हृदयावरण शोथ/पैरिकार्डाइटिस (PERICARDITIS)
पैरिकार्डाइटिस का अन्य नाम- हृदयावरण का प्रदाह, परिहृद शोथ। इसे हृदय झिल्ली शोथ के नाम से भी जाना जाता है। परिचय- Inflammation of the pericardium' यदि किसी कारण से हृदयावरण (Pericar dium) में प्रदाह हो जाए तो उसे पेरिकार्डाइटिस कहते हैं। इसमें हल्का बुखार, दर्द, सूखी खाँसी, श्वास कष्ट, दिल धड़कना, मंदाग्नि, अरुचि एवं हृदय में सूजन होती है।
हृदयावरण शोथ की रुपरेखा
- हृदयावरण शोथ के प्रकार
- हृदयावरण शोथ के प्रमुख कारण
- हृदयावरण शोथ के प्रमुख लक्षण
- हृदयावरण शोथ की पहिचान
- हृदयावरण शोथ का परिणाम
हृदयावरण शोथ के प्रकार (Types of cardiomyopathy)
- एडहीसिव पैरीकार्डाइटिस (AdhesivePericarditis) हृदयावरण शोथ जिसमें हृदयावरण असामान्य रूप से घने तंतु-ऊतक द्वारा हृदय से चिपक जाता है।
- संकीर्णक हृदयावरण शोथ (Constructive Pericarditis)-हृदयावरण शोथ जिसमें अंतरांगी एवं भित्तिक परतें एक-दूसरे से चिपक जाती है, जिसके साथ संपूर्ण हृदयावरण मोटा हो जाता है।
- फाइब्रिनी हृदयावरण शोथ (Fibrinous Pericarditis)-ऐसा हृदयावरण शोथ जिसमें हृदयावरण मक्खन के समान निःस्राव से ढ़क जाता है, जो सूख कर हृदयावरणीय सतहों
- हीमोरैहजिक पैरीका इटिस (Hemorrhagic Pericarditis)- ऐसा हृदयावरण शोथ जिसमें निःस्राव में रक्त पाया जाता है।
- इस्कीमिक पैरीकार्जाइटिस (Ischemic Pericarditis)- हृदय की स्थानिक अरक्तता. के परिणामस्वरूप होने वाला हृदयावरण शोथ।
- नियोप्लास्टिक पैरीका टिस (Neoplastic Pericarditis)- हृदयावरण से जुड़ी रहने वाली रचनाओं के दुर्दम अर्बुदों के द्वारा हृदयावरण के प्रभावित होने के कारण होने
- सीरोफाइब्रीनस पैरीकार्डाइटिस (Serofibrinous Pericarditis)– हृदयावरण शोथ जिसमें सीरमी निःस्राव बहुत बड़ी मात्रा में होता है। इसमें फाइब्रिन बहुत कम होता है। 8. यूरेमिक पैरीकार्जाइटिस (Uremic Pericarditis)— यूरीमिया के फलस्वरूप होने वाला वाला हृदयावरण शोथ। हृदयावरण शोथ।
- पैरीका इटिस में-पैरीकार्डियम (Covering over the heart) के भीतर रस, रक्त, पीव, फाइब्रिन आदि इकट्ठा होते हैं। जब रस, रक्त, पानी या पीव इकट्ठी होती है, तब उसको पैरिकार्डाइटिस विद इफ्यूजन (Pericarditis with effusion) कहते हैं। जब केवल फाइब्रिन ही इकट्ठा होता है तब उसे ड्राई फार्म कहते हैं।
हृदयावरण शोथ के प्रमुख कारण (Major causes of cardiomyopathy)
- मुख्य कारण आमवात।
- न्यूमोनिया, पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस; एम्फाइमा, सेप्टीसीमिया, वृक्क शोथ, मधुमेह, मारक आर्बुद आदि संक्रामक रोगों में हुआ करता है।
- इन्फार्शन कोरोनरी थ्रोम्बोसिस के पश्चात हृत्पेशी रोध गलन, मायोकार्डियल इन्फा र्शन के द्वितीयक रूप में।
