Active Study Educational WhatsApp Group Link in India

यकृत वृद्धि / जिगर का बढ़ जाना (ENLARGEMENT OF THE LIVER)

यकृत वृद्धि को सामान्य भाषा में जिगर का बढ़ना कहते हैं। यकृत के नए प्रदाह के पश्चात उसके परिणामस्वरूप अथवा यकृत में बार-बार रक्त संचार होते रहने पर यकृत का पुराना प्रदाह होकर यकृत की वृद्धि हो जाती है।

यकृत में वृद्धि क्यों होता हैं | इसके लक्षण कारण और उपाय

यकृत वृद्धि से जुड़े इन सवालों के जवाब जानेंगे:-

  • यकृत वृद्धि के प्रमुख कारण
  • यकृत वृद्धि के प्रमुख लक्षण
  • यकृत वृद्धि के विशेष कारण
  • यकृत वृद्धि के रोग की पहचान
  • यकृत वृद्धि के रोग का परिणाम

यकृत वृद्धि के प्रमुख कारण:- 

  1. अधिक मद्यपान करना ।
  2. अधिक मसालेदार भोजन का सेवन करना।
  3. अधिक ऐशो-आराम का जीवन बिताना ।
  4. संक्रामक ज्वरयकृत विद्रधि।
  5. पित्ताश्मरी एवं पित्ताशय शोध से।
  6. पारद अथवा तीव्र क्षार से युक्त औषधियों का निरंतर प्रयोग ।
  7. सामान्य कामला (Jaundice) एवं मूषक विष

यकृत वृद्धि के प्रमुख लक्षण:- 

  • अग्निमांद्य एवं पेट के दाहिनी तरफ भारीपन महसूस होना ।
  • जिव्हा (Tongue) पर सफेद लेप का बन जाना 
  • मुँह का स्वाद कडुवा हो जाना 
  • आँखों में पीलापन। मलावरोध अथवा अतिसार अजीर्ण एवं बदहजमी 
  • कभी-कभी बुखार भी आ जाया करते हैं 
  • पेट का फूल जाना (Flatulence) (यह भी पढ़े - भूख न लगने की वजह)

यकृत वृद्धि के विशेष कारण:-

  • पेट के दाहिनी तरफ भारीपन
  • जिव्हा (Tongue) पर सफेद लेप ।
  • मुँह का स्वाद कडुवा
  • आँखों में पीलापन। मलावरोध अथवा अतिसार
  • अजीर्ण एवं बदहजमी, कभी-कभी बुखार।
  • पेट फूल जाना (Flatulence) |
  • हृदय, फेफड़ा एवं गुर्दे के जीर्ण रोग।
  • पित्त प्रणाली का अवरोध 
  • पित्तकारक द्रव्यों का अधिक सेवन
  • यकृत प्रदाह के परिणामस्वरूप। 
  • लाल मिर्च, धनिया, मेथी, लींग, जीरा, नमक, मसालेदार सब्जियाँ, चाट आदि के अधिक खाने से।

यकृत वृद्धि के रोग की पहचान:- 

रोगी को लिटा कर हाथ की अंगुलियों से सबसे नीचे वाली पसली के बराबर जिगर को दबाया जाए तो वह कड़ा प्रतीत होता है और सुई के समान चुभने वाला दर्द रोगी महसूस करे तो समझना चाहिए कि रोगी का जिगर बढ़ा हुआ है।

उचित चिकित्सा न करने पर लिवर सिरोसिस, यकृत विद्रधि एवं कामला की आंशका। पित्तवर्धक वस्तुओं के प्रयोग से जिगर में पुराना प्रदाह होकर जिगर बढ़ जाता है।

इसके लिए मृदु विरेचन आवश्यक है। 

  • दीपन, पाचन, रेचक तथा विशिष्ट यकृत
  • विकार नाशक औषधियों की पूर्ण व्यवस्था
  • यकृत वृद्धि में सहायक चिकित्सा एवं पथ्यापथ्य
  • पूर्ण विश्राम आवश्यक |
  • यकृत (Liver) पर गर्म सेंक । पथ्य के रूप में

आज के इस आर्टिकल में हमने यकृत वृद्धि से जुड़े कुछमहत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने की कोशिस की. उम्मीद है की यकृत वृद्धि से जुडी जानकारी आपके लिए उपयोगी हो.

शेयर करें: