Active Study Educational WhatsApp Group Link in India

स्वास्थ्य संबंधी सलाह | Health Tips Hindi

स्वास्थ्य संबंधी सलाह तो हर कोई जानना चाहता है पर यहां गलती  यह करते है की स्वास्थ्य संबंधी सलाह पता होने के बाद भी वो उसका  पालन नहीं कर पाते और अपनी सेहत को खो बैठते है, तो आज के इस आर्टिकल में स्वास्थ्य संबंधी सलाह आपको मिलेगी की आपको क्या नहीं करना चाहिए और क्या नही। 

स्वास्थ्य संबंधी सलाह

Swasthay Sambandhi Slah -

  1. नाक से सांस लें। यदि मुंह से सांस लेने की आदत है  तो इसका अर्थ है आपका शरीर रोगी बनता जा रहा है।

  2. सोते समय रजाई, चादर अथवा कंबल से सिर ढंककर न सोयें। रात में सोते समय हवादार कमरे में खिड़की खोलकर तथा यदि आवश्यक हो तो मच्छरदानी लगाकर सोयें।

  3. नहाने  के तुरंत बाद नाश्ता या भोजन करना तथा नाश्ता या भोजन के तुरंत बाद नहाना आपके लिये हानिकारक है। स्नान के कम से कम आधा घंटा बाद नाश्ता लें या एक घंटा बाद भोजन करें। यदि किसी वजह से नाश्ता या भोजन के बाद स्नान करना हो तो क्रमशः कम से कम 2 या 3 घंटे का अंतर अवश्य रखें।

  4. प्रातःकाल स्नान के तुरंत बाद योगाभ्यास करना उत्तम है। यदि बिना स्नान किये अभ्यास करते हैं तो योगाभ्यास के कम से कम 20 मिनिट बाद स्नान करना सही है । यदि प्रातःकाल योगाभ्यास के लिए समय प्राप्त न हो सके तो दोपहर के भोजन या नाश्ता के क्रमशः कम से कम चार या दो घंटे बाद शाम को योगाभ्यास करना उत्तम है।

  5. योगाभ्यास के कम से कम आधा घंटा या एक घंटा बाद क्रमश: नाश्ता या भोजन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। 

  6. शौच, पेशाब, छींक, आंसू, भूख, प्यास के वेगों को न रोकें ।

  7. योग और व्यायाम के बेहतरीन फायदों को जाने - क्लिक करें

  8. भोजन तथा आसन-प्राणायाम, प्रातःकालीन भ्रमण / दौड़ने के बाद पेशाब करना शरीर के लिए हितकर है।

  9. तम्बाकू, चाय, काफी, शराब, भांग, बीड़ी, सिगरेट, अफीम जैसे व्यसनों की गुलामी से मुक्त हों। साथ ही अच्छी चीजों की दासता भी मुक्त हो जायें।

  10. बैठते समय, कार्य करते समय एवं चलते समय रीढ़ सीधी रखने का प्रयास करे, ऐसा करने से आपके शरीर की हड्डिया मजबूत रहती है और उसके कार्य करने  की क्षमता भी बरकरार रहती है।  

  11. कोशिस करे की दो भोजनों के बीच कम से कम छः घंटे का अंतर हो तथा भोजन एवं नाश्ते के बीच 3 घंटे का अंतर अवश्य हो। सुबह से शाम तक बार-बार कुछ खाते पीते रहना रोग और अकाल मृत्यु को निमंत्रण देना है, तो कोशिस करे की इस चीज से बचे।


  12. सुबह नाश्ता वही लें जो शारीरिक परिश्रम अधिक करते हों , नहीं तो केवल दोपहर और शाम को भोजन स्वास्थ्य के लिए सही है ।

  13. अपने आहार में फल एवं सब्जी की मात्रा 75 प्रतिशत तथा कार्बोज(चावल, गेहूं से बने पदार्थ, प्रोटीन) (दाल दूध) और चिकनाई (घी,तेल) की मात्रा 25 प्रतिशत होनी चाहिए।

