हाइपोटेन्शन(Hypotension)/निम्न रक्तचाप
हाइपोटेन्शन(Hypotension) /निम्न रक्तचाप क्या हैं?
हाइपोटेन्शन की स्थिति शरीर में तब बनती हैं जब हमारा ब्लड प्रेशर जरूरत से कम हो जाता हैं, हाइपोटेन्शन हालत में हमारे मस्तिष्क और हमारे ह्रदय तक खून की सही मात्रा नहीं पहुच पाती और इसे ही निम्न रक्तचाप/हाइपोटेन्शन(Hypotension) के नाम से जाना जाता हैं. आज के इस आर्टिकल में हम हाइपोटेंशन इन हिंदी Hypotension in Hindi के बारे में जानेंगे.
हाइपोटेन्शन की रुपरेखा:-
- हाइपोटेन्शन को और क्या कहा जता हैं?
- हाइपोटेन्शन में रक्तचाप का मान कितना होता हैं?
- हाइपोटेन्शन के प्रमुख कारण क्या-क्या हैं?
- हाइपोटेन्शन के प्रमुख लक्षण क्या-क्या हैं?
- हाइपोटेन्शन की पहचान कैसे करें?
- हाइपोटेन्शन रोग का परिणाम?
- हाइपोटेन्शन की चिकित्सा विधि क्या हैं?
हाइपोटेन्शन को और क्या कहा जता हैं?
हाइपोटेन्शन को अन्य नाम जैसे - हीन रक्तदाब, न्यून रक्तदाब, अल्प रक्तचाप, लो ब्लड प्रेशर (Low Blood Pressure) आदि नामो से भी जाना जाता हैं. असामान्य रूप से कम धमनीय रक्तदाब परिचय-प्रकुचनीय तथा अनुशिथिलनीय रक्तदाब का सामान्य से कम हो जाना अल्प रक्तदाब (Low Blood Pressure) कहलाता है।
हाइपोटेन्शन में रक्तचाप का मान कितना होता हैं?
हाइपोटेन्शन में जब वयस्क व्यक्ति में सिस्टोलिक रक्तचाप 90mm Hg से नीचा बना रहे तो | उसको 'अल्प रक्तदाब' समझा जाता है जबकि कुछ लोगों में रक्तचाप इतना ही रहता है, परन्तु उनको कोई दिक्कत नहीं होती। यह स्तब्धता (Shock) की | पहली अवस्था हो सकती है।
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हाइपोटेन्शन के प्रमुख कारण क्या-क्या हैं?
- कभी-कभी आनुवंशिक (Hereditary)। पूरे परिवार में सम्भव ।
- हृदय रोग विशेषकर वाम निलय का हृद-पात। हृद गति का बंद होना।
- एडिसन का रोग, राजयक्ष्मा (T.B.). हीन पोषण।
- रक्त के आयतन में कमी (जैसे-रक्तस्राव एवं निर्जलीभवन) ।
- शोक एवं निपात (Collapse) की अवस्था में हाइपोटेन्शन ।
- अत्यधिक थकावट एवं अनेक ज्वर का होना ।
- डिफ्थीरिया, टी.बी. एवं रक्ताल्पता में हाइपोटेन्शन ।
- मायोकार्डियल इन्फार्कशन, इम्फायसीमा, एक्यूट कार्डियक फेल्योर।
- अन्य रोग अति इन्सुलिनता, स्तब्धता (Shock), धमनी रोध। हीन रक्त दाब की अवस्था पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक मिलती है।
हाइपोटेन्शन के प्रमुख लक्षण क्या-क्या हैं?
