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डायरिया (बार-बार आने वाले दस्त)

डायरिया को हिंदी में अतिसार तथा डायरिया (Diarrhea) को बोलचाल की भाषा में दस्त होना कहा जाता है।

डायरिया का परिचय- 

गुदा मार्ग से जब बहुत से मल का बार-बार परित्याग होना डायरिया या दस्त  कहलाता है। इसमें मल पतला होकर बार-बार बड़ी मात्रा में आता है। 'Acute Diarrhea is defined an increase in the fluidity and volume of stool.'

What is Diarrhea | डायरिया के लक्षण | डायरिया का परिणाम और उपचार

डायरिया या दस्त की परिभाषा:- दस्त का अधिक बार होना, अधिक पतला होना तथा अधिक मात्रा में होना डायरिया कहलाता है (Increase in frequency (ie thrice daily) liquidity and amount (ie>200gm/d) is known as diarrhea) |

जब कोष्ठ में अधिक मल संचय होता है तो यह डायरिया द्वारा बाहर निकलता है।

डायरिया क्या हैं (what is diarrhea)- 

जब खाया हुआ भोजन आमाशय पचा नहीं पाता है तब वह अनपचे खाने के साथ जो पतले दस्त आते हैं, उनको ही डायरिया या हिंदी में अतिसार कहा जाता है।

डायरिया या दस्त का प्रमुख कारण (major cause of diarrhea):-

  • अजीर्ण, पाचन संस्थान में दोष।
  • गरिष्ठ, चिकने, सूखे, संयोग विरुद्ध ठंडे पदार्थों का सेवन।
  • आमाशयिक रसों का कम या नहीं बनना। दूषित जल एवं दूषित मद्य का अति मात्रा में सेवन
  • जठर ग्रहणी सम्मिलन (Giaestro Jejunostomy) नामक शल्य कर्म के उपरांत डायरिया होता है। 
  • यूरीमिया, अवटु अतिसक्रियता (Hyper Thyroidism) एवं पूति जीव रक्तता(Scpitcaemia) आदि। 
  • अधिक भय-शोकादि के फलस्वरूप मानसिक भाव।
  • आमाशय में कृमि, अर्श ग्रहणी एव अजीर्ण रोग के परिणामस्वरूप।
  • पाचन शक्ति से अधिक खाने से ।
  • तीव्र दस्त (Acute Diarrhoea) संक्रमण के परिणामस्वरूप होता है। 
  • इसमें बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ, थकान एवं बेहोशी हो सकती है।
  • संक्रमण रहित कारण कोलीनेर्जिक एजेंट्स मैग्नीशियम सम्बन्धित एण्टेसिड्स ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स जुलाब वाली औषधियाँ आदि ।

डायरिया या दस्त के प्रमुख लक्षण (Major symptoms of diarrhea):-

  • रोगी को पतले मल को त्यागने के लिए बार बार जाना पड़ता है, जो इसका प्रमुख लक्षण पेट में गुड़गुड़ाहट एवं अफारा ।
  • प्यास एवं अरुचि । 
  • पेट को दबाने पर दर्द होना ।
  • कभी-कभी मितली एवं वमन का आभास । 
  • अधपचे खाने के दस्त पिचकारी छोड़ने के समान ।
  • जीभ सूखी लाल एवं पीली। 
  • छोटी आंत का विकार होने पर नाभि के चारों ओर वेदना का आभास ।
  • तीव्र डायरिया में उदर के संपूर्ण अधोभाग में शौच जाने से कुछ ही समय पूर्व वेदना एवं बेचैनी ।
  • उदर कठोर एवं स्पर्शासहिष्णु ।
  • कभी-कभी उदर में तीव्र वेदना होती है, जो मल त्याग अथवा अधोवायु (Flatus) के निकल जाने के पश्चात शांत हो जाती है।
  • बड़ी मात्रा में पानी जैसा पतला दस्त आने पर रोगी को थकान एवं बेहोशी हो सकती है।
  • साथ में पसीना आना, हाथ-पैरों का ठंडा होना, कभी-कभी मूर्च्छा (Syncope) | 
  • 'तीव्र डायरिया' एवं 'दीर्घ स्थायी डायरिया की स्थिति में शरीर भार में कमी। 
  • कभी-कभी अत्यधिक कृशता (Emaciation)।

