हाइपरटेन्शन (HYPERTENSION or High Blood Pressure )
हाइपरटेन्शन बिमारी की समस्या आज के समय में हाइपरटेन्शन आम समस्य बन गयी हैं. आज की जानकारी हाइपरटेन्शन या रक्तचाप वृद्धि, उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) के बारे में हैं, हाइपरटेन्शन के बारे में सभी जानकारिया आज आपको इस आर्टिकल में मिलेगा.
- हाइपरटेन्शन की इस आर्टिकल में हमने बताया हैं-
- हाइपरटेन्शन क्या हैं?( Definition of hypertension)
- हाइपरटेन्शन के समय रक्तचाप का मान कितना होता हैं ?
- ब्लड प्रेशर को किससे माप जाता हैं?
- हाइपरटेन्शन के प्रमुख कारण क्या हैं?
- हाइपरटेन्शन के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
- हाइपरटेन्शन की पहचान कैसे करें?
- हाइपरटेन्शन की चिकित्सा विधि क्या हैं?
हाइपरटेन्शन क्या हैं?( Definition of hypertension):-
अति रक्त दाब को हाई ब्लड प्रेशर के नाम से भी जाना जाता है। उच्च रक्तचाप जिसमें सिस्टोलिक पारे के 140 मि. मी. से ऊपर डायस्टोलिक पारे के 90 मि. मी. से ऊपर होता है।
हाइपरटेन्शन के समय रक्तचाप का मान कितना होता हैं ?:-
स्वस्थ मनुष्यों में औसत 110 से 140 मि. मी. पारे (Hg) सिस्टोलिक तथा 60 से - M.M. Hg डायस्टोलिक होता है। उपरोक्त सीमाओं के ऊपर उच्च रक्तचाप तथा निम्न रक्तचाप होता है।
यह सामान्य बात तो सब जानते हैं की प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति में (हाइपरटेन्शन) रक्त का दबाव पृथक होता है। यह दबाव आयु समय आवेश (Emotion), कुछ सीमा तक भोजन और धूम्रपान से प्रभावित होता है। क्लीनिक शैय्या पर विश्राम करने के उपरांत प्रातः काल लिए गए रक्तदाब (Blood Pressu )अंतर होता है।
ब्लड प्रेशर को किससे माप जाता हैं?:-
ब्लड प्रेशर मापने के मशीन को रक्तचाप मापक यंत्र, बी. पी. यंत्र या 'Sphygmomanometer' कहलाता है।'Sphygmomanometer' की सहायता से हम ब्लड प्रेशर को आसानी से मापा जा सकता हैं और इसका इस्तिमाल सभी अस्पतालों में किया जाता हैं.
उच्च रक्तचाप सारांश में किसी भी कारण से उत्पन्न बढ़े हुए दाब को अतिर दाब (High Blood Pressure) अथवा हाइपरटेंशन कहते हैं। जब किसी युवा व्यक्ति में विश्राम एवं बैठी हुई अवस्था में घमनीगत दाब (Arterial Pressure) 160/0 मि. मी. अथवा उससे अधिक मिले तब उक्त व्यक्ति को उच्च रक्तदाब से ग्रसित मानना चाहिए।
हाइपरटेन्शन के प्रमुख कारण क्या हैं? (What are the main causes of hypertension):-
- पौष्टिक भोजन की प्रचुरता, किन्तु शारीरिक मेहनत की कमी होना।
- जरूरत से ज्यादा चिन्ता एवं मानसिक परिश्रम का होना।
- कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार अत्यधिक प्रोटीन युक्त आहार का ग्रहण करने से।
- पहले से वृक्क सम्बन्धी गड़बड़ी पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी, यकृत विकार, कब्ज, अधिक भोजन करने से.
- अधिक से अधिक मात्रा में शराब पीना अति स्त्री सहवास, मूत्र ग्रन्थि की बीमारी, मधुमेह, मोटापा, हृदय की बीमारी, गठिया, सिफिलिस, जीर्ण वृक्क शोथ, एड्रीनल एवं पिट्यूटरी बॉडी के प्रभृति कारणों से रक्त का दबाव बढ़ जाता है।
- मसालेदार और तीक्ष्ण आहार का प्रयोग, आचार, तेल, खटाई के सीमा से बाहर सेवन करने से रक्त दाब बढ़ जाता है।
हाइपरटेन्शन के प्रमुख लक्षण क्या हैं? (What are the main symptoms of hypertension):-
सुरवात में हाइपरटेन्शन के लक्षण कुछ सी तरह हो सकते हैं जैसे - घबराहट चिड़चिड़ापन, दुर्बलता, अनिद्रा आदि ऐसे होते हैं जिनको मनोवैज्ञानिक विकारों से पृथक करना कठिन होता है। बाद में पाये जाने वाले हाइपरटेन्शन के लक्षण;-
- सिर दर्द भ्रम, स्मरण शक्ति और ध्यान केन्द्रित करने की सामर्थ्य में कमी।
- सिर में चक्कर, सदैव आलस्य का बने रहना, शारीरिक एवं मानसिक परिश्रम से अनिच्छा।
- रात को नींद अच्छी न आना अथवा बिल्कुल न आना
- इसके साथ ही हृदय में दर्द, हाथ-पैर में झनझनाहट ।