- आलस्य का आना स्वाभाविक होना
- शरीर का निरंतर दुर्बल होते जाना ।
- सिर चकराने की समस्यायों का आना।
- सिर का भारीपन महसूस होना। ठंडे पसीने का आना।
- आये दिन मन का दुखी रहना हाइपोटेन्शन का कारण ।
- शरीर में अनिद्रा एवं थकान का होना ।
- कानों में धूं-धूं की आवाज आना भी हाइपोटेन्शन के लक्षण हैं ।
- दिल डूबना (Sinking) | अचानक दिल की धड़कन बढ़ना।
- हमारी शरीर की शक्ति का निरंतर घटते जाना।
- मस्तिष्क अवसाद या बातें भूल जाने की समस्या ।
- उठने-बैठने तथा लेटने पर अंगों में शून्यता आ जाना। झुनझुनी उठना ।
- लाक्षणिक अल्प रक्त दाब हाथ-पैरों का ठंडा पड़ जाना।
- श्वास कष्ट, शरीर तापमान अवसामान्य त्वचा पाण्डुता (Pallor) युक्त।
हाइपोटेन्शन के लक्षण में याद रखें-
कभी-कभी मूर्च्छा की शिकायत होती है। मूर्च्छा प्रायः लेटी हुई अवस्था अथवा खड़े होने पर आती है। मस्तिष्क थोड़ी भी मेहनत से चिड़चिड़ा हो उठता है तथा सिर दर्द बना रहता है।
हाइपोटेन्शन की पहचान कैसे करें?
हाइपोटेन्शन में किसी युवक का रक्त दाब (B. P.) न्यून (Low) तब माना जाता है जबकि उसका सिस्टोलिक ब्लड प्रशर 110 मि.मी. सेकम हो जाता है।
नब्ज धीमी एवं छोटी उंगलियों से आसानी से दबाई जा सकती है। रोगी जरा सा परिश्रम करने पर थक जाता है उसे 'गश' आ जाता है इन लक्षणों से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। शारीरिक परीक्षण में कोई खास बात नहीं मिलती है, केवल रोगी दुर्बल एवं सुस्त हो सकता है।
हाइपोटेन्शन रोग का परिणाम?
- उचित चिकित्सा से रोगी का जीवन सरलता से चलता रहता है।
- रोग के अधिक दिन तक चलते रहने से सिर दर्द बराबर बना रहता है और उसका सिर चकराया करता है।
- न्यून रक्त दाब (Low Blood Pressure) की उत्पत्ति प्रायः केशिकाओं के विस्फारण (Capillary dilatation) के कारण होती है।
हाइपोटेन्शन की चिकित्सा विधि क्या हैं?
- स्वास्थ्य के कारण पर ध्यान आवश्यक। धडकन की गड़बड़ी अथवा हृदय स्थान के अत्यधिक कमजोर होने पर उसके अवसाद को मिटाने एवं शक्तिदायक औषधियों (Tonic) की व्यवस्था करनी चाहिये।
- यदि रोग प्लीहा की खराबी तथा आँतों के सम्यक कार्य न होने से है तो तत्सम्बन्धी व्यवस्था करनी चाहिये । चिकित्सा मुख्य रूप से कारण पर आधारित |
- रोगी को मनोविकारों से बचायें। कब्ज (Constipation) न होने दें।
- हाइपोटेन्शन में आहार एवं सहायक चिकित्सा
- सामान्य स्वास्थ्य की ओर ध्यान विशेष आवश्यक।
- आहार में पौष्टिक पदार्थों का योग तथा विटामिनों की प्रचुरता करने से रोग दूर हो
- सकता है। शारीरिक एवं मानसिक विश्राम पर्याप्त मात्रा में मिलना चाहिये।
- अधिक देर तक खड़े रहना, गरम एवं नम वायुमंडल में रहना तथा गरम पानी से स्नान
- आदि से बचना चाहिये। ज्यादा प्रोटीन युक्त भोजन दें। भोजन में नमक की मात्रा अधिक दें।
हाइपोटेन्शन के सन्दर्भ में आज इतनी जानकारी हमने आपको दी इस आर्टिकल में हमने हाइपोटेन्शन से जुड़े कुछ सवाल जैसे हाइपोटेन्शन(Hypotension) /निम्न रक्तचाप क्या हैं? हाइपोटेन्शन को और क्या कहा जता हैं? हाइपोटेन्शन में रक्तचाप का मान कितना होता हैं? हाइपोटेन्शन के प्रमुख कारण क्या-क्या हैं? हाइपोटेन्शन के प्रमुख लक्षण क्या-क्या हैं? हाइपोटेन्शन की पहचान कैसे करें? हाइपोटेन्शन रोग का परिणाम? हाइपोटेन्शन की चिकित्सा विधि क्या हैं? इनके जवाबो को जाना. आपको यह जानकारी अच्छी और उपयोगी लगी हो तो शेयर जरूर करें.

