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आँतों के कृमि होने के कारण (INTESTINAL WORMS)

आतों में कृमि का हो जाना अधिकतर पेट से सम्बंधित बीमारियों का कारण माना जाता हैं. तो ऐसे में आँतों में कृमि होने के कारण कौन-कौन से हैं? इस सवाल का जवाब आपको इस आर्टिकल में मिलने वाला हैं. चलिए जानते हैं की कृमि होने के कारण क्या-क्या हैं.

आँतों के कृमि होने के कारण | इन कारणों से होती हैं  आतों में कृमि

आँतों के कृमि की परिभाषा:- 

कृमि रुग्णता, आंत्रि कृमि पेट में कीड़े। आधुनिक चिकित्सा में इस व्याधि को हेलमियासिस (Helmenthiasis) के नाम से जाना जाता है। परिचय परजीवी कृमियों (Parasitic worms) की मनुष्य की आँत में उपस्थिति को कृमि रुग्णता (Helminthiasis) कहते हैं। 

यहाँ कृमियों से अभिप्राय वर्म्स (Worms) से है। सामान्य कारण-मधुर पदार्थ, शाक शब्जी, अपच (Indigestion), रसदार भोजन, विरोधी भोजन आदि कारणों से आँत के कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं। कृमि मुख्यत चार प्रकार के होते हैं:- 

  1. गोल कृमि (Round worm)
  2. फीता कृमि (Tape worm)
  3. सूत्रि कृमि (Thread worm)
  4. अंकुश कृमि (Hook worm) 

इनमें सबसे अधिक पाए जाने वाला कृमि एस्केरिस लुम्बीकोइडस है। तथा पेट दर्द का कारण प्रधान रूप से यही है। यदि जनरल प्रैक्टिश्नर के पास पेट दर्द का कोई रोगी आए तो उसका रोग निदान करते समय आँतों के कृमि की भी शंका की जानी चाहिए।

कृमि होने के कारण क्या हैं? What are the causes of having worms?

कृमि पैदा होने के कारण निम्नलिखित है(due to worm birth):- 

  • अस्वच्छता पेट के कीड़ों का सबसे प्रमुख कारण है।  
  • बिना हाथ धोए भोजन करने या अन्य इसी प्रकार की गंदगी से उत्पन्न होते है।
  • पिछला आहार ठीक से पच न पाया हो, उस पर फिर से भोजन करने की आदत प्रतिदिन अत्यधिक मात्रा में खट्टे-मीठे पदार्थों को खाने की आदत 
  • अत्यधिक मात्रा में तरल आहार का सेवन ।
  • आटे और गुड़ से बने हुए खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन।
  • दिन में सोने की आदत। दिन को सोने से शरीर में जो विकार होते हैं, उनसे आँतों में कृमि पैदा हो जाते है।
  • भोजनमें विपरीत प्रकृति वाले आहारों का सेवन ।
  • जमीन पर गिरी चीज उठाकर खाना, नाखून खाने (मुँह से नाखून कुतरने की आदत)। अधपका मांस खाने । निष्क्रिय एवं श्रमहीन जीवन तथा नियमित व्यायाम का अभाव। 
  • कच्चे फल और सब्जियाँ आदि बिना धोये-पोछे खाने से।
  • अस्वास्थ्यकर खान-पान, रहन-सहन की वजह से कृमियों का आक्रमण अधिकतर होता है।
  • अधिक पका केला खाने से इससे पेट में जल्दी कीड़े होने की संभावना होती है।
  • अम्लरस पैदा करने वाले खाद्य भी कृमियों को पैदा करते हैं। 
  • अत्यधिक साग-सब्जी नियम विरुद्ध प्रयोग करने स पीठी, उड़द तथा खट्टे पदार्थ, अत्यधिक नमक खाने से।
  • गुड़ का अधिक सेवन करना ।

ऊपर बताए गए सभी कारण कृमि के हैं, इन्ही कारणों की वजह से किसी मनुष्य को कृमि की बीमारी से गुजरना पड़ता हैं. 

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