- सामान्य रूप से इसे रोग के आरंभ में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं पाया जाता, केवल रक्त दाब ही बढ़ा होता है।
- आरंभ में रक्त दाब कभी-कभी बढ़ता है और आवेश, श्रम तथा ठंड लगने आदि कारणों से हो जाता है।
कई व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिनमें आए दिन रक्त दाब कम-अधिक होता रहता है। आज180 है तो कल 140 होगा। ऐसे रोगी मानसिक रक्त दाबाधिक्य से पीड़ित होते हैं। इस रोग में हृदय (Heart) और गुदों (Kidneys) में विकृति बहुत बाद में आती है।
हाइपरटेन्शन में विशेषकर सिर की पिछली ओर पीड़ा होन उअर इसके लक्षण।
- कभी-कभी सिर की पीड़ा असहा
- मस्तिष्क भारी-भारी सा।
- आँखों के सामने अंधेरा छा जाना अथवा दृष्टि का जाते रहना।
- आँखों के अंतरीय पटल में रक्तस्राव (Bleeding) के लक्षण |
- रोगी का नित्य दुर्बल होते जाना एवं काम करने की शक्ति में कमी। D रात में अधिक और बार-बार मूत्र ।
- मस्तिष्क की धमनी के फट जाने का भय अतः मूर्च्छा, पक्षाघात एवं मृत्यु की आशंका।
याद रखिए- साधारण तथा औसत रक्त दाब रहने पर रोगी को किसी प्रकार का आभास नहीं होता है जबकि इनका पता अन्य किसी भी कारण के लिए रोग का रक्तचाप मापते समय चलता है।
हाइपरटेन्शन की पहचान कैसे करें? (diagnosis of hypertension):-
हाइपरटेन्शन या उच्च रक्त दाब की पहचान पूर्णतया रक्त दाब (Blood pressure) के मापन द्वारा हो पाता है। इसके लिए निरन्तर रक्त दाब मापन आवश्यक है। इसमें 3 दिनों तक विविध अवस्थाओं में रक्त दाब बढ़ा हुआ मिले तभी उक्त रोगी को अतिरिक्त दाब (Hypertension) से पीडित समझना चाहिये।स्वस्थ व्यक्ति का विश्रामावस्था में 125 से 135 रक्त दाब होता है किन्तु इसमें 150 से 300 तक रक्त दाब हो जाता है।
हाइपरटेन्शन का परिणाम(result of hypertension):-
रक्त दाब की अति वृद्धि वाले रोगी को खतरा रहता है। सिर में धमनी फटने से मृत्यु हो सकती है। ऐसे रोगियों को हृदय की अति वृद्धि होती है। अधिक परिश्रम से हृदय विस्फार हो जाने पर जीवन लड़खड़ाता सा चलता है। किसी समय हृदय गति अवरोध से मृत्यु हो सकती है। 0 प्रारम्भ में रोग आसानी से काबू में आ सकता है। उसे 900 से 100 MM Hg के मध्य ही रखने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है
अधिक नीचे लाने का प्रयत्न नहीं करना चाहिये। एक औषधि के प्रयोग करने पर यदि कुप्रभाव हो तो दूसरी औषधि बदल दें। कुप्रभावों में नाक का बंद होना, नपुंसकता, बुरे स्वप्न, नाक की रुकावट एवं अतिसार, होते हैं।
हाइपरटेन्शन की चिकित्सा विधि क्या हैं? (Hypertension therapy):-
- हृदय रोग हो चुका है तो रोगी को परामर्श हेतु विशेषज्ञ अथवा अस्पताल भेज दें।
- यदि रोगी के शरीर का भार बहुत अधिक है तो विभिन्न विधियों से कम करें।
- रोगी को शान्तिदायक औषधियाँ आवश्यक। औषधि का चयन रोगी की दशा को देखते हुए करना चाहिए कि उसके कुप्रभाव बहुत कम हों।
- इस प्रकार की औषधियों की आवश्यकता रोगी को जीवन पर्यन्त तक हो सकती है। अतः रक्तचाप का संतुलन बनाये रखना ही पर्याप्त होता
- पथ्यापथ्य एवं सहायक चिकित्सा पथ्य अल्प, लघु एवं लवण रहित आहार रक्त दाब को कम करने में सहायक होते हैं। जिस समय अधिक व्यस्त कार्यक्रम रहता है। उस समय 'अम्लीय पेय द्रव से बहुत लाभ अपथ्य माँस, मटन, नमकीन, माँस, मछली आदि उत्तेजक तथा प्रोटीन युक्त आहार का पूर्ण निषेध आवश्यक है।
- शराब पीना सर्वाधिक हानिकारक है। रोगी को भोजन में नमक बिल्कुल बंद कर दिया जाता है जो कि उचित नहीं है यदि कुछ रोगी इसका पालन भी करते हैं तो भोजन अरुचिकर होने से उसका शरीर कमजोर पड़ने लगता है।
रोगी को लेसिक्स (Lasix) जैसे 'डायूरेटिक्स' देने के कारण मूत्र के बार-बार आने से वैसे भी शरीर में नमक की कमी हो जाती है। यदि नमक बिल्कुल बंद कर दिया जाये तो अत्यधिक थकान का अनुभव होने लगता है। कमजोरी आ जाती है अतः नमक (Salts) को भोजन में बिल्कुल बंद न करने की बजाय अल्प मात्रा में लेने की सलाह देनी चाहिये।

