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लिवर सिरोसिस (CIRRHOSIS OF THE LIVER)

लीवर सिरोसिस का परिचय(What Is cirrhosis of the liver):-  तंतु-ऊतक के बन जाने के कारण लीवर का कठोर हो जाना 'लीवर सिरोसिस' अथवा सिरोहसिस कहलाता है। लीवर का यह एक जीर्ण रोग है।

लिवर सिरोसिस क्या हैं | लक्षण, कारण और उपचार

लिवर सिरोसिस की इस जानकारी की रुपरेखा:- 

  • लीवर सिरोसिस क्या बीमारी हैं?
  • लीवर सिरोसिस का प्रमुख कारण क्या हैं? 
  • लीवर सिरोसिस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
  • लीवर सिरोसिस होने पर क्रमानुसार लक्षणों की प्रगति?
  • लीवर सिरोसिस की पहचान क्या हैं?
  • लीवर सिरोसिस  के परिणाम क्या होते हैं? 
  • लीवर सिरोसिस का ट्रीटमेंट  क्या हैं?

लिवर सिरोसिस क्या बीमारी हैं?:- 

आम भाषा में मानव लीवर का कठोर हो जाना ही “लीवर सिरोसिस” कहलाता हैं. लीवर सिरोसिस अनेक कारणों से उत्पन्न जीर्ण एवं विसरित व्याधि (Diffuseuble disease) है। इसमें लीवर के सारे ऊतक नष्ट हो जाते हैं। इसमें लीवर के आकार प्रकार में अंतर आ जाता है और सौत्रिक ऊतकों (Fibrous Tasues) का निर्माण अधिक जाता है।

लिवर सिरोसिस का प्रमुख कारण क्या हैं:- 

  • अति मद्यपान, इसके विपरीत पौष्टिक, भोजन एवं व्यायाम बहुत कम, अर्थात मदात्य रोग (Alcoholism) 
  • कुपोषण (Malnutrition) । अर्थात भोजन में प्रोटीन की कमी।
  • सक्रिय जीर्ण यकृतशोथ। यह स्त्रियों में अधिक ।
  • पित्त नलिका का अवरोध, मलेरिया ज्वर का बारम्बार आक्रमण ।
  • हृदय रोग, स्कारलेट फीवर, पेचिश (Dyse-Cntery), उपदंश, खसरा, टाइफॉइड (Typhoid), C छोटी माता आदि रोग का लंबे समय तक रहना।
  • संक्रमण वाले स्थानों में निवास ।
  • गठिया आदि अन्य वात व्याधि ।
  • बच्चों का सूखा रोग साथ ही नमक, गर्म मसाले आदि का अधिक सेवन ।
  • नोट- यह रोग इनफिल्ट्रेशन, वसा, ग्लाइकोजेन, लिपिड अथवा पिगमेंट द्वारा हो सकता है।
  • यदि वमन के साथ रक्त आये, प्लीहा, बढी हुई हो, तो पोर्टल हाइपरटेन्शन हो सकती है जो सिरोसिस का कारण है।

लिवर सिरोसिस के प्रमुख लक्षण क्या हैं:- 

  • रोग स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक।
  • प्रारंभ में कोई लक्षण नहीं। कुछ समय उपरांत ।
  • भूख मारी जाती है और जी मिचलाता।
  • पेट का फूलना (आध्यमान) भी लीवर सिरोसिस का लक्षण हैं ।
  • अग्निमांद्य एवं कब्ज (Constipation) |
  • मुँह में खट्टा पानी भर आना।
  • छाती और उदर की उपास्थि (SuperficialVeins) मोटी और उभरी हुई।
  • कभी-कभी खूनी बवासीर और अनिद्रा होना ।
  • पैरों पर सूजन, मन्द-मन्द ज्वर, जलोदर।
  • प्लीहा बढी मूत्र कम आना। सकतीभार में कमी।
  • जिगर के दाहिनी ओर की पसलियों से स्पर्श
  • करने पर जिगर का तल खुरदरा या गौतम प्रतीत होना।
  • जिगर के किनारे एवं जिगर कोण को स्पर्श करने पर गोलाकार प्रतीत होना।
  • दिन प्रतिदिन कमजोर होते जाना आँख और मुँह पिचक जाना।

