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साँस फूलना | DYSPNOEA (साँस फूलने के कारण और लक्षण)

साँस फूलना को एनी नाम जैसे - कष्ट श्वास, डिस्पनीया, श्वासावरोध, कठिन अथवा श्रमपूर्ण श्वसन (Expira Cordyspnoea), वायु के निष्कासन में कठिनाई (Inspiratory dyspnoca), वायु के अंतर्ग्रहण में कठिनाई आदि । साँस फूलनाको सामान्य भाषा में 'दम फूलना' भी कहते हैं। 

जाने साँस फूलने के कारण और लक्षण को | Sas Fulne Ke Karan

साँस फूलने की बीमारी-  

साँस फूलने की बिमारी आज एक व्यापक बिमारी बनी हुई हैं, जो विभिन्न रोगों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है। कुछ रोगियों में साँस फूलने की तकलीफ वर्षों तक बनी रहती है जबकि कुछ रोगी हफ्ते-दस दिन से या घंटे-दो घंटे से यह परेशानी महसूस करने लगते हैं। साँस फूलने वाले रोगी को अतिशय कष्ट होता हे उसे किसी से बात करने में भी कष्ट होता है। कुछ रोगी लेटने पर साँस की शिकायत करते हैं जबकि बहुत से रोगी अधिक चलने पर या सीढ़ियों पर चढ़ने में या मेहनत (Hard working) का कोई कार्य करने पर ऐसी शिकायत करते हैं।

सांस फूलने का कारण (cause of shortness of breath):-

  • फेफड़े में द्रव। हृदयावरण में द्रव एकत्र होने। 
  • हृदय फेल्योर। हृदय के वाल्व खराब होने से।
  • ब्रोन्कियल अस्थमा (दमा) इओसिनोफीलिया। 
  • क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस। न्यूमोनिया (Pneumonia)
  • फेफड़े की टी. बी. (Pulmonary T.B.)। 
  • फेफड़े की झिल्ली में द्रव। फेफडे की झिल्ली में हवा एकत्र हो जाना। 
  • पल्मोनरी एम्बोलिज्म। .
  • हृदय की दुर्बलता । फेफड़े की दुर्बलता। 
  • वृक्क (Kidney) की खराबी। । यकृत (Liver) और पाचन क्रिया की गड़बड़ी। 
  • किसी भी रोग में अधिक कष्ट की स्थिति। 
  • मानसिक क्लेश (कभी-कंभी) ए भय या चिंता। 
  • शरीर से उत्पन्न किसी विशिष्ट विष (His tamine) की प्रतिक्रिया के कारण।

सांस फूलने के लक्षण (symptoms of breathlessness):-

  • साँस फूलने के अतिरिक्त कुछ रोगी निम्न लक्षणों की भी शिकायत करते हैं ।
  • दुर्बलता। भूख न लगना (Loss of appetite)
  • कब्ज (Constipation) खाँसी-जुकाम। कफ या बलगम आना। 
  • 10 श्वसन क्रिया में सीटी की आवाज। कभी-कभी खाँसी में खून।
  • पैरों अथवा सारे शरीर पर सूजन (Inflammation)
  • छाती में दर्द उठना/पसलियाँ चलना। कफ का ठीक प्रकार से बाहर न निकलना
  • पेट दर्द अथवा. सिरदर्द (1lendache) की - शिकायत।
  • छाती में जकड़ाहट । अचानक अधिक पसीना आना। जीभ तथा नाखूनों का नीला पड़ जाना। 
  • मुँह से झाग आना। हाथों में कंपन। । मूत्र की मात्रा बहुत कम या अधिक। 
  • साँस में विशेष प्रकार की दुर्गंध।  जोड़ों में दर्द (Joint Pain) आदि।

हृदय रोग की बढ़ी हुई अवस्था में साँस का फूलना अनिवार्य है। परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि साँस फूलने पर केवल हृदय रोग की ही शंका की जाए। श्वसन तंत्र (Respiratory system) के रोगी में भी साँस फूलता है। सामान्यतः अधिक परिश्रम करने पर कष्ट श्वास होता है। परंतु हृदय रोग के रोगी का अल्प परिश्रम से ही अथवा बिना परिश्रम के भी साँस फूल सकता है। 

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