- मूत्र विषमयता (यूरीमिया)। बाहरी अर्बुद के उपद्रव स्वरूप।
- घातक अर्बुद के उपद्रव स्वरूप में।
- एक्टीनोमाइकोसिस (Actinomycosis) | ( कभी-कभी मस्तिष्कावरण शोथ (Menin gitis), लोहित ज्वर, प्रायमरी एटिपिकल न्यूमोनिया, मिक्सीडीमा अण्डूलेण्ट फीवर आदि रोगों के उपद्रव स्वरूप।
- उत्तेजक कारणों में तमाम प्रकार के जीवाणु, सिफिलिस (Syphilis) बैक्टीरिया आदि।(इसे भी जाने - दिल की बीमारी बढ़ने की वजह )
हृदयावरण शोथ के प्रमुख लक्षण (Major symptoms of cardiomyopathy)
- हृदय स्थान पर तीव्र पीड़ा का होना।
- दर्द सीने से बायें हाथ की ओर प्रसारित।
- हृदय स्थान के ऊपर अग्रखण्ड की जगह पर दबाने से भयानक कष्ट।
- श्वास-प्रश्वास में कष्ट। पानी इकट्ठा होने पर बहुत अधिक। नाड़ी का स्पंदन ठीक नहीं।
- शुष्क 'वातिक कास' (Unproductive cough) और खाँसने पर कष्ट। उपद्रव रूप में जब यह रोग होता है तो पैदा होने पर शीत के साथ बुखार अधिक। दिल की धड़कन तेज। सीने का दर्द श्वास लेते समय, खाँसते समय तथा किसी भी प्रकार की हरकत करने पर उग्रतम।
- अरक्तता (Anemia) का लक्षण विशेष ज्वर 110° तक नाड़ी की गति 100-200 प्रति मिनट।
- एक-दो दिन में जब हृदयावरण में तरल (Effusion) भरा जाता है 'वेदना शान्त। 11 साँस लेने में कठिनाई बनी रहती है और खाँसने पर बड़ा कष्ट होता है। पग्रीवा (२) की शिरायें (Vein) उभरी हुई ।
हृदयावरण शोथ की पहिचान (Cardiovascular disease diagnosis)
- नाड़ी अस्वाभाविक भाव से चलती है और गति तेज हो जाती है।
- कलेजा धड़कता है।
- जब तक पानी इकट्ठा नहीं होता है तब तक घर्षण शब्द प्राप्त होता है। पानी या पीव हो जाने पर ठोस आवाज मिलती है।
- तरल की उपस्थिति में एक्स-रे लेने से रोग निर्णय हो जाता है। (जाने - भूलने की बिमारी "अल्जाईमर" के बारे में )
हृदयावरण शोथ का परिणाम (Result of cardiomyopathy)
अधिकांश रोगी उचित उपचार से ठीक हो जाते हैं। परन्तु कुछ रोगियों में सीरस, रक्तस्रावी तथा पूयजनक स्राव हृदयावरण में उपद्रव स्वरूप एकत्रित हो जाते हैं तथा । कभी-कभी अभिलग्न हृदयावरण शोथ (Adherent Pericarditis) हो जाता हैं.
हृदयावरण शोथ के लिए याद रखिए (Remember for Cardiovascular Inflammation)
- तीव्र रोग में शीघ्र परिवर्तन होते हैं। हृदय पेशी की कमजोरी के कारण हृदय गति बंद होने से प्रायः दूसरे या तीसरे सप्ताह में मौत भी हो जाती हैं ।
- हृयुमेटिज्म कारण होने पर हृत्पेशी प्रायः क्षतिग्रस्त हो जाती है।
- हृदय आपस में चिपक भी सकता है अथवा सपूय हृदयावरण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
- वृक्क रोग कारण हो और पूय पड़ जाय और रोगी बालक हो अथवा दुर्बल हो तो यह रोग कठिनाई से ही ठीक होता है।
