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सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia)

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है। ये बीमारी ज्यादातर बचपन में या फिर किशोरावस्था में होती है। सिजोफ्रेनिया के मरीज को ज्यादातर भ्रम और डरावने साए दिखने की शिकायत होती है। कई अन्य समस्याएं भी इस बीमारी के मरीज को हो सकती हैं। 

What is Schizophrenia


सिजोफ्रेनिया के मरीज को इस बीमारी से जूझने में जिंदगी भर भी संघर्ष करना पड़ सकता है। सिजोफ्रेनिया को मानसिक रोगों में सबसे खतरनाक समस्या माना जाता है। सिजोफ्रेनिया का मरीज बहुत आसानी से जिंदगी से निराश हो सकता है और कई बार तो मरीज को आत्महत्या करने की भी प्रबल इच्छा होती है।

दुनिया की करीब 1 फीसदी आबादी सिजोफ्रेनिया की शिकार है। जबकि भारत में इस बीमारी के मरीजों की संख्या करीब 40 लाख के आसपास है। इस आर्टिकल में हम आपको सिजोफ्रेनिया क्या है, सिजोफ्रेनिया के कारण, लक्षण और सिजोफ्रेनिया के उपचार के बारे में जानेंगे ।

सिजोफ्रेनिया के संबंध में हम निम्न जानकारियों को जानेंगे- 

  • क्या है सिजोफ्रेनिया?
  • सिजोफ्रेनिया की श्रेणियां?
  • सिजोफ्रेनिया के लक्षण?
  • सिजोफेनिया होने के कारण?
  • कितना खतरनाक है सिजोफ्रेनिया?
  • सिजोफ्रेनिया क्या लाइलाज है?

सिजोफ्रेनिया क्या है? (What is Schizophrenia?)

सिजोफ्रेनिया की बीमारी ज्यादातर लोगों को 16 से 30 की उम्र के बीच में होती है। पुरुषों को ये बीमारी महिलाओं से कम उम्र में हो सकती है।

ज्यादातर मामलों में मरीज को इस बीमारी की चपेट में आने के बारे में पता ही नहीं चल पाता है। हालांकि कुछ मामलों में मरीज सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia ) का शिकार होने के तुरंत बाद ही इसके दलदल में और गहरे धंसता चला जाता है। सिजोफ्रेनिया के मरीज को साए दिखने या फिर किसी के होने का आभास होने की समस्या हो सकती है। (जाने - माइग्रेन से जुडी पूरी जानकारी )

सिजोफ्रेनिया के ज्यादातर मरीज दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं क्योंकि न तो वह अपनी देखभाल कर पाते हैं और न ही नौकरी जैसे काम कर पाते हैं। सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia ) के बहुत से मरीज इलाज का विरोध भी करते हैं, वह इस बात को मानने के लिए भी तैयार नहीं होते हैं कि उन्हें कोई समस्या है। कुछ मरीजों में इसके लक्षण साफ तौर पर दिखते हैं जबकि दूसरे मरीजों को देखकर कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

लेकिन उनसे बातचीत करने पर पर इस बात का पता चल जाता है कि वह वाकई क्या सोचते हैं। सिजोफ्रेनिया एक मानसिक बीमारी है। लेकिन इसका असर मरीज से आगे बढ़कर परिवार, दोस्तों और समाज तक भी हो सकता है। सिजोफ्रेनिया के लक्षण और संकेत हर मरीज में अलग तरह के हो सकते हैं।

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सिजोफ्रेनिया की श्रेणियां (Categories Of Schizophrenia)

सिजोफ्रेनिया के लक्षणों को मुख्य रूप से चार कैटेगरी में बांटा जा सकता है।

  1. सकारात्मक लक्षण ऐसे लक्षणों को मानसिक लक्षण के नाम से भी जाना जाता है। जैसे, किसी के होने का भ्रम होना या फिर डरावने साए दिखना। 
  2. नकारात्मक लक्षण इन लक्षणों को पहचानने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है। ये लक्षण ज्यादातर मनुष्य को खुद से ही दूर ले जाते हैं। इन लक्षणों के चरम पर पहुंचने के बाद मरीज के चेहरे पर किसी भी तरह के एक्सप्रेशन नहीं आते हैं। इसके अलावा इंसान अपनी जिंदगी में भी हताश और नाउम्मीद हो जाता है। 
  3. संज्ञानात्मक लक्षण ये लक्षण मरीज की सोचने-समझने की क्षमता के प्रभावित होने से समझे जाते हैं। मरीज की सोच बेहद सकारात्मक या फिर बेहद नकारात्मक हो सकती है। इस लक्षण वाले मरीज ज्यादा देर तक किसी एक चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं
  4. भावनात्मक लक्षण ये ज्यादातर नकारात्मक लक्षण होते हैं, जैसे भावनाओं का मर जाना। यानी कि इस बीमारी में मरीज को न तो सुख महसूस होता है न ही दुख की अनुभूति होती है।

सिजोफ्रेनिया के लक्षण (Symptoms Of Schizophrenia)

1. प्रेरणा की कमी (lack of motivation)

सिजोफ्रेनिया के मरीज में कुछ भी करने की इच्छा खत्म हो जाती है। मरीज रोजमर्रा के जरूरी काम जैसे, कपड़े धोना और खाना बनाने तक को टालने लगता है। 

2. भावनाओं को जाहिर न कर पाना (Inability To Express Feelings)

सिजोफ्रेनिया का मरीज अक्सर खुशी और दुख के फर्क को महसूस नहीं कर पाता है। वह ज्यादातर इन भावनाओं के प्रति उदासीन या तटस्थ बना रहता है।

3. समाज से कटकर रहना (Cut Off From Society)

जब सिजोफ्रेनिया का मरीज सामाजिक रूप से खुद को अलग-थलग कर लेता है। उसे अक्सर ऐसा लगता है कि कोई उसे नुकसान पहुंचाना या फिर मार डालना चाहता है। मशहूर फिल्म अभिनेत्री परवीन बाबी को सिजोफ्रेनिया के इसी लक्षण की शिकायत थी। 

4. बीमारी से बेखबर रहना (Be Ignorant Of Disease)

सिजोफ्रेनिया के मरीज को दिखाई देने वाले मायावी दृश्य और भ्रम इतने असली होते हैं कि उसे यकीन ही नहीं होता है कि वह बीमार हैं। वह साइड इफैक्ट्स के डर से दवाएं खाना भी बंद कर देते हैं। उन्हें ये भी डर हो सकता है कि उन्हें दवाओं की जगह पर जहर दिया जा सकता है।

5. संज्ञानात्मक कठिनाइयां (Cognitive Difficulties)

सिजोफ्रेनिया के मरीज की ध्यान केंद्रित करने, चीजों को याद करने, भविष्य की योजना बनाने और जिंदगी को फिर से शुरू करने की क्षमता कम होते-होते खत्म हो जाती है। बीमारी के चरम पर मरीज को दूसरों से बात करने में भी समस्या होती है।

सिजोफेनिया होने के कारण (Due To Schizophrenia)

1. वंशानुगत कारणों से (For Hereditary Reasons)

अगर आपके परिवार के किसी सदस्य को कभी भी सिजोफ्रेनिया की शिकायत नहीं रही है तो किसी सामान्य इंसान को ये बीमारी होने की संभावना 1 फीसदी से भी कम होती है। हालांकि अगर किसी के माता-पिता को ये बीमारी हो जाए तो संतान को सिजोफ्रेनिया होने का खतरा 10 फीसदी तक बढ़ जाता है। 

2. दिमाग में कैमिकल असंतुलन की वजह से (Due To Chemical Imbalance In The Brain)

विशेषज्ञ मानते हैं कि दिमाग में एक न्यूरो ट्रांसमीटर पाया जाता है, जिसे डोपामाइन कहा जाता है। अगर डोपामाइन में असंतुलन आ जाए तो सिजोफ्रेनिया हो सकता है। अन्य न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। 

3. पारिवारिक रिश्तों की वजह से (Because Of Family Relationships)

अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं पाया गया है जिससे ये पता किया जा सके कि किसी को पारिवारिक रिश्तों के कारण सिजोफ्रेनिया हुआ हो। हालांकि, कुछ मरीजों ने जरूर ये बताया है कि परिवार में टेंशन के कारण उनकी समस्या और बढ़ जाती है। 

4. पर्यावरणीय कारण (Environmental Reasons) 

यद्यपि इसका भी कोई सीधा सबूत विशेषज्ञों को नहीं मिला है। लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे के जन्म से पहले अगर मां तनाव में रहे या फिर उसे कोई वायरल इंफेक्शन हुआ हो, तो बच्चे में सिजोफ्रेनिया होने के चांस बढ़ जाते हैं। लेकिन इस फैक्ट पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं और इस पर रिसर्च चल रही है

5. तनावपूर्ण अनुभव (Stressful Experience)

कई बार तनाव भरे अनुभवों के कारण भी सिजोफ्रेनिया के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। असल में ज्यादातर मामलों में सिजोफ्रेनिया के असली लक्षण प्रकट होने से पहले लोगों में बुरा व्यवहार करने, बेचैनी और ध्यान न केंद्रित कर पाने की समस्याएं होने लगती हैं। इसकी वजह से इंसान की जिंदगी में अन्य समस्याएं जैसे रिलेशनशिप प्रॉब्लम, तलाक और बेरोजगारी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। (देखें - तनाव कम करने के उपाय योगा से )

6. ड्रग्स के सेवन से (By Drug Use)

कई बार नशीले पदार्थों का सेवन करने की वजह से भी इंसान को सिजोफ्रेनिया हो सकता है। इन ड्रग्स में मरिजुआना और एलएसडी का नशा करने वालों को सिजोफ्रेनिया होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा ऐसे लोग जो सिजोफ्रेनिया का इलाज करवा रहे हैं या फिर किसी अन्य मानसिक बीमारी से परेशान हैं। वह अगर गांजे का सेवन करते हैं तो सिजोफ्रेनिया की बीमारी उन्हें अपनी चपेट में ले सकती है। कुछ रिसर्चर मानते हैं कि कुछ दवाओं जैसे स्टेरॉयड और स्टिमुलेंट्स के सेवन से भी ये मानसिक बीमारी हो सकती है।

कितना खतरनाक है सिजोफ्रेनिया? (How Dangerous Is Schizophrenia)

  • सिजोफ्रेनिया को मानसिक बीमारियों में सबसे खतरनाक माना जाता है। 
  • सिजोफ्रेनिया का अगर सही इलाज न किया जाए तो करीब 25 फीसदी मरीजों के आत्महत्या करने का खतरा होता है। भारत में विभिन्न डिग्री के सिजोफ्रेनिया से लगभग 40 लाख लोग पीड़ित हैं। 
  • सिजोफ्रेनिया का इलाज न करवा पाने वाले करीब 90 प्रतिशत रोगी भारत जैसे विकासशील देशों में हैं। 
  • अगर बात पूरी दुनिया की करें तो दुनिया भर में सिजोफ्रेनिया के करीब ढाई करोड़ मरीज हैं। सिजोफ्रेनिया के आंकड़ों की बात करें तो प्रति 1000 व्यस्कों में से ये बीमारी 10 लोगों को हो सकती है। 
  • इस बीमारी के आम शिकार ज्यादातर 16-45 आयु वर्ग के लोग होते हैं।

सिजोफ्रेनिया क्या लाइलाज है? (What Is Schizophrenia)

इस दुनिया में कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं है। जरुरत है तो सिर्फ मरीज की इच्छाशक्ति और सही इलाज की। सिजोफ्रेनिया की बीमारी का भी इलाज संभव है। मनोवैज्ञानिक इस बीमारी के इलाज के लिए काउंसलिंग, साइकोथेरेपी और थेरेपी सेशन की मदद लेते हैं। 

साइकोलॉजिकल काउंसलिंग से सिजोफ्रेनिया के लक्षणों को ठीक करने में मदद मिलती है। सिजोफ्रेनिया गंभीर मानसिक बीमारी हैसही इलाज मिलने पर सिजोफ्रेनिया के मरीज जल्दी ही स्वस्थ होकर सामान्य जिंदगी बिता सकते हैं। सही इलाज से सिजोफ्रेनिया के लक्षण जल्दी ही दूर होने लगते हैं। हलांकि ज्यादातर मामलों में मरीजों को इन लक्षणों से छुटकारा पाने में लंबा वक्त लग जाता है।

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