अस्थमा (ASTHMA ) की पूरी जानकारी | Asthma Complete Information
अस्थमा (ASTHMA) को अन्य नाम जैसे- दमा श्वास रोग, तमक श्वास, श्वास की बीमारी, अस्थमा। आवेगी दुःश्वसन (Paroxysmal Dysopnoea) इसे ब्रॉन्क्रियल अस्थमा भी कहते हैं। श्वसनियों या श्वास नलिकाओं में ऐंठन आ जाने से उत्पन्न श्वास लेने में कठिनाई जिसमें साँय–साँय की आवाज निकलती है, साँस फूलना, दमा या अस्थमा कहलाता है।
अस्थमा से जुड़ी इन सभी जानकारियों को देखें-
- अस्थमा क्या हैं (What is asthma?)?
- अस्थमा के प्रमुख कारण (Major causes of asthma)
- अस्थमा के लक्षण (Symptoms of asthma)
- अस्थमा की पहचान कैसे करें (How to diagnose asthma)
- अस्थमा का परिणाम (Consequences of asthma)
- अस्थमा के लिए चिकित्सा विधि (Therapy for asthma)
अस्थमा क्या हैं (What is asthma?)?
अस्थमा एक बीमारी है, अस्थमा को दमा भी कहते हैं। अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नली में सूजन आ जाती है और इसी कारण लोगों को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। सर्दियों में अस्थमा बीमारी से पीड़ित लोगों की परेशानी काफी बढ़ जाती है और बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से तो इसके मामले और भी ज्यादा सामने आने लगे हैं
अस्थमा के प्रमुख कारण (Major causes of asthma):-
- अस्थमा मुख्य रूप से पुरुषों का रोग है। प्रकृति से विशेष रूप से प्रभावित होते हैं।
- आयु मायुक, संवेदनशील और बुद्धिमान व्यक्ति आक्रमण किसी भी आयु में। पर प्रथम आक्रमण विशेष रूप से 10-12 वर्ष की आधुनिक दृष्टि से इसे एक 'एलर्जिक रोग (Allergic disease) माना गया है।
- अस्थमा रोगी को किसी वस्तु के प्रति एलर्जी होती है। उसके सम्पर्क में आते ही दमे के समस्त लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं।
- गठिया' और 'सिफिलिस' दमा को उभारने चाले रोग होते हैं। ब्रांकाइटिस और यक्ष्मा (TB) भी सीधे इस रोग को पैदा करते हैं।
- नाक, स्वरयंत्र (Larynx), कंठ, छाती और फेफड़ों में कफ के सूख जाने से भी यह रोग पैदा होता है। प्रायः ऐसे रोगियों में कंठनली का प्रदाह पाया गया है अथवा बार-बार जुकाम, खाँसी से पैदा हो गया है।
- अस्थमा वस्तुतः विरासत में आने वाला रोग है। कभी-कभी रोगों के हुए रहने पर उनकी बाद की पीढ़ी में भी यह दमा आ सकता है। जैसे-हिस्टीरिया रोग है।
- कुछ परिवारों में यह रोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। जिन बच्चों को माँ का प्यार नहीं मिलता वे इसके शिकार हो सकते हैं।
- कुछ खाद्य पदार्थ भी माफिक न बैठने के कारण दमा (Asthma) पैदा कर सकते हैं। पेट में कब्ज और गैस बनने से दमा (Asthma) का दौरा पड़ सकता है।
- कम उम्र में ही बीड़ी-सिगरेट की लत लग जाने से भी अस्थमा हो सकता है। बच्चों में यह रोग आमतौर से 'खसरे और काली खाँसी होने के बाद हुआ फेफड़े कमजोर हो जाने की वजह भी हो सकता हैं.
