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बवासीर / पाइल्स (PILES)

बवासीर / पाइल्स(PILES)रोग में मलद्वार के भीतर या बाहर छोटे-छोटे ट्यूमर या अर्बुद जैसे दाने पैदा हो जाते हैं। इन्हें हिन्दी में बवासीर के मस्से और अंग्रेजी में पाइल्स कहते हैं। पाइल्स या बवासीर को अर्श, मस्सा, कील गुदजा, गुदकीलक, दुर्गाम, हीमोरॉइड (Haemorrhoid) कहा जात हैं. 

पाइल्स क्यों होता हैं? कारण, लक्षण और उपचार को जाने

बवासीर / पाइल्स (PILES) के लिए रुपरेखा:- 

  • पाइल्स  का परिचय (Introduction to Piles)
  • बवासीर / पाइल्स(PILES)के कारण(due to piles)
  • बवासीर / पाइल्स(PILES)के लक्षण(symptoms of piles)
  • बवासीर / पाइल्स(PILES) की पहचान क्या हैं?
  • बवासीर / पाइल्स(PILES) के परिणाम(results of piles)
  • बवासीर / पाइल्स(PILES)  में क्या खाए(Piles diet )

पाइल्स  का परिचय (Introduction to Piles):- 

मलद्वार के भीतर अथवा बाहर सूजन और बकरी की घीसी जैसा एक तरह का मस्सा (tumor) पैदा हो जाने को बवासीर / पाइल्स(PILES)। शिरा का वेरीकोज अर्थात प्रसारण होकर बवासीर / पाइल्स बीमारी होती है।

इन मस्सों के अंदर छोटी-छोटी धमनियाँ रहती हैं। इन धमनियों में कुछ दिन तक खून जमता रहता है, जिससे वे होकर मोटी जाती हैं। बवासीर / पाइल्स(PILES) से जो खून गिरता है, वह आर्टीरियल होता है और म्यूकस मेम्ब्रेन की आर्टरी से आता है। एक बार में 4-5 औंस तक रक्त आता है।

बवासीर / पाइल्स(PILES)के कारण(due to piles):-

  • यकृत दोष के परिणामस्वरूप बहुत दिनों तक कब्ज की शिकायत ।
  • यकृत सिरोसिस (Liver Cirrhosis) की बीमारी से। 
  • हृदय की कुछ बीमारियाँ होने पर पाइल्स(PILES) के लक्षण देखने को मिलते हैं  । 
  • किसी रोग के कारण पाखाना करते समय अत्यधिक काँखना या जोर लगाना।
  • मूत्रनली की किसी बीमारी में पेशाब करते समय अधिक काँखना या जोर लगाना।
  • मलद्वार के भीतर स्ट्रिक्चर ।
  • डिस्पेप्सिया तथा किसी जुलाब की दवा का अधिक दिनों तक सेवन । 
  • बवासीर संबंधी नस (हिमोरॉयडैल शिरा) के अंदर ओवेरियन अथवा किसी ट्यूमर का दबाव । अथवा गर्भावस्था में जरायु का दबाव ।
  • मद्य, माँस, अंडा, केकड़ा, प्याज, लहसुन, मिर्च गर्म मसाले से बनी शाक-सब्जी या कोई खाद्य पदार्थ हद् से ज्यादा खाने एवं रात्रि जागरण आदि से ।
  • सदैव बेकार बैठे रहना एवं वंशगत दोष । नोट-मलाशय कैंसर, श्रोणि प्रदेश के अर्बुद, गर्भाशय भ्रंश आदि से भी अर्श होता है ।

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बवासीर / पाइल्स(PILES)के लक्षण(symptoms of piles):-

