कर सकते. स्टेप को फालो करते हुए ऊपर दिखाए गए चित्र को ध्यान से देखें और द्विकोणासन को करें साथ ही निचे दिए द्विकोणासन के स्टेप को फालो करें-
स्टेप 01
सीधे खड़े हो जाएं और पैरों के बीच में एक फुट की दूरी रखें। एक गहरी सांस लें और कुछ धीमी सामान्य सांसें लें।
स्टेप 02
थोड़ा आगे झुकें, बाजुओं को पीठ के पीछे फैलाएं। उंगलियों को इंटरलॉक करें।
स्टेप 03
अब सांस छोड़ते हुए कूल्हों से आगे की ओर झुकें और बाजुओं को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। धड़, गर्दन और सिर फर्श के समानांतर होना चाहिए।
स्टेप 04
यह अंतिम स्थिति है। सामान्य रूप से सांस लें। आसन को तब तक बनाए रखें जब तक यह आरामदायक हो। अंतिम स्थिति में, बाहें कंधे के जोड़ों से एक कोण बनाती हैं। इसी तरह कूल्हों से एक और कोण बनता है।
यह भी पढ़े:- कोणासन के लाभ, कोणासन की विधि और सावधानिया
द्विकोणासन के फायदे (Benefits of Dwikonasana):-
- द्विकोणासन सीना व गर्दन के विकास में सहायक होता है।
- बढ़ते बच्चों के लिए लाभप्रद है द्विकोणासन ।
- रीढ़ तथा कन्धों की माँसपेशियों को मजबूत करता है द्विकोणासन ।
- Dwikonasana कंधे के जोड़ों के लचीलेपन में सुधार करता है और ऊपरी बाहों को मजबूत करता है।
- द्विकोणासन कूल्हों और रीढ़ के जोड़ों को टोन करता है।
- द्विकोणासन करने से ऊपरी छाती की मांसपेशीय फैलती हैं. और श्वसन प्रणाली के कार्यों में सुधार करता है।
- ऐसा माना जाता है कि द्विकोणासन में ब्रेस्ट का साइज बढ़ता है।
द्विकोणासन को कितने समय तक करें (How long to do Dwikonasana):-
- शुरुआती लोगों के लिए अंतिम स्थिति में अवधि तीस सेकंड से एक मिनट तक हो सकती है।
- ऐसे में वे चार से पांच राउंड तक जा सकते हैं।
- नियमित अभ्यास पर, अधिक समय तक अंतिम स्थिति में रहना आसान होगा, जैसे कि पाँच मिनट।
द्विकोणासन करते वक्त सावधानी (Caution while doing Dwikonasana):-
- लो बी पी , हाई बी पी, माइग्रेन, जुलाब, गर्दन और पीठ की चोट लगने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
- यह आसन करते समय सिरदर्द, चक्कर आना या पीठ दर्द जैसी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए।
- जिन्हें भी पीठ व कमर की बड़ी समस्या हैं, वह द्विकोणासन से बचे.