डायरिया या दस्त की पहचान (Diarrhea diagnosis):-

  • दस्त के पहले मंद-मंद दर्द की अनुभूति पेट में गुड़गुड़ाहट, अफारा, दस्त पतले एवं बार-बार आना, प्यास की अधिकता
  • दुर्बलता, उदासी एवं आलस्य एवं पीड़ा आदि कष्ट होने पर इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।

डायरिया या दस्त का परिणाम (result of diarrhea):-

  • डायरिया ठीक हो जाने वाला रोग है। पर सावधानीपूर्वक पूरे समय तक चिकित्सा आवश्यक है।
  • दुर्दम व्याधियों के परिणामस्वरूप होने वाला डायरिया कृच्छ्र साध्य या असाध्य होता है। 
  • भोजन के पश्चात और शोकातिसार प्रायः बनी रहने वाली अवस्था है। पर इसमें रोगी दुर्बल नहीं होता है।

डायरिया या दस्त की चिकित्सा विधि (diarrhea treatment):-

  • शैय्या पर विश्राम (Bed Rest) | 
  • डायरिया की असाध्यावस्था होने से पूर्व ही चिकित्सा आवश्यक। प्रथम रोग के कारण को दूर करें।
  • तीव्र डायरिया में प्रारंभ में ही दस्तों को रोकने की दवाई नहीं देनी चाहिए प्रारंभ के 24 घंटों में खाने को कुछ न दें।
  • उसे पर्याप्त मात्रा में जल पिलावें। यदि दोष मृदु हो, रोग का आक्रमण हल्का हो तो दूषित पदार्थों के निकल जाने के उपरांत डायरिया स्वतः शांत हो जाता है। 
  • डायरिया अवस्था में दीपन, पाचन योग देना पर्याप्त होता है।
  • कभी-कभी डायरिया में शरीर का जल अधिक मात्रा में निकल जाता है अतः जलाल्पता (Dehydration) निवारण हेतु शिरामार्ग (I.V.) से साधारण लवण, जल और ग्लूकोज देना आवश्यक हो जाता है।

डायरिया या दस्त सहायक चिकित्सा (Diarrhea or diarrhea adjuvant therapy):-

  • पुराने चावल का भात, मूंग की दाल का यूष, मसूर का यूष, कच्चा केला, टमाटर, अदरक, लहसुन, हींग, बेल, आँवला का मुरब्बा, जीरा, मट्ठा, बकरी का दूध आदि पथ्य हैं। 
  • नए डायरिया में साबूदाना दें। अनार एवं संतरे का रस दे सकते हैं।
  • पुराने डायरिया में पुराने चावलों का भात मसूर की दाल के यूष के साथ दें। साबूदाने भी उपयुक्त हैं।
  • शरीर को गर्म कपड़ों आदि से गर्म रखें। 
  • सहायक चिकित्सा के रूप में रोगी को गर्म पानी और नमक का घोल (शक्कर 2 चम्मच, नमक 1 चम्मच) गर्म पानी को ठंडा ल कर मिलाकर 2-2 चम्मच बार-बार पिलावें।

तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको डायरिया या दस्त क्या है, डायरिया या दस्त की परिभाषा, डायरिया या दस्त का प्रमुख कारण, डायरिया या दस्त के प्रमुख लक्षण, डायरिया या दस्त की पहचान, डायरिया या दस्त का परिणाम के साथ साथ डायरिया या दस्त की चिकित्सा विधि और 
डायरिया या दस्त सहायक चिकित्सा के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिस की है.

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