आहार विषाक्तता (Food poisoing)
आहार विषाताक्त तीव्र आन्त्रशोथ होता है, जो ऐसे आहार के अंत: ग्रहण करने से होता है, जो या तो जीवित जीवाणुओं या इनके विष या फिर अकार्बनिक रासायनिक पदार्थों एवं पौधों तथा प्राणियों से व्युत्पन्न विषों को संदूषित करता है।
आहार विषाक्त,रूपरेखा-
- आहार विषाक्तता
- आहार विषाक्तता के प्रकार
- आहार विषाक्तता के कारण
- आहार विषाक्तता के लक्षण
- आहार विषाक्तता की
- रोकथाम एवं नियंत्रण आहार की सुरक्षा
आहार विषाक्तता के प्रकार -
आहार विषाक्तता दो प्रकार के होते हैं -
- जीवाणु एवं उनके विष के द्वारा विषाक्तता।
- कुछ पौधों, समुद्री भोजन, रासायनिक पदार्थों एवं प्राणियों से व्युत्पन्न विषों के कारण विषाक्तता।
जीवाणुओं के संक्रमण द्वारा भी आहार विधाक्तता हो जाती है। इस प्रकार आहार विषाक्तता में रोगजनक जीव, जो आहार में पाये जाते हैं, का गुणन (Multiplication) उसके शरीर के अंदर ही होता है। पूर्व से तैयार किए गए आहार डिब्बे बंद एवं परिरक्षित भोजन में अनुग्रहीत विष को अन्तः ग्रहण करने से आहार विषाक्तता होता है। पनीर, डिब्बों में भरे हुए मांस के मसालेदार छोटे-छोटे टुकड़े, सैंडविच एवं अन्य डिब्बा बंद आहार एवं अपूर्ण रूप से पका हुआ एवं अधपका आहार भोजन
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जीवाणुओं के संक्रमण द्वारा भी आहार विषाक्तता हो जाती है। इस प्रकार आहार विषाक्तता में रोगजनक जीव, जो आहार में पाये जाते हैं, का गुणन (Multiplication) दूध उसके शरीर के अंदर ही होता है। पूर्व से तैयार किए गए. आहार डिब्बे बंद एवं परिरक्षित भोजन में अनुग्रहीत विष को सं अन्तः ग्रहण करने से आहार विषाक्तता होता है। पनीर, डिब्बों में भरे हुए मांस के मसालेदार छोटे-छोटे टुकड़े, सैंडविच एवं अन्य डिब्बा बंद आहार एवं अपूर्ण रूप से पका हुआ एवं अधपका आहार भोजन विषाक्तता के लिए वाहक का कार्य करते हैं ।
आहार विषाक्तता के कारण-
आज के समय में आहार विषाक्तता का मुख्य कारण उनमें उपयोग किये जा रहे पेस्टीसाइड है जो अधिक मात्रा में उपयोग किये जा रहे हैं फल व सब्जियों अनार, के उत्पादन में आज किसान, मजदूर अपने अनार, फल, सब्जियों के उत्पादन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहता है ताकि उनका लाभ मिल सके जिसके कारण ये पेस्टीसाइड अनाज, फल, सब्जियों के •पोषक तत्वों को प्रभावित कर रहे हैं जिसका असर हमारे स्वास्थ्य पर हो रहा है ।
आहार विषाक्तता के लक्षण -
जी मिचलाना, उल्टी, सिरदर्द, डायरिया, पेट दर्द, कुछ ज्यादा विषाक्तता में खून एवं श्लेष्मा भी अतिसार या डायरिया के साथ आता है इसमें मृत्यु कम होती है, रोगी दो-तीन दिन में ठीक हो जाता है ।
आहार विषाक्तता की रोकथाम एवं नियंत्रण -
- आहार की सफाई (Food sanitation) आहार ग्रहण को करने वाले प्राणियों में कोई भी संक्रमण नहीं पाया जाना को चाहिए। यह पशु चिकित्सक के निरीक्षण के द्वारा ही वध के वि पूर्व या वध के पश्चात् ज्ञात होता है।
- जो व्यक्ति आहार के पकाने, तैयार करने, परोसने तैय एवं उसको लाने, से जाने से संबंधित होते हैं, उन व्यक्तियों यौ को स्वस्थ साफ रहना चाहिए।
- जिस व्यक्ति के शरीर में घाव या फोड़ा या व्यक्ति जख्मी हो या डायरिया से पीड़ित हो, गले के रोग से संक्रमित हो उनको आहार के रख रखाव से दूर रहना चाहिए।
- भोजन को ठीक प्रकार से पकाना चाहिए दूध एवं दूध के पदार्थ को अच्छी तरह से निर्जीविकरण करना चाहिए।
- सभी मनुष्यों को साफ-सफाई, स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण आवश्यक रूप से देना चाहिए, जो आहार एवं उत्पादों से संबंधित कार्य करते हैं ।
आहार की सुरक्षा -
- डिब्बाबंद आहार का उपयोग नहीं करना चाहिए।
- फ्रिज में से निकालकर एकदम ठण्डा आहार ग्रहण नहीं करना चाहिए ।
- आहार ग्रहण करने व रखने वाले बर्तन को हमेशा साफ करते रहना चाहिए, धूप में सुखाना चाहिए।
- भोजन को संदूषित होने से बचाना चाहिए।
- भोजनालय व भंडार गृह सब साफ एवं रोगाणुवि होना चाहिए।
- फलों को खाने के पूर्व पानी में भिगोकर रखना चाहिए ताकि उनमें लगे पेस्टीसाइड पानी में घुल जायें।
- सब्जियों को काटने के बाद उसे एक घण्टे के लिए नमक पानी में रख देना चाहिए ताकि उसमें लगे पेस्टीसाइड पूरी तरह सब्जी से निकल जाएँ।