  14. रोटी के लिए गेहूं के महीन आटा (मैदा) के स्थान पर मोटा आटा (सूजी के आकार का) पिसवाकर बिना छाने ही दो या तीन घंटे पहले गूंथकर रोटी बनाई जाने पर उतने ही मूल्य के आटे में आपके भोजन में रेशा 6 गुना खनिज पदार्थ 4 गुना तथा विटामिन "बी" 4 गुना से ज्यादा मिलता है। खाद्य पदार्थ के ये अमूल्य घटक पेट की सफाई और रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। अतः मोटे आटे की रोटी का प्रयोग करें मैदे या बेसन से बने पदार्थ बिस्कुट, ब्रेड, समोसा, कचौड़ी, मिठाई इत्यादि से बचें।

  15. अलग-अलग भोज्य पदार्थ जो एक दूसरे के विपरीत होता है , जैसे दाल एवं चांवल, दाल एवं रोटी तथा नमकीन पदार्थ के साथ दूध इन सभी पदार्थो को एक साथ न ले ।

  16. भोज्य पदार्थों में मिर्च, मसाले, तेल, घी का कम से करें। तले मुने पदार्थों से बचें। कम प्रयोग 

  17. याद रखें की  पकायी हुई चीजों से कच्ची ताजी चीजों में अधिक गुण होता है। 

  18. "खाने को आधा करो, पानी को दूना,कसरत को तिगुना और हंसना चौगुना।" यह स्वास्थ्य का मूलमंत्र है।

  19. क्या आप जानते हैं - जल के चमत्कारी गुण को 
  20. सप्ताह में एक दिन उपवास, रसाहार या फलाहार अवश्य करें। व्रत तोड समय भारी पदार्थ यथा, पराठा, सिंघाड़े का आटा अथवा आलू के हलवा, पूड़ी, बरफी, मिठाईयां दूध के प्रयोग से बचें। इस तरह के गरिष्ठ वस्तुओं के उपयोग से यकृत एवं आमाशय पर बोझ पड़ता है फलतः भावी रोगों का कारण बनता

  21. पुराने कब्ज होने की स्थिति में जुलाब का उपयोग हानिकारक है। अतः प्राकृतिक चिकित्सा के साधन जैसे आहार परिवर्तन, गरम ठंडी सेंक, मिट्टी पट्टी एवं एनिमा से कब्ज दूर करें।

  22. सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, दस्त होने की स्थिति में भोजन बंद करके प्रत्येक घंटे में रूचि के अनुसार ठंडा या कुनकुना जल पियें तो सामान्यतः तीन दिन में ही बिना औषधि के रोग ठीक हो जाता है। किन्तु यदि केवल पानी पीकर न रहा जाये तो सब्जियों के सूप लें।

  23. काम, क्रोध ईर्ष्या, द्वेष, उतावलापन, उदासी, चिड़चिड़ापन आदि से दूर रहें।

  24. प्रत्येक काम को कर्तव्य समझकर लगन एवं उत्साह के साथ करें।। 

  25. वर्तमान में जियें, न भूतकाल का कब्र खोदें न ही भविष्य की लंबी चिंता करें।

  26. चीजों की यही जानकारी न होना ही रोगों का मुख्य कारण है तथा व्रत एवं प्रायश्चित के द्वारा सारे रोगों का निराकरण होता है। अतः रोग होने पर तत्काल आत्म निरीक्षण कर कारणों को दूर करें। 

  27. गीता के श्लोक के अनुसार अपना जीवन संतुलित रखें। युक्ताहार विहारस्य युक्त चेष्टस्य कर्मसु । युक्त स्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ।। गीता 6 / 17 ।। दुखों का नाश करने वाला योग तो यथायोग्य आहार विहार करने वाले कर्मों में यथायोग्य चेष्टा करने वाले का और यथा योग्य सोने तथा जागने वाले का ही सिद्ध होता है।

तो दोस्तों इन स्वास्थ्य संबंधी सलाह health advice को बस जानना जरूरी नहीं है, इन्हे अपने दिनचर्या में आप शामिल भी करे तब जा कर आपको इसका फायदा मिल पायेगा वरना नहीं, इस स्वस्थ संबंधी सलाह को अपने सभी दोस्तों तक शेयर जरूर करे ताकि वे भी अपने सेहत और जीवन को बेहतर बना सके। 



सेहतमंद रहने के लिए इन्हें पढ़े:-



शेयर करें: