फ़ोबिया (Phobia)
फ़ोबिया (Phobia) एक प्रकार का रोग है, जिसमें इंसान को किसी खास वस्तु, कार्य एवं परिस्थिति के प्रति भय या डर उत्पन्न हो जाता है। इसमें व्यक्ति उन चीजों से बचने की कोशिश करता है। फोबिया Phobia) में अपने डर की सोच भी व्यक्ति को इतना डरा देती है कि उसकी मानसिक व शारीरिक क्षमताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसमें इंसान का डर वास्तविक या काल्पनिक दोनों हो सकते हैं।
आमतौर पर किसी भी तरह के फोबिया से ग्रस्त रोगी अपने डर पर पर्दा डाले रहते हैं। उन्हें लगता है कि अपना डर दूसरों को बताने से लोग उन पर हंसेंगे। इसलिए वे अपने डर व उस परिस्थिति से सामना करने की बजाय बचने की हर संभव कोशिश करते हैं।
फोबिया के प्रकार (Types Of Phobia) –
फ़ोबिया (Phobia) किसी खास वस्तु से डर की बिमारी को कहा जाता हैं. और इन सभी अलग अलग वस्तुओ के अनुशार फ़ोबिया (Phobia) के प्रकार भी अलग अलग होता है. (जाने सांस फूलने का कारण और लक्षण )
फ़ोबिया (Phobia) के आज की इस आर्टिकल में हम निम्न फ़ोबिया (Phobia) के बारे में जानेंगे-
- चाइल्डहुड फोबिया (Childhood Phobia)
- एडल्टहुड फोबिया (Adulthood Phobia)
- एग्रोफोबिया (Agoraphobia)
- सोशलफोबिया (Socialphobia)
- मोनो जाइगोटिक ट्वीन्स फोबिया (Monozygotic Twins Phobia)
- फोबिया के लक्षण (Symptoms Of Phobia)
- फोबिया के उपचार (Treatment Of Phobias)
चाइल्डहुड फोबिया (Childhood Phobia):-
चाइल्डहुड फोबिया - यह फोबिया बचपन से होने वाला फोबिया है। इसमें बचपन में ही किसी चीज, व्यक्ति, जानवर या परिस्थिति के प्रति डर बैठ जाता है, जो वक्त के साथ खत्म न होने पर फोबिया बन जाता है। यह डर या तो बच्चों में खुद होता है या कई बार अभिभावक ही बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए किसी चीज से डरा देते हैं। वैसे तो यह डर उम्र के साथ खत्म हो जाता है, लेकिन कई बार जब यह डर बड़े होने पर भी नहीं जाता तो फोबिया का रूप धारण कर लेता है। इसलिए बच्चों को डराने की बजाय प्यार से समझाने की कोशिश करें।
एडल्टहुड फोबिया (Adulthood Phobia):-
एडल्टहुड फोबिया - कुछ डर वयस्क होने के बाद पैदा होते हैं। इनका प्रभाव सबसे ज्यादा यंग जनरेशन पर पड़ता है। एडल्टहुड फोबिया में कई तरह के फोबिया शामिल होते हैं। (जाने - माइग्रेन (आधे सर के दर्द) का घरेलु उपचार )
एग्रोफोबिया (Agoraphobia):-
एग्रोफोबिया - एक तरह का फोबिक डिसऑर्डर है, जो यह अपने साथ कई अन्य परेशानियां भी लाता है। इनमें डिप्रेशन, हर तरह की बेचैनी आदि प्रमुख हैं। एग्रोफोबिया(Agoraphobia) में व्यक्ति को बिना किसी कारण के ही डर लगता है। यह डर किसी चीज, व्यक्ति, जानवर या परिस्थिति से जुड़ा हुआ न होकर खुद के प्रति ही होता है।
एप्रोफोबिया(Agoraphobia) का मरीज अकेलेपन से डरता है। वह भीड़ में खड़ा होकर भी खुद को अकेला ही महसूस करता है। वह कहीं अकेले जा नहीं सकता, अकेले रह नहीं सकता। उसे लगता है कि वह किसी भी परिस्थिति का सामना नहीं कर सकता। ऐसे लोगों का आत्मविश्वास न के बराबर होता है। ऐसे लोग अकेले बाहर न जा सकने के कारण खुद को घर में ही कैद कर लेते हैं।
सोशलफोबिया (Socialphobia):-
सोशलफोबिया - युवाओं में पाया जाने वाला सबसे आम फोबिया है। इस फोबिया के शिकार आमतौर पर स्कूल और कॉलेज जाने वाले युवा होते हैं। सोशल फोबिया के शिकार लोग किसी भी सार्वजनिक स्थान पर जाने से, वहां बोलने से, वहां खाने से भी डरते हैं। इस फोबिया में सबसे ज्यादा स्पीचिंग कम्यूनिकेशन की समस्या होती है। ऐसा व्यक्ति सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की परफोर्मेस या बोलने से डरता है।
मोनो जाइगोटिक ट्वीन्स फोबिया (Monozygotic Twins Phobia):-
मोनो जाइगोटिक ट्वीन्स फोबिया - यह एक तरह का जेनेटिक फोबिया होता है, जो जुड़वा बच्चों को ही होता है। इसमें अगर एक बच्चा किसी फोबिया का शिकार है तो दूसरा बच्चा भी उसी फोबिया से ग्रस्त होगा। सभी ट्वीन्स के साथ ये समस्या नहीं होती है, लेकिन फिर भी आमतौर पर ट्वीन्स के साथ इस तरह की शिकायत देखी गई है।
फोबिया के लक्षण (Symptoms Of Phobia):-
- फोबिया (Phobia) के रोगी आम लोगों की तरह ही दिखाई देते हैं। वैसे तो इस रोग का पता नहीं चल पाता है, लेकिन फोबिया के रोगियों का अपने डर से सामना होने और अपने डर के बारे में बात करने पर इसके लक्षण सामने आते हैं।
- आमतौर पर फोबिया के रोगी अपने डर से दूर ही रहते हैं, लेकिन अनजाने में अपने डर को अपने सामने देखकर उन्हें फोबिया का दौरा पड़ता है
- ऐसे में उनमें तनाव, बेचैनी, पसीने आना, परिस्थिति या लोगों से दूर भागना, सिर में भारीपन, कानों में अलग-अलग आवाजें सुनाई देना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, सांस तेज होना, डायरिया, चक्कर आना, शरीर में कहीं भी दर्द को महसूस करना, पेट खराब हो जाना, ब्लड प्रेशर बढ़ना या कम हो जाना जैसी दिक्कतें दिखाई देती हैं।
- फोबिया का दौरा पड़ने पर रोगी में इस तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में रोगी बहुत ज्यादा पेनिक हो जाता है।
- ऐसी स्थिति में रोगी के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती उसके लिए खतरनाक हो सकती है।
फोबिया के उपचार (Treatment Of Phobias):-
फोबिया के इलाज के लिए कोई एक खास ट्रीटमेंट नहीं होता है। हर मरीज का फोबिया और उसकी परिस्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए फोबिया का इलाज भी मरीज और उसके डर के अनुरूप ही किया जाता है। फोबिया के इलाज के लिए दवाएं, काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। फोबिया के ट्रीटमेंट के लिए रोगी के थायरॉयड, ब्लड शुगर, डायबिटीज आदि की जांच करना भी जरूरी होता है।
