सुप्त वज्रासन (Supta Vajrasana)
(What is Supta Vajrasana )- सुप्त वज्रासन नाम से ही आप सुप्त वज्रासन का अर्थ समझ गए होंगे, सुप्त का अर्थ होता हैं सोये हुए और वज्रासन एक आसन हैं, सुप्त वज्रासन में हम वज्रासन में बैठ कर पीछे की ओर सोते हैं, यदि आप सुप्त वज्रासन को नियमित करते हैं तो आपको इससे कई तरह के लाभ देखने को मिलेंगे.
सुप्त वज्रासन के प्रमुख लाभ में कमर दर्द, कब्ज, सांस रोग, रक्त संचार, पेट की चर्बी, मासिक धर्म, पतली कमर इत्यादि इन सभी में लाभ मिलता हैं.
सुप्त वज्रासन की जानकारी में हम निम्न को जानेंगे-
- सुप्त वज्रासन करने की विधि
- सुप्त वज्रासन को कितने समय तक करें?
- सुप्त वज्रासन के फायदे क्या हैं?
- सुप्त वज्रासन सावधानी ?
- सुप्त वज्रासन के नुकसान ?
सुप्त वज्रासन करने की विधि (How to do Supta Vajrasana)
- वज्रासन में बैठकर हाथों को पार्श्व भाग में रखकर उनकी सहायता से शरीर को पीछे झुकाते हुए भूमि पर सिर टिका दीजिए।
- घुटने मिले हुए हों तथा भूमि पर टिके हुए हों। इस अवस्था में अपने हिसाब से व्यवस्था बनाए रखें
- धीरे-धीरे कन्धों, ग्रीवा एवं पीठ को भी भूमि पर टिकाने का प्रयत्न कीजिए।
- हाथों को जंघाओं पर सीधा रखें।(यह भी जाने - गलत खान-पान से होती हैं ये तीन बड़ी बिमारी )
- इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस ले और सांस छोड़े ।
- आसन को छोड़ते समय कोहनियों एवं हाथों का सहारा लेते हुए वज्रासन में बैठ जाएँ।
सुप्त वज्रासन को कितने समय तक करें? (Supta Vajrasana time limit)
सुप्त वज्रासन (Supta Vajrasana) को सामान्यता 3 से 4 चक्र ही करें और यह फायदे मंद हो सकता हैं, सुप्त वज्रासन को आप अपने सहोलियत के अनुशार करें समय की बात करें तो आप सुप्त वज्रासन को 10 से 15 तक कर सकते हैं.
सुप्त वज्रासन के फायदे (Supta Vajrasana benefits in Hindi)
- नाभि का टलना दूर करता है, गुर्दो के लिए भी लाभकारी है।
- इस आसन से पेट के नीचे वाला भाग खींचता है, जिससे बड़ी आँत सक्रिय होने से कोष्ठ-बद्धता मिटती है।
- सुप्त वज्रासन को यदि आप नियमित करते हैं तो आपको कब्ज जैसी बीमरियों से भी आजादी मिल जाटी हैं ।
- सुप्त वज्रासन को करने पर पेट की पेशियों में खिचाव होता हैं जो पेट संबंधी अन्य विकारों से निजाद दिलाता हैं ।(सुबह जल्दी कैसे उठे ? जाने इन 07 बातो को )
- यदि आपको पीठ में दर्द की शिकायत रहती हैं तो आप सुप्त वज्रासन की नियमितता के जरिये पीठ दर्द को कंट्रोल कर सकते हैं ।
- पीठ के दर्द के साथ साथ सुप्त वज्रासन के जरिये आप अपने मेरुदंड के दर्द को भी ख़तम कर सकते हैं ।
सुप्त वज्रासन सावधानी ( supta vajrasana precautions )
- सुप्त वज्रासन में पीछे की ओर लेटते वक्त कमर का ध्यान रखे ।
- यदि कमर और पीठ का दर्द जयदा हो तो इस आसन से परहेज करें ।
- जिन्हें पेट में जयदा परेशानी हो वह सुप्त वज्रासन ना करें और अपने चिकित्सक की सलाह ले ।
- कमर में जयदा तकलीफ होने पर भी सुप्त वज्रासन ना करें, यह आपको परेशानी में दाल सकता हैं ।
सुप्त वज्रासन के नुकसान (Disadvantages of Supta Vajrasana)
सुप्त वज्रासन के नुकसान की बात करें तो, इसके नुकशान ना के बराबर हैं, बस इस आसन को अपनी क्षमता के अनुशार ही करे और ऊपर बताई गयी सभी सावधानियों का ध्यान रखे .
सुप्त वज्रासन की सावधानी में बताई गयो बतो को ध्यान में रखते हुए इस आसन को करें या आप एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं.