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अस्थमा के लक्षण (Symptoms of asthma):-
- शरीर में बेचैनी, सुस्ती, नाक ठोड़ी में खुजली, भूख में कमी या पेट में अफारा आदि पहले से उत्पन्न होने लगते हैं।
- उसे दौरे का आभास होने लगता है। दौरे के समय 1. रोगी जाग जाता है, उसे अपना दम घुटता हुआ और सीना जकड़ा हुआ-सा मालूम होता है।
- अस्थमा रोगी खिड़कियाँ खोलकर दोनों हाथ उठा लेता है ताकि अधिक से अधिक हवा सीने के अंदर आ सके।
- सौंस लेने व छोड़ने में कष्ट होता है, साँस जल्दी लेता है। साँस निकलने में ज्यादा देर लगती है।
- साँस लेने व छोड़ने में साँय-साँय की आवाज आती है जो दूर बैठे व्यक्ति को सुनाई देती है। रोगी का चेहरा नीला या पीला पड़ जाता है और बड़ा घबराया हुआ होता है।
- गले की शिरायें फूल जाती हैं और रोगी पसीने से भीग सा जाता है। दौरे के अन्त में थोड़ा सा कफ निकलता है. जिसमें उबले हुए साबूदाने की तरह नन्हीं नन्हीं गोलियों जैसी होती हैं। ।
- कफ निकलते ही जैसे ही रोगी को कुछ दम मिलता है सोचता है. मरने से बच गये।
- दौरे के-समय रोगी को भय रहता है कि कहीं ऐसे समय दम रुक कर प्राण न निकल जाय। कफ निकलना शुरू होने पर दौरे की तेजी शान्त हो जाती है और जब कफ निकल चुकता है तो दौरा शान्त हो जाता है।
- अस्थमा रोगी को प्रायः बड़ी मात्रा में पीले रंग का पेशाब आता है और रोगी इसके बाद सुबह तक चैन से सो जाता है।
यह याद रखिए (Remember):-
- दमा के रोगी सभी समय अस्वस्थ नहीं रहते। दौरा होने पर बहुत भयानक कष्ट तो होता है, पर दमा का जोर दूर हो जाने पर वह स्वस्थ हो जाता है। अधिकतर अमावस्या और पूर्णिमा के दिन बीमारी बढ़ती है।
- दमे का दौरा कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक जारी रह सकता है। अक्सर देखने में आया है कि कुछ हफ्तों तक प्रत्येक रात्रि में एक ही समय पर दौरा उठता है, उसके बाद कुछ हफ्तों या महीनों तक बिलकुल नहीं पड़ता।(यह भी जाने - खासी होने की वजह )
अस्थमा की पहचान कैसे करें (How to diagnose asthma):-
- स्टेथिस्कोप' से छाती की परीक्षा करने पर साँय-साँय की आवाज सुनाई देती है। ।
- रक्त में इओसिनोफीलिया मिलती है। ।
- एक्स-रे में श्वसनिकायें अधिक स्पष्ट दिखायी देती हैं।
अस्थमा का परिणाम (Consequences of asthma):-
- प्रायः बचपन का दमा जवानी में अच्छा हो जाता है। पर जवानी में पैदा हुआ दमा सदा बना रहता है।
- दमे का दौरा बार-बार पड़ते रहने से रोगी को "एम्फीसीमा" रोग हो जाता है। जिससे हर समय रोगी का साँस फूलता रहता है।
अस्थमा के लिए चिकित्सा विधि (Therapy for asthma):-
- दमें के कारणों का पता लगाना चाहिए। तद्नुसार चिकित्सा करें।
- दमे के रोगियों में 'इओसिनोफीलिया' की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए रक्त परीक्षा करवा लेना चाहिये।
- दमा का आक्रमण होने पर श्वसनियों को विस्त करने वाली औषधि (Bronchodi lators) जैसे-'एफेड्रीन', एरथालीन', 'टेड्राल' आदि देना चाहिये ताकि श्वास मार्ग की रुकावट समाप्त हो जाय।
- 'एण्टीहिस्टामिन' औषधियाँ कुछ मास तक निरन्तर देते रहें।
- इनसे एलर्जी वाले श्वास रोग में लाभ होता है। कब्ज से दूर 1 दौरे को रोकने के लिये 'एण्टीस्टीन' की 1 या 2 गोली दिन में 3 बार दें।
- यह एक कष्टदायक रोग है। मूल कारण को दूर करें। शाम का खाना कम से कम मात्रा में लें। रखें।
अस्थ्मे में सावधानिया और परहेज- क्या करें क्या न करें (caution in asthma):-
- पथ्य-दमे के रोगी का भोजन खूब सावधानी से होना चाहिए। रोटी के साथ प्रतिदिन हरी पत्ती वाले साक काफी मात्रा में खाना चाहिए। टमाटर और गाजर आदि का सलाद बनाकर रोजाना खाना चाहिये।
- रात्रि का भोजन हल्का आवश्यक है। प्रतिदिन मौसमी फल खाना चाहिए। कोई ऐसा खाद्य पदार्थ नहीं खाना चाहिए जिससे एलर्जी का प्रभाव हो और गैस बने। शहद और लहसुन विशेष उपयोगी रहता है।
- बच्चों के दमा में-' डेक्स्ट्रोज' अच्छा लाभ देता है। इसका 3 चाय चम्मच लेमोनेट, सन्तरे के रस में दिन में 3 बार देना चाहिए। साथ ही इसमें हल्की चीनी मिला देना चाहिये।
अस्थमा में यह सब ना करें –
- तम्बाकू का सेवन बिल्कुल न करें। दूषित वातावरण से अपने को दूर रखें।
- सहायक चिकित्सा-हल्का-फुल्का व्यायाम नित्य करना चाहिए।
- खुली हवा में टहलना लाभदायक है और बहुत थोड़ी देर के लिये धूप भी शरीर को लगनी चाहिए।
- रोजाना 'मल्टी विटामिन्स' टैबलेट लेते रहें। प्राणायाम इस रोग में विशेष लाभकारी सिद्ध हुआ है।
- फिटकरी पाउडर 10-15 ग्रेन तक जीभ पर रख देने से दमे का दौरा शान्त हो जाता है। तारपीन के तेल का भपारा (Inhalation) भक है।