  • अर्श रोग 3 प्रकार का होता है- । एक्स्टरनल यानी बाहरी मस्से (Blind Piles) |
  • इंटरनल यानी रक्तस्रावी (रक्तार्श) पाइल्स भीतरी मस्से ।
  • मिक्स पाइल्स यानी भीतर-बाहर दोनों ओर मस्से ।
  • बाह्य (एक्स्टरनल) या ब्लाइन्ड पाइल्स जब मलद्वार की आकुंचन पेशी के बाहर अर्श होता है, तब वह चमड़े से ढका रहता है। इसमें मस्से बाहर होते हैं।
  • लक्षण इस प्रकार हैं मलद्वार में खुजली एवं सुरसुरी ।
  • कभी-कभी प्रदाह एवं दर्द होना भी पाइल्स(PILES)के लक्षण हो सकता हैं  ।
  • अंदर ओवेरियन अथवा किसी ट्यूमर का दबाव, अथवा गर्भावस्था में जरायु का दबाव ।
  • मद्य, मॉस, अंडा, केकड़ा, प्याज, लहसुन, मिर्च गर्म मसाले से बनी शाक-सब्जी या कोई खाद्य पदार्थ हद से ज्यादा खाने एवं रात्रि जागरण आदि से।
  • सदैव बेकार बैठे रहना एवं वंशगत दोष । नोट-मलाशय कैंसर, श्रोणि प्रदेश के अर्बुद, गर्भाशय भ्रंश आदि से भी अर्थ होता है।

बवासीर / पाइल्स(PILES) की पहचान कैसे करें(identification of piles):- 

  • बवासीर / पाइल्स(PILES) बहुधा 20 वर्ष की आयु में प्रारंभ होता है। पुरुषों में अधिक।
  • निदान में कोई कठिनाई नहीं। उपरोक्त लक्षणों के आधार पर निदान आसानी से हो जाता है।

बवासीर / पाइल्स(PILES) के परिणाम(results of piles):-

  • शुष्क अर्श (बादी बवासीर) अर्थात एक्स्टर्नल बवासीर / पाइल्स(PILES) का आक्रमण बार-बार होने से रोगी की गुदा संकुचित हो जाती है। साथ ही उस पर व्रण बन जाता है। 
  • यह व्रण आगे चलकर कैंसर में बदल जाता है। यह एक गंभीर अवस्था है।
  • खूनी बवासीर में रक्तस्राव होता है। अधिक रक्तस्राव होने से रोगी अतिशय दुर्बल हो जाता है।

बवासीर / पाइल्स (PILES) के लिए चिकित्सा विधि (piles treatment method):-

  • मूल कारण को दूर करें। 
  • औषधि का प्रयोग करके सदैव कोष्ठ साफ रखने का प्रयत्न करना चाहिए।
  • हल्का व्यायाम आवश्यक।
  • रक्तार्श की चिकित्सा ऑपरेशन द्वारा संभव शुष्कार्श के लिए ऑपरेशन आवश्यक नहीं। 
  • रक्त की कमी को दूर करने के लिए आयरन तथा लिवर एक्स्ट्रेक्ट का प्रयोग |

बवासीर / पाइल्स (PILES) में क्या खाए (Piles diet ):-

  • मक्खन, शर्करा अथवा मथा हुआ दही का सेवन करने से खूनी बवासीर ठीक होती है।
  • रोगी का खानपान और औषधि इस प्रकार की होनी चाहिए जो वायु का आनुलोमन करें. आग्न और बल को बढाएँ।
  • निषेध-माँस, अंडे, तथा गर्म मसाले से बनी चीजें लहसुन, प्याज, मादक द्रव्य, चाय, कॉफी, रात को जागरण।
  • सहायक चिकित्सा में पाखाने के समय जब मस्सा बाहर निकल आवे तो जल सौंच कर फिटकरी के टुकड़े को मस्से पर 4-6 बार फेर दें। इससे खून गिरना बंद हो जाता है।

बवासीर / पाइल्स(PILES) से जुडी इस आर्टिकल में हमने बवासीर / पाइल्स(PILES) से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर किया हैं, उम्मीद हैं की आपको यह जानकारी अच्छी और उपयोगी लगी हो तो इसे जरूरतमंद को जरूर शेयर करें.

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