खून की कमी के कारण, लक्षण, कमी से होने वाले नुकसान -
खून की कमी होना हमारे शरीर के लिए काफी नुकशान दायक हो सकता है, क्योकि खून की कमी से होने वाले नुकसान सीधे हमारे जीवन को प्रभावित करते है . खून की कमी के लक्षण यदि आपमे अगर दिखाई दे रहे है तो कृपया इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़े क्योकि यदि हमारा शारीर एक गाडी है तो शारीर में बहने वाला खून इसका इंधन है . आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे खून की कमी के कारण, खून की कमी के लक्षण, खून की कमी से होने वाले नुकसान और इससे जुडी कुछ सामान्य पर महत्वपूर्ण जानकारी .
खून की कमी के रूपरेखा-
- खून की कमी
- खून की कमी के कारण
- खून की कमी के लक्षण
- खून की कमी में याद रखिए
सबसे पहले जानते है खून की कमी आखिर है क्या और इसे क्या कहा जाता है-मनुष्य शरीर में रक्त कणों की संख्या में कमी या लाल रक्त कणों (R. B.C) में खून हीमोग्लोबिन की मात्रा में कमी को अनीमिया या हिंदी में रक्ताल्पता कहते हैं।
खून की कमी के कारण -
- अधिक मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं का कम बनना रक्त क्षीणता का एक प्रमुख कारण है।
- चोट लगने पर अत्यधिक खून बह जाने से रक्ताल्पता हो सकती है ।
- फोड़े-फुंसियों या बवासीर से खून बहना और महिलाओं में मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव हो जाना हो सकता है।
- पेट में लौह और प्रोटीन को पचाने के लिए आवश्यक पाचक अम्ल की कमी भी रक्तक्षीणता का कारण बन सकती है।
- आँतों में होने वाले कृमि यथा अंकुश कृमि,० पिन कृमि, केंचुआ एवं फीता कृमि रक्त और विटामिंस को खा जाते हैं।
- अधिक मैथुन, श्वेत प्रदर, क्षय, यकृत एवं तिल्ली का ठीक-ठीक काम न करना कुपोषण, भोजन से विटामिंस की कमी टाइफॉइड ज्वर में आँतों में घाव हो जाने सेरक्ताल्पता की सिकायत हो सकती है
- पौष्टिक खाद्य-पदार्थों की कमी, संक्रमण रोग (यथा - मलेरिया, टाइफॉइड, डिफ्थीरिया, न्यूमोनिया आदि कारणों से अनीमिया का रोग) हो जाता है ।
- प्रमुख कारण लौह तत्व वाली चीजों का उचित मात्रा में सेवन न करना।
खून की कमी के लक्षण -
- थकान, ऊर्जा की कमी, और उनीदापन होने की शिकायत करता है। अन्य लक्षण व्यक्ति दुर्बल दिखाई देने लगता है और महसूस भी करता है .
- कम उम्र में ही झुर्रियाँ पड़ने लगती हैं। आँखों में चमक नहीं रहती है। आँखें थक नजर आती हैं।
- स्मरण शक्ति का ह्रास (Loss of memory)
- हल्की थकान से ही हृदय की धड़कन में वृद्धि .
- सिर दर्द का रहना ।
- जयदा ही चिड़चिड़ापन आना
- घाव धीमी रफ्तार से ठीक होते हैं।
- त्वचा एवं श्लेष्मिक कला पीली दीखने लगती है।
- नाखून भुरभुरे हो जाते हैं। मुँह के किनारों पर घाव भी हो सकते
- आँखें धँसी हुई रहना ।
- मुँह एवं जीभ सफेद ।
- हाथों-पैरों के नाखून सफेद एवं रक्तशून्य दिखाई देते हैं।
- थोड़े परिश्रम से हाँफना, श्वास कष्ट, हाथ-पैर फूलना, शरीर का तापक्रम औसत से कम, हाथ-पैर में जलन,
- किसी-किसी में दौरे पड़ना अधिक आदि लक्षण भी हो सकते हैं। हाथ-पैरों में चींटी सी चलना या सुन्न पड़ना आदि.
याद रखिए -
- देश में अनीमिया का सबसे बड़ा कारण विशेषकर स्त्रियों में 'लौह की कमी' (Iron) deficiency) होना है। अधिकतर स्त्रियाँ शाकाहारी होती हैं और अपने भोजन में लौहयुक्त पदार्थ जैसे- मांस, जिगर (कलेजी), गुर्दे एवं अंडे आदि नहीं ले पातीं, जबकि दूध, हरी सब्जियाँ, ताजे फल तथा मटर आदि लौहयुक्त भोजन दुर्भाग्य से निर्धन तथा मध्यम वर्ग के लोग आवश्यकतानुसार नहीं ले पाते और लौह की कमी के शिकार हो जाते हैं।
- भारत में निर्धन एवं मध्यम वर्ग की स्त्रियों के बच्चे अधिक होते हैं, जिससे उनमें लौह की आवश्यकता सर्वाधिक होती है और उनमें निरंतर रक्तस्व एवं गर्भ के कारण रक्तहीनता बनी रहती है।
- अधिकतर स्त्रियों को मासिक धर्म की अनियमितता तथा रक्त के अधिक निकल जाने से भी रक्तहीनता हो जाती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को 1 से 2 वर्ष की आयु तक स्तनपान कराया जाता है, और अधिक समय तक स्तनपान कराने तथा आवश्यकतानुसार लौहयुक्त भोजन न ग्रहण करने से 'लौह की कमी वाली रक्ताल्पता हो जाती है।
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