25 की उम्र के बाद कराये जाने वाले टेस्ट
बढ़ते समय के साथ-साथ हमारे शरीर और स्वास्थ्य की भी उम्र बढ़ती जाती हैं जिसकी वजह से हमारे बॉडी में कई महत्वपूर्ण तत्वों की कमी होने लगती हैं और हमारा शरीर कमजोर होने लगता हैं. तो ऐसे में अपने सेहत को हमेशा अच्छे रखने और अपने शरीर में कमियों को जान कर उन्हें दूर करने का एक उपाय परीक्षण होता हैं. जिसमें ज़चा के जरियें हम अपने बॉडी को समझ पाते हैं और अपने आप में सुधार ला सकते हैं, आज के इस लेख में हम जानेंगे कुछ ऐसे परीक्षण (Test) के बारे में जो आपको 25 की उम्र के बाद कराने ही चाहिए क्योंकि यह जांच आवश्यक होते हैं.
25 की उम्र के बाद कराये जाने वाले टेस्ट –
- ECG टेस्ट (ECG Test)
- जेनेटिक टेस्ट (Genetic Test)
- लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test)
- लीवर कार्य परीक्षण (Liver Function Test)
- पैप स्मीयर (Pap Smear)
- कॉलोनोस्कोपी टेस्ट (Colonoscopy Test)
- सामान्य परीक्षण (Routine Test)
ECG टेस्ट (ECG Test) -
हृदय संबंधी जटिलताएं कभी भी आ सकती हैं। ECG (इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम) टेस्ट करवाना सेहत के लिए जरुरी है और फायदेमंद भी है क्योंकि इस आसान सस्ते टेस्ट के द्वारा आप समय से पहले दिल की बीमारियों का पता लगा सकते हैं ताकि बाद में वो खतरनाक रूप न ले लें। अगर आप दिल की बीमारियों का पता ठीक समय से लगा लेते हैं, तो इन्हें आसानी से ठीक किया जा सकता है।
जेनेटिक टेस्ट (Genetic Test) -
आनुवंशिक परीक्षण या जेनेटिक टेस्ट एक प्रकार का चिकित्सा परीक्षण है जो जीन, गुणसूत्र या प्रोटीन में परिवर्तन की पहचान करता है। इस परीक्षण के जरिए रक्त के नमूने का विश्लेषण किया जाता है। जांच के परिणाम से शुरुआती उपचार विकल्पों का चयन करने में मदद मिलती है। यदि आप बच्चा पैदा करने की योजना बना रहे हैं, तो ये टेस्ट मददगार है। इस टेस्ट के माध्यम से होने वाले बच्चे को माता-पिता से कोई जेनेटिक डिसऑर्डर होगा, उसका पता चल जाता है और आप जरूरी सावधानी ले सकते हैं।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) -
एक पूर्ण लिपिड प्रोफाइल परीक्षण आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर-अच्छे और बुरे के बारे में विस्तार से बता सकता है और आपको यह संकेत दे सकता है कि आपका दिल कितना स्वस्थ है। हर दो साल में एक बार पूर्ण परीक्षण के लिए जाना 30 साल की उम्र के बाद मददगार हो सकता है। स्वस्थ लक्ष्य LDL (कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) <130 और LDL (उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन]> 60 जैसा कुछ होना चाहिए।
इन्हें भी पढ़े - स्वास्थ्य जीवन के 05 मूल मंत्र
लीवर कार्य परीक्षण (Liver Function Test) -
लिवर केमिस्ट्री टेस्ट, जो कुछ शारीरिक एंजाइमों, प्रोटीन, ट्राइग्लिसराइड्स के चार्टिंग को मापकर काम करते हैं, यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपका लीवर कितना स्वस्थ है। 30 साल की उम्र में प्रवेश करने के बाद हर दूसरे साल में ये टेस्ट जरूर करवाएं। (पढ़े - लीवर को स्वास्थ्य रखने के लिए क्या खाएं )
पैप स्मीयर (Pap Smear) -
यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की जांच करने का एक टेस्ट है। सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी संक्रमण की जांच के लिए भी पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सही समय पर पैप स्मीयर जांच करवाने से सर्वाइकल कैंसर का पहले ही पता लगाया जा सकता है। यह गर्भाशय में उन कोशिकाओं को पता लगाती हैं जो कैंसर ग्रस्त हैं या भविष्य में जिनके कैंसर ग्रस्त होने की संभावना है।
कॉलोनोस्कोपी टेस्ट (Colonoscopy Test) -
पुरुषों के लिए कोलोनोस्कोपी टेस्ट जरूरी है। जबकि इस तरह के परीक्षण आमतौर पर 45-50 वर्ष की आयु के बाद किए जाते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पुरुषों को अपने 30 के दशक में ही परीक्षण करवाना शुरू कर देना चाहिए, खासकर यदि उनके पास कोलन कैंसर का प्रथम-डिग्री रिश्तेदार या पारिवारिक इतिहास है। टेस्ट आंतों की समस्याओं, रक्तस्राव के साथ-साथ कोलन कैंसर के संकेतों की जांच करने में मदद कर सकते हैं।
सामान्य परीक्षण (Routine Test) -
इन चेक-अप के अलावा, कई अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट हैं, जिन्हें करना चाहिए। इसमें थायराइड फंक्शन टेस्ट और किडनी फंक्शन टेस्ट महत्वपूर्ण हैं। आमतौर पर, डॉक्टरों द्वारा इन परीक्षणों की सिफारिश की जाती है, लेकिन यह सलाह दी जाती है कि अपने प्रमुख सिस्टम/अंगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी जांच करवाएं।
तो दोस्तों यदि आपका उम्र 25 वर्ष या उससे ज्यादा हैं तो कृपया इस जानकारी को जानने के साथ इनमें से जरूरी परिक्षण जरूर करवाएं. आज की यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें.
इन जानकारियों को भी पढ़े :-
- बॉडी में खून की कमी, लक्ष्ण व कारण
- डिसेंट्री या पेचिस के लक्ष्ण और कारण
- सुबह जल्दी उठने के कामगार उपाय
