आमाशयिक प्रसार (DILATION OF STOMACH)
आमाशयिक प्रसार किसे कहते हैं - यदि किसी व्यक्ति का आमाशय पूर्व की अपेक्षा बढ़ जाए और अपना कार्य सुचारू रूप से न करे सके तो उसे 'आमाशयक प्रसार' (Dilation of Stomach) कहते हैं। अथवा बहुत दिनों तक आमाशय के गह्वर के फैलने को ही 'आमाशय प्रसार' कहते हैं। इसमें पेट आगे को निकल आता है।
आमाशयिक प्रसार - इसे मेदे का फैल जाना, आमाशय का फूलना, एवं आमाशयिक विस्फार आदि नामों से भी जाना जाता है।
आमाशयिक प्रसार के प्रमुख कारण (Major causes of gastric expansion):-
- रोग के सही कारणों का पता नहीं लगने पर ।
- अक्सर ज्यादा खाने-पीने के कारण आमाशय के नीचे का मुख बंद हो जाता है और इस 'प्रकार पेट बढ़कर रोग उत्पन्न हो जाता है।
- जन्मजात आमाशय की दीवार का दुर्बल होना ।
- कोमल स्वभाव के व्यक्तियों में अग्निमांद्य एवं अजीर्ण होने पर आमाशय बढ़ जाता है।
- आमाशय के मार्ग में अवरोध एवं रुकावट ।
- उदर का ऑपरेशन होने के पश्चात् बिना किसी कारण के आमाशय विस्तृत हो जाता है ।
- तीव्र संक्रामक ।
आमाशयिक प्रसार के प्रमुख लक्षण (Major symptoms of gastric expansion):-
- अधिक खाने पर भी पेट न भरना। पेट में अशांति एवं अफारा।
- दोपहर का खाया हुआ भोजन शाम को वमन (Vomitting) के रूप में निकलता है।
- वमन का रंग कालापन लिए हुए होता है और इसमें खट्टी बदबू सी रहती है।
- आगे रोगी थोड़ा भोजन करने पर ही तृप्त हो जाता है।
- शरीर में अत्यंत दुर्बलता की अनुभूति ।
- शरीर के साथ-साथ आमाशय भी अधिक क्षीण एवं दुर्बल ।
- आमाशय अधिक फूलने पर रोगी का पेट फूल जाता है।
- आमाशय की अनुलोमन शक्ति का ह्रास।
आमाशयिक प्रसार की पहचान (gastric dilatation detection):-
- आमाशय में भोजन देर तक रुका रहने से उत्क्लेश, वमन आदि लक्षणों की उत्पत्ति मिले तो आमाशय विस्तृति समझनी चाहिए।
- आमाशय को ठोंकने पर आमाशय बढ़ा हुआ प्रतीत होता है।
- 'गैस्ट्रिक एनालिसिस' करने पर प्रातः काल भी आमाशय में भोजन का अंश मिलता है।
- वमन के अंश को कुछ देर रखकर देखने | पर उसमें 3 स्तर दिखाई देते हैं।
1. पहले स्तर में - भूरे रंग का स्तर तथा फेन ।
2. दूसरे स्तर में प्रथम स्तर के नीचे कीच जैसा स्तर ।
3. तीसरे स्तर में-अंत में खाद्य का अंश ।
आमाशयिक प्रसार का परिणाम (Consequence of gastric dilatation):-
- बहुत अधिक खाने से पेट (आमाशय) की गुहा (केविटी-Cavity) बेढंगे रूप से फैल जाती है जिससे उसके अंदर का क्षेत्र बहुत अधिक बढ़ जाता है और पेट आगे को निकल आता है।
- जैसा कि मथुरा के चौबे एवं पण्डों का पेट देखने को मिलता है।
- ये लोग सीमा से कहीं अधिक खाते हैं।
- तीव्रावस्था में जब अकस्मात सहसा आमाशय विस्तृत हो जाए, ठंडा पसीना आने लगे और शरीर ठंडा हो जाए तो 75% मृत्यु संभव।
- शरीर के अन्य अंग भी खराब हो जाते हैं। कभी-कभी मूर्छा होकर उसमें मृत्यु ।
आमाशयिक प्रसार के लिए पथ्य एवं सहायक चिकित्सा (Dietary and supportive therapy for gastric distension):-
- लघु एवं सुपाच्य आहार। तरल पदार्थ कम से कम दें। भोजन के 1 घंटे पश्चात् तक दायीं करवट लेटे रहना ।
- प्रातः सायं दूध, दोपहर को लघु आहार।
- उग्रावस्था में 'पेप्टीनाइज्ड (Peptinized) दूध, मांस रस, अधपका अंडा देना चाहिए। सहायक चिकित्सा के रूप में- आमाशय के अकस्मात फूल जाने पर 'रायल की नलिका' को (Gastric laevage & aspiration) नाक में प्रवेश कर आमाशय का प्रक्षालन (Stomach wash) करना चाहिए।

