एनोरेक्सिया क्या हैं ?
एनोरेक्सिया को सामान्यतः पर्याय आरोचक, अंग्रेजी में एनोरेक्सिया तथा सामान्य बोलचाल में खाना खाने की रुचि न होना कहा जाता है यदि किसी व्यक्ति को खाना खाने में रूचि नहीं आती तो वह एनोरेक्सिया के लक्षण माने जाते है.
रूप रेखा :-
- एनोरेक्सिया क्या हैं ?
- एनोरेक्सिया के मुख्य कारण
- एनोरेक्सिया के मानसिक कारण
- एनोरेक्सिया के प्रमुख लक्षण
- एनोरेक्सिया की पहचान
- एनोरेक्सिया के लिए सहायक चिकित्सा
एनोरेक्सिया के मुख्य कारण(Main causes of anorexia)-
एनोरेक्सिया के शारीरिक कारण(Physical cause):-
- ज्वर, कब्ज, निमोनिया, चेचक, खसरा, मलेरिया आदि संक्रामक ज्वर ।
- आँत तथा आमाशय (आमाशयिक कलाशोथ, आमाशय कैंसर, आमाशयिक उपाम्लता) के विभिन्न रोग ।
- यक्ष्मा (T.B) तथा अन्य चिरकारी रोगों में रोगी को प्राय: अरुचि हो जाती है। → कुछ मरीजों में लम्बे समय तक बिस्तर पर रहना होता है; जैसे- हार्ट अटैक, कूल्हे की हड्डी का हट जाना आदि। इनसे प्रायः अरुचि हो जाती है।
एनोरेक्सिया के मानसिक कारण(Mental reasons)-
- शोक, भय, अतिलोभ, क्रोध एवं गंध के सेवन से भोजन में अरुचि हो जाती है।
- हिस्टीरिया, अनिद्रा तथा अन्य मानसिक स्थितियों में भी भूख लगना प्रायः बंद हो जाती है।
- अधिक चिंता एवं तनाव (Tension) से भी सूख लगना अक्सर कम हो जाता है।
- आमांश का अधिक मात्रा में संचय (कॉन्स्टीपेशन) के परिणामस्वरूप भोजन में अरुचि होती है।
- शरीर में 'वर्म्स' की उपस्थिति भी अरुचि का प्रधान कारण है। • विटामिन 'बी' कॉम्पलेक्स की कमी से भी भूख कम हो जाती है।
एनोरेक्सिया के लिए याद रखिए :-
• अधिक पौष्टिक आहार लेने तथा सारे दिन कार्य न करने से भी अरुचि हो जाती है।
• एडीसंस, मिक्सीडीमा आदि ऐसे रोग हैं, जिनमें शरीर के अंतर्गत सम्पादित होने वाली चयापचयी क्रियाएँ बहुत मंद हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप अरुचि हो जाती है।
एनोरेक्सिया के प्रमुख लक्षण(Major symptoms of anorexia)-
- रोगी को खाने में कोई रुचि नहीं रहती। यदि वह खाने बैठ भी जाए तो 2-4 कौर अथवा 1-2 रोटी
- खाकर उठ बैठता है और आगे खाने की अनिच्छा प्रकट करता है। मुँह का स्वाद कसैला, छाती में शूल (दर्द) एवं पीड़ा होती है।
- थोड़ा खाने के बाद पेट भरा सा प्रतीत होता है।
- रोगी को खट्टी-खट्टी या सूखी डकारें आती हैं।
- पेट भारी मालूम पड़ता है और मुँह में पानी-सा भर आता है।
- रोगी को अल्प श्रम से ही थकावट महसूस होती है।
- चेहरा मलिन एवं खुष्क। किसी कार्य को न करने की इच्छा नहीं होती।
- मुख में उष्णता एवं दुर्गंध की उपस्थिति।
- हृदय के समीप अतिशय दाह एवं प्यास की अधिकता।
- आहार के गले से नीचे उतरने में असमर्थता
- शरीर भार में पर्याप्त कमी।
- दीर्घकालिक रोगी अनीमिक (रक्त की कमी) हो जाता है।
एनोरेक्सिया की पहचान(Identification of anorexia)-
खाना न खाना खाने के प्रति इच्छा न होना, भार में कमी, मलावरोध, बेचैनी आदि लक्षणों से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।
एनोरेक्सिया के परिणाम(Consequences of anorexia)
रोग के अधिक समय तक चलते रहने और उचित चिकित्सा न करने से शरीर की रस, रक्त, मांस आदि धातुएँ सूखने लगती हैं और उसका भार अत्यधिक गिर जाता है।
एनोरेक्सिया के लिए सहायक चिकित्सा(Adjuvant therapy for anorexia)
- विविध प्रकार के लेह, चटनी, रायता, अचार आदि रुचिकर पदार्थ खाने को दें।
- लघु सुपाच्य, मन पसंद पथ्य दें।
- गेहूँ अगहनी-चावल, मूँग, पतली मूली, बैंगन, केल पपीता, अंगूर, आम, घी, लहसुन, 3.सिरका, गौ दुग्ध, दही, मट्ठा अदरख, काला नमक, स्वच्छ सौम्य एवं शांत वातावरण ये सब पथ्य हैं।
- आमाशय एवं मल के शोधन के लिए कैस्टर ऑयल दें। प्रत्येक अवस्था में कृमिनाशक औषधि अवश्य दें।
तो दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आपको एनोरेक्सिया क्या हैं ?एनोरेक्सिया के मुख्य कारण एनोरेक्सिया के मानसिक कारण एनोरेक्सिया के प्रमुख लक्षण और एनोरेक्सिया की पहचान क साथ साथ एनोरेक्सिया के लिए सहायक चिकित्सा के बारे में जानकारी देने की कोशिस किया.