लिवर-सिरोसिस होने पर क्रमानुसार लक्षणों की प्रगति:- 

  • प्रारंभ मे भूख न लगना, अरुचि आदि।
  • बहुत दिनों तक भूख न लगने से शरीर कुश एवं रूप में।
  • तत्पश्चात पेट भारी रहना अफारा अतिसार अथवा मलावरोध अनेक बार पेट मे
  • दाहिनी ओर दर्द का लक्षण त्वचा शुष्क ।
  • एवं लीवर के ऊपर के शरीर की त्वचा में फैली हुई शिराओं का जाल अथवा खुली ला पर फूली हुई सूक्ष्म धमनियों का जाल दिखाई पड़ सकता है।
  • त्वचा तथा नखों पर पाण्डुता की झलक। तत्पश्चात लीवर एवं प्लीहा की वृद्धि नाभि पर तथा ऊपर की शिराएँ फैली हुई नामि के आस-पास कभी-कभी शिरा गुच्छ का निर्माण।
  • रक्तदमन 10% रोगियों में कभी-कभी मुँह से रक्तस्राव
  • यदि रोग बढ़ता ही जाए तो जलोदर के लक्षण या छाती में पानी भर जाने पर पैरों में शोध जलोदर के साथ-साथ गिट्टों पैरों तथा जाँघों पर हल्के शोध का लक्षण 
  • हृदय निर्बलता, नाड़ी तीव्र एवं कम भार की।
  • रोग के बढ़ने के साथ 40% रोगियों में सायंकालीन मंद ज्वर
  • मूत्र मात्रा में कम गहरे रंग वाला तथा कुछ अल्यूमिन युक्त 50% रोगियों में हल्का कामला।
  • रक्तचाय की प्रवृत्ति प्रायः नाक एवं मसूड़ों से रक्तस्राव शरीर का रंग कुछ श्याम वर्ण का आधुनिक ऐलोपैथिक पेटेन्ट चिकित्सा चार्ट्स जब लीवर अधिक रुग्ण हो जाता है तब वह अपना कार्य करना बंद कर देता है। 
  • तब टॉक्सीमिया होकर तंद्रा, कम्प, मूर्छा (Coma) आदि मृत्यु सूचक लक्षण होने लगते हैं।

लिवर सिरोसिस की पहचान क्या हैं:- 

  • सिरोसिस रोग अधिकतर शराब लेने वालों को होता है ।
  • रोगी की उम्र लगभग 30 वर्ष की होती है। विशेषकर पुरुषों में। 35% रोगियों में सेकेंड्री इंफेक्शन तथा ज्वर की उपस्थिति मिलती है।
  • निदान करते समय यदि रोगी पूछा जाय कि रक्तवमन होने पर उसने एस्प्रिन तो तो नहीं ली है तथा उसमें अल्सर के लक्षण उपस्थित हों तो उसे सिरोसिस का रोगी समझना चाहिये।
  • यदि कोई रोगी जलोदर से पीड़ित हो और नो उसके पेट की शिरायें उभरी दिखायी दें में और उसको पहले रक्तवमन हो चुका हो पाते तथा वह पक्का शराबी हो तो उसे सिरोसिस का रोगी समझना चाहिये ।

लिवर सिरोसिस  के परिणाम क्या होते हैं:- 

  • रोग का पूर्वानुमान अच्छा नहीं।
  • कामला (Jaundice), जलोदर, सिस्टोलिक प्रेशर का नीचा होना अच्छा नहीं.
  • बढ़ा हुआ लिवर साध्य एवं ठीक होने की.आशा ! 
  • यदि 1 माह की चिकित्सा से लाभ न मिले तो भविष्य अच्छा नहीं ।
  • रोग की प्रारंभिक अवस्था में मद्य पान एवं
  • तीव्र आहारों का सेवन बंद करने से ठीक होने की आशा ।
  • मूर्छा एवं रक्तवमन के रोगी की आशा नहीं। नोट-रोगी का निदान कठिन है। प्रारंभ में विशेषज्ञ भी इसका निदान नहीं कर पाते हैं।
  • लीवर सिरोसिस का ट्रीटमेंट  क्या हैं:- 
  • चिकित्सा विधि रोग की चिकित्सा रोग की व्यवस्था पर निर्भर करती है ।
  • लिवर एक्स्ट्रेक्ट (निओ हेपाटेक्स) के इंजेक्शन का प्रयोग व्यर्थ ।
  • यदि मुँह से खून की उल्टी आ चुकी है हो । तो रोगी को तुरंत अस्पताल भेद दें जहाँ आपातकालीन ऑपरेशन तथा रक्त रोगी को देना आवश्यक है।
  • लिवर सिरोसिस की कोई औषधि नहीं है, + जो लिवर के फाइब्रोसिस को दूर कर सके ।
  • रोगी में यदि शोथ, जलोदर, रक्तस्राव और दूसरे उपद्रव मिलें तो उसे एक से दो माह तक शैया पर विश्राम कराना चाहिए
  • लीवर सिरोसिस के लिए सहायक चिकित्सा:- 
  • सिरोसिस के रोगी को अधिकतम प्रोटीन वाला, पौष्टिक आहार वाला (विटामिन बी कॉम्पलेक्स प्रचुर मात्रा में) भोजन दें।
  • किसी भी शराब का पूर्ण निषेध.
  • भोजन सुपाच्य, प्रोटीन या विटामिंस युक्त 100 ग्राम प्रोटीन नित्य आवश्यक, दूध पर्याप्त मात्रा में।
  • नित्य 2-3 रसगुल्ले (छेने से बने) एवं मांस. मछली का सेवन ।
  • 120 ग्राम ग्लूकोज, 200 से 250 मि.ली. फलों का रस, नर्म बनी सब्जी, एवं मक्खन पर्याप्त मात्रा में। नमक का उपयोग आंशिक रूप में।

उम्मीद हैं की लिवर सिरोसिस से जुडी यह जानकारियां आपको पसंद आई होगी. साथ ही लिवर सिरोसिस से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब हमने आपको दिए हैं. जिसमे हमने आपको लिवर सिरोसिस के लक्षण, लिवर सिरोसिस होने के कारण और लिवर सिरोसिस के परिणाम को बताया. 